- भारतमें 54% रिक्रूटर्स का कहना है कि उन्हें मिलनेवाले आधे या उससे कम नौकरी के आवेद नही ज़रूरी योग्यताएं पूरी करते हैं
- 64% मानते हैं कि एआई वाले उपकरण भर्ती को तेज़ और आसान बना सकते हैं
- लिंक्डइन एक नया हायरिंग असिस्टेंट लॉन्च कर रहा है, ताकि रिक्रूटर्स ज़्यादा ज़रूरी कामों पर ध्यान दे सकें, और कंपनियों को ज़रूरी कौशल सिखाने में मदद करने के लिए नया एआई-पावर्ड कोचिंग फीचरभी लाया जा रहा है
भारत 27 फरवरी 2025: जेनरेटिव एआई अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं रहा,बल्कि यह व्यवसायों के लिए एक अनिवार्यता बन चुका है। पूरे भारत में बिजनेस लीडर्स इसकी संभावनाओं को तेजी से अपना रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े प्रोफेशनल नेटवर्क, लिंक्डइनके नए शोध के अनुसार,भारत में98% बिजनेस लीडर्स का कहना है कि 2025 में उनकी सबसे बड़ी रणनीतिक प्राथमिकता अपने संगठनों में एआई को तेजी से अपनाना होगा। हालांकि,सही कौशल वाली प्रतिभाओं को खोजना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भारत में 5 में से 3 रिक्रूटर्स के लिए एआई और इंसानी कौशल का सही संतुलन खोजना चुनौतीपूर्ण
लिंक्डइन के शोध के अनुसार,54% एचआर पेशेवरों का कहना है कि उन्हें मिलने वाले आधे या उससे भी कम आवेदन ही ज़रूरी योग्यताओं पर खरे उतरते हैं। सही तकनीकी (61%)और व्यावहारिक (57%)कौशल वाले उम्मीदवारों को खोजना उनकी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। भारत में सबसे मुश्किल से मिलने वाले कौशलों में शामिल हैं—सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग (44%)जैसे तकनीकी कौशल,एआई से जुड़ी विशेषज्ञता (34%)और संचार व समस्या-समाधान जैसे व्यावहारिक कौशल (33%)।
2025 में कंपनियां कर रही हैं ‘चुनिंदा भर्ती’
भारत में एचआर पेशेवरों का कहना है किउन्हें बहुत ज्यादा आवेदन (47%) मिलते हैं, लेकिन उनमें से कई सही फिट नहीं होते (41%),इसलिए वे 2025में ज़्यादा सोच-समझकर भर्ती कर रहे हैं। आधे से ज्यादा एचआर पेशेवरों का कहना है किवे केवल उन्हीं उम्मीदवारों से संपर्क करेंगे (55%) और उन्हें नौकरी देंगे (54%) जो कम से कम 80% या उससे ज़्यादा योग्यताएँ पूरी करते हैं।
लिंक्डइन इंडिया की प्रमुख रूचि आनंद, इंडिया कंट्री हेड,टैलेंट एवं लर्निंग सॉल्यूशंस,लिंक्डइनने कहा,
“एआई ने भर्ती और प्रतिभा विकास के तरीके को बदल दिया है,लेकिन असली बदलाव सिर्फ एआई अपनाने से नहीं,बल्कि इसे व्यवसाय के लिए फायदेमंद बनाने से आएगा। कई बार कंपनियां एआई टूल्स पर निवेश तो कर देती हैं,लेकिन सही प्रतिभा के अभाव में वे इसका पूरा लाभ नहीं उठा पातीं। इस समस्या से बचने के लिए,कंपनियों को कौशल-आधारित भर्ती की ओर बढ़ना चाहिए। एआई इनोवेशन को बढ़ावा देगा,लेकिनरचनात्मकता,संचार और सहयोग जैसे मानवीय कौशल ही कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में आगे बनाए रखेंगे।”
लीडर्स अब अपने कर्मचारियों के कौशल विकास पर दे रहे हैं जोर
भारत में10में से 8से ज़्यादा (84%)एचआर पेशेवरों का कहना है कि 2025में कर्मचारियों को नए कौशल सिखाना उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी। वे विशेष रूप सेएआई (84%)और संचार व टीम वर्क (82%)जैसे व्यावहारिक कौशलोंपर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
भारत में सर्वे किए गए100% लर्निंग एंड डेवलपमेंट (L&D)पेशेवरोंका भी यही मानना है किरचनात्मकता,जिज्ञासा और संवाद कौशल अब तकनीकी ज्ञान जितने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं।लगभग48% भारतीय बिजनेस लीडर्स यह भी कहते हैं कि एआई को तेजी से अपनाने के लिए कर्मचारियों के प्रशिक्षण और कौशल विकास में निवेश करना बेहद जरूरी होगा।
लिंक्डइन के नए एआई-पावर्ड टूल्स से रिक्रूटर्स अपने सबसे अहम कामों पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे
बदलते आर्थिक माहौल में कंपनियों को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करने के लिए, लिंक्डइननए एआई-पावर्ड टूल्स पेश कर रहा है। इन टूल्स की मदद से रिक्रूटर्स अपने सबसे रणनीतिक और लोगों से जुड़े कामों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
- भारत में लगभग हर पांच में से दो (37%)एचआर प्रोफेशनल्स रोज़ाना 1-3घंटे सिर्फ नौकरी के आवेदनों को छांटने में लगाते हैं, और हर पांच में से तीन (64%)का मानना है कि एआई-पावर्ड टूल्स भर्ती की प्रक्रिया को तेज़ और आसान बना सकते हैं।लिंक्डइन का नया हायरिंग असिस्टेंट रिक्रूटर्स के सबसे दोहराव वाले और समय लेने वाले कामों को अपने आप पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है,जिससे वे ज़्यादा ज़रूरी चीज़ों पर ध्यान दे सकें,जैसे—भर्ती करने वाले मैनेजर्स को सलाह देना, उम्मीदवारों से जुड़ना और भर्ती प्रक्रिया को बेहतर बनाना।
- भारत में 10 में से 7 (71%) एचआर प्रोफेशनल्स का कहना है कि उन्हें सही सीखने के संसाधन खोजने में परेशानी होती है।लिंक्डइन लर्निंग का नयाएआई-पावर्ड कोचिंग फीचरसीखने वालों कोटेक्स्ट या वॉइस के ज़रिए इंटरएक्टिव तरीके से असली दुनिया के उदाहरणों के ज़रिए व्यावहारिक कौशल विकसित करने में मदद करता है।अधिक जानकारी के लिए यहांदेखें।
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