गुजरात, अहमदाबाद 11 मार्च 2025: एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (EDII), अहमदाबाद ने 11 मार्च को संस्थान के परिसर में इन्डस्ट्री राउन्डटेबल मीट एवं थॉट लीडरशिप सेमिनार का आयोजन किया जो प्रोजेक्ट हैंडमेड इन इंडिया (एचएमआई) के तहत एचएसबीसी द्वारा समर्थित था।
प्रोजेक्ट एचएमआई के तहत कवर किए गए भुज (गुजरात) और इरोड (तमिलनाडु) क्लस्टरों के बुनकरों द्वारा प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। 16 बुनकरों और 3 अतिथि बुनकरों ने बांधनी, बाटिक ब्लॉक प्रिंट, अपसाइकल उत्पाद, अजरख, प्राकृतिक डाई उत्पाद, रेशम की साड़ियों और कपड़ा उत्पादों सहित हस्तनिर्मित कृतियों की अपनी विविध श्रृंखला का प्रदर्शन किया।
इन्डस्ट्री राउन्डटेबल मीट एवं थॉट लीडरशिप सेमिनार में सरकारी एजेंसियों, गैर सरकारी संगठनों, डिजाइन संस्थानों, शिल्प उद्यमियों, प्राकृतिक डाई सप्लायर्स, बुनकरों और कारीगरों ने भाग लिया। यह चर्चा ‘डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड टेक फॉर सस्टेनेबल क्राफ्ट: इंगेजिंग न्यू एंटरप्रेन्योर्स’ पर केंद्रित थी। पैनल चर्चा ‘सस्टेनेबिलिटी लर्निंग एक्सचेंज : अ कोऑपरेटिव इनिशिएटिव फॉर आर्टिसन्स एंड स्पेशलिस्ट्स टू शेयर इनसाइट्स एंड स्ट्रैटेजीज’ पर थी। नए बाजार संबंधों और बाजार विस्तार के माध्यम से समाधान खोजने के प्रयास; व्यवसाय में प्रौद्योगिकी के एकीकरण के बारे में जागरूकता और प्रदर्शन, सरकारी योजनाओं के साथ अभिसरण और उद्यमशीलता प्रथाओं पर उन्नत ज्ञान पर चर्चा की गई।
डॉ. सुनील शुक्ला, डायरेक्टर जनरल, ईडीआईआई ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, “एक स्थायी भविष्य की खोज में, ईडीआईआई प्रोजेक्ट एचएमआई के तहत अपनी विभिन्न पहलों के माध्यम से कारीगरों के जीवन में प्रगति और विकास लाने के लिए प्रतिबद्ध है। देश के कारीगरों और बुनकरों का संवर्धन और सशक्तिकरण आवश्यक है क्योंकि यही एकमात्र तरीका है जिससे हम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर सकते हैं।”
डॉ. रमन गुजराल, प्रोफेसर और डायरेक्टर- डिपार्टमेन्ट ओफ प्रोजेक्ट्स- कॉर्पोरेट्स ने कहा, “एचएसबीसी के एचएमआई परियोजना ने कारीगरों के लिए स्थायी आजीविका विकल्प सुनिश्चित करके उन्हें कुशल बनाने और सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। आज ये प्रशिक्षित शिल्पकार आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं और विकास के लिए रचनात्मक रूप से सोचने और व्यावसायिक रणनीतियों को लागू करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। मैं इस कार्यक्रम की सफलता से खुश हूं। प्रदर्शनी हमारे शिल्पों और शिल्पकारों की क्षमता को दर्शाती है।”
एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (EDII) द्वारा कार्यान्वित और HSBC द्वारा समर्थित प्रोजक्ट हैंडमेड इन इंडिया, भुज (गुजरात) और इरोड (तमिलनाडु) क्षेत्रों में हेन्डलुम बुनकरों और कारीगरों द्वारा सामना की जाने वाली महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करती है। इन चुनौतियों में मुख्य रूप से आधुनिक उपकरणों और तकनीकों, प्राकृतिक/जैविक सामग्रियों के बारे में अपर्याप्त ज्ञान या सीमित पहुंच के अलावा डिजिटल प्रचार सहित मार्केटिंग तकनीकों पर जागरूकता शामिल है।
इस परियोजना का उद्देश्य कौशल विकास, बाजार पहुंच और उद्यमशीलता सहायता प्रदान करके एकीकृत हस्तक्षेपों की एक श्रृंखला के माध्यम से अंतरों को कम करना है, जिससे बुनकरों की आजीविका में सुधार होगा और टिकाऊ हेन्डलून प्रथाओं को बढ़ावा मिलेगा। तीन वर्षों (2024-2027) की अवधि में,यह परियोजना से इन दोनों क्षेत्रों में 1,000 बुनकरों को प्रत्यक्ष और 2,000 अप्रत्यक्ष हितधारकों को लाभ होगा।
लवजीभाई नागजीभाई परमार: पद्मश्री पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा एवं प्रोजेक्ट HMI के लाभार्थी
हाथ से बुनाई की 700 साल पुरानी टांगलिया कला से सुरेंद्रनगर जिले के डांगसिया समुदाय के लोग जुड़े हैं। लवजीभाई नागजीभाई परमार प्रोजेक्ट HMI के लाभार्थी है एवं टांगलिया कला से जुडे हुए है। लवजीभाई नागजीभाई परमार को यह कला उनके पिता से विरासत में मिली है और उनका परिवार पीढ़ियों से इस कला का संरक्षण कर रहा है।
1986 में, डांगसिया समुदाय ने पहली बार वीवर्स सर्विस सेंटर में अपने नमूने प्रस्तुत किए, जिसके परिणामस्वरूप शॉल का पहला ऑर्डर मिला। तब से, कला को प्रसिद्धि मिली और समुदाय को लगातार ऑर्डर मिले। टांगलिया कला को GI टैग भी दिया गया है।
लवजीभाई नागजीभाई परमार पिछले 40 वर्षों से टांगलिया कला से जुड़े हैं। वे स्वंय प्रोडक्टस बनाते हैं एवं 40 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण भी दे चुके, जिससे युवा पीढी भी कला से जुडी रहे । कला में उनके योगदान के लिए उन्हें 1990 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सन्मानित किया गया था । 2019 में संत कबीर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है एवं 2025 में कला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हे पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा ।
लवजीभाई नागजीभाई परमार ने इस बुनाई कला को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए एक साझा सुविधा केंद्र स्थापित किया है, जहां 12 बुनकरों उनके साथ काम करके रोजगार प्राप्त कर रहे है। लवजीभाई नागजीभाई परमार ने ईडीआईआई के बारे में बात करते हुए बताया कि, “उन्होने ईडीआईआई से नेचरल डाईग, डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन भुगतान में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। साथ ही में ईडीआईआई के प्रदर्शनियों में भाग लेने से उन्हें ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिली है। जिससे कला अधिक लोगो तक पहोंच पाती है। एवं कला को जीवंत रखने और उत्पाद के विक्रय से संबंधित जानकारी भी ईडीआईआई द्वारा दी गई है।”
EDII द्वारा लवजीभाई नागजीभाई परमार को सन्मानित किया गया इन्डस्ट्री राउन्डटेबल मीट एवं थॉट लीडरशिप सेमिनार में ।
लवजीभाई नागजीभाई परमार भविष्य में टांगलिया कला के उत्पादों को ऑनलाइन बेचने की योजना बना रहे हैं, जिससे उनके समुदाय के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और कला जीवंत रहेगी ।