Homeगुजरातअनेक धार्मिक विविधताओं से जूडी श्रृंगी ञुषी की भूमि-बिहार से ९७०वीं रामकथा...

अनेक धार्मिक विविधताओं से जूडी श्रृंगी ञुषी की भूमि-बिहार से ९७०वीं रामकथा आरंभ हुआ।।

यह सगर्भा भूमि है जहां भी खदान करो मूर्ति निकलती है।

बिहार ने अपने आध्यात्मिक मूल्यों को संवारा है।।

वित्त सत्ता,राज सत्ता और धर्म सत्ता लोगों से दूर जा रही है,फिर लोगों तक पहुंचनी चाहिए।।

रामचरितमानस में प्रत्येक कांड में राम का विषेश विहारी रूप दिखता है।।

यह लखीसराय नहीं लेकिन लक्कीसराय-बहुत नसीब वाली भूमि है।। 

त्रेता युग में राजा दशरथ के वहां संतान सुख नहीं था उस वक्त जो ऋषि ने पुत्र कामेष्टि यज्ञ करने की बात कही यह श्रृंगी ऋषि की यह तपोभूमि। जहां मूर्ति कला का एक बड़ा क्षेत्र भी है और जगन्नाथ पुरी एवं मां त्रिपुरा देवी जो वैष्णो देवी से संबंध रखती है ऐसी अनेक विदविद धर्म धार्मिकता से भरी भूमि, श्रृंगी ऋषि के आश्रम से यह रामकथा ऋषि ऋषिश्रृंग आश्रम-जो लखीसराय बिहार स्थित है।।

शुभकरण त्रिवेणी फाऊंडेशन-कोलकाता से इस राम कथा का आयोजन हुआ है।।और विशेष सहयोग श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव ट्रस्ट-अशोक धाम लखीसराय से मिला हुआ है।।

कथा शुरू होने से पहले बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिंहा जी,भाजपा के प्रांत अधिकारी संजय जी लखीसराय के रविदास पटेल एवं ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉक्टर अमित कुमार के हस्तो दीप प्रागट्य हुआ और सभी ने अपना प्रासंगिक प्रवचन एवं सभी का स्वागत किया।।

सृंगी रिषिहि बसिष्ठ बोलावा।

पुत्रकाम सुभ जग्य करावा।।

भगति सहित मुन्ही आहूति दिन्हे।

प्रगटे अगिनि चरु कर लिन्हें।।

जो बसिष्ठ कछु ह्रदय बिचारा।

सकल काजु भा सिध्ध तुम्हारा।।

-बालकॉंड

बालकॉंड से ली इन्ही बीज पंक्तियों से आरंभ करते हुए बापू ने बताया कि भगवत कृपा से लखीसराय नगर में आध्यात्मिक,सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भूमि को प्रणाम है।।यह भूमि की विशेषताओं को जानकर जहां भगवान बुद्ध ने चातुर्मास किया, महादेव अशोक धाम में विराजित है और भगवान ऋषि श्रृंगी ऋषि की यह तपस्थली है,इसका हर्ष है। बिहार में 17-18 कथा हुई है।।

यहां सीता जी का मंदिर भी सरकार करवाने जा रही है और श्रृंगी ऋषि का भी मूर्ति प्रतिस्थापन हो रहा है उनके लिए विशेष प्रसन्नता और साधुवाद व्यक्त किया।।

बापू ने कहा हम जहां कथा करते हैं बिहारी शब्द से ही आरंभ करते हैं(द्रवउं सो दशरथ अजिर बिहारी) यह सगर्भा भूमि है जहां भी खदान करो मूर्ति निकलती है। बिहार ने अपने आध्यात्मिक मूल्यों को संवारा है

वित्त सत्ता,राज सत्ता और धर्म सत्ता लोगों से दूर जा रही है फिर लोगों तक पहुंचनी चाहिए।।

धन से दस गुना सुख मिलता है।द्रव्य का दान कर से करने से सो गुना सुख मिलता है,त्याग करने से सहस्र गुना और त्याग का अहंकार का भी त्याग करने से अनंत गुना सुख मिलता है।।

यहां राम जन्म के पांच और भी कारण कह सकते हैं जैसे प्रथम राजा खुद गुरुद्वारा गए।दूसरा वशिष्ठ ने गुरुद्वारा से आशीर्वाद पाया। तीसरा है श्रृंगी ऋषि को बुलाया गया।चौथा पुत्र कामेष्ठी यज्ञ हुआ और यज्ञ पुरुष प्रकट हुआ।पांचवा यज्ञपुरुष ने वशिष्ठ को आशीर्वचन दिए।।

इसलिए यह कथा का नामकरण मानस श्रृंगी ऋषि जहां बालकांड से यह तीन पंक्ति उठाई है।।साथ-साथ प्रवाही पवित्र और परोपकारी परंपरा ग्रंथ परिचय कहते हुए बापू ने कहा कि सात सोपनो का यह ग्रंथ है। प्रथम सोपान बालकांड है।। रामचरितमानस में राम का विषेश से विहारी रूप का दर्शन करवाते हुए कहा बालकांड के राम अजिर बिहारी है।अयोध्या कांड के चित्रकूट विहारी।अरण्य कांड के राम आश्रम बिहारी, किष्किंधा कांड के राम व्रत बिहारी,सुंदरकांड में हनुमंत बिहारी,लंका कांड में युद्ध विहारी और उत्तरकांड के राम अवध बिहारी है।।

प्रथम सोपान बालकांड के मंगलाचरण में संस्कृत से शुरू किया सात मंत्र और बाद में लोक बोली में आते हुए तुलसीदास जी ने चौपाई सोरठा शुरू किया।।

बापू ने कहा कि हर एक नगर में पाठशाला,भोजन शाला,गौशाला,व्यायाम शाला और धर्मशाला होना चाहिए।।यह लखीसराय नहीं लेकिन लक्कीसराय बहुत नसीब वाली भूमि है।।

और अलग-अलग वंद्नायें करते हुए तुलसीदास जी ने सब की विशेष रूप में वंदना की और फिर गुरु वंदना की।गुरु वंदना का गान करने के बाद हनुमान जी की वंदना का विशेष गान होता है। हनुमान हनुमंत वंदना के बाद आज की कथा को विराम दिया गया।।

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