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रामचरितमानस मेरा श्वास है, भगवद गीता मेरा विश्वास है, श्रीमद् भागवत मेरी तलाश है और उपनिषद मेरा प्रकाश है।।

भरोसा भरोसे को पैदा करता है,यह ग्रामर नहीं गिरा है।।

मानस भागवत यात्रा का मनोरथ है।।

इस साल तुलसी जयंति हार्वर्ड युनिवर्सिटी के परिसर में मनायी जायेगी।।

हर एक यात्रा का जन्म पद यात्रा है।।

अंतरिक्ष यात्रा की जननी भी पदयात्रा है।।

राम राज्य का रथ जोड़ने के लिए पदयात्रा करनी होगी।।

मंगलाचरण के पहले श्लोक में ही चारों वर्ण की और संकेत है।।

केन्या की रमणीय भूमि केरिचो की प्राकृतिक नगरी केरिचो में चल रही रामकथा रविवार को दूसरे दिन में प्रवेश कर रही है तब कथा प्रेमी और मानस प्रेमी-तुलसीदास जी प्रेमी सभी के लिये खुशी के समाचार भी मिल रहे है।।

हर साल श्री तुलसीदास जी महाराज का जन्म उत्सव तुलसी जयंति के रुप में चित्रकूटधाम तलगाजरडां में नियमित रुप सें सालों से मनाया जाता है।।

इस साल तुलसी जन्मोत्सव तुलसी जयंति आंतर राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जायेगा।।

बापु की रामकथा केम्ब्रीज स्थित विश्व विख्यात हार्वर्ड युनिवर्सिटी में १५ अगस्त से होने जा रही है।।कथा के दरमियान १९ अगस्त तुलसीदास जी जयंति भी है और ये आनंद की बात है की इस साल हार्वर्ड युनिवर्सिटी में तुलसी जयंति मनायी जायेगी।।

साथ ही वहां होने जा रही रामकथा का विषय भी बापु ने तय कर लिया है और कल बताया की ‘मानस गुरु प्रसाद’ पर नव दिवसीय संवाद होगाा।।

तुलसी जी ने गुरु प्रसाद पंक्ति पुरे मानस में तीन बार लिखी है वो भी बापु ने बताया।।

दूसरे दिन की कथा के आरंभ में दो बात की पीड़ा व्यक्त करते हुए बापू ने बताया दो दिन पहले युगांडा में एक हादसे में २०-२५ बच्चों की मृत्यु हुई।जब अफ्रीकन देश में व्यासपीठ है तो उनके परिवार को दिलसोजी और श्रद्धांजलि पेश करते हुए बापू ने कहा कि श्रद्धांजलि के साथ प्रसाद राशि भी पहुंचाई जाएगी।। वैसे ही अहमदाबाद में एक पटाखे की फैक्ट्री में आग लगने से नव व्यक्ति की मृत्यु हुई। उनके प्रति संवेदना और श्रद्धांजलि के रूप में प्रसाद राशि पुष्पांजलि के रूप में समर्पित करने की बात की।।

श्रीमद् भागवत में देहरथ के रूपक का वर्णन है।मैं साल में दो-तीन बार भागवत का पारायण करता हूं भागवत का में वक्ता नहीं।गोपीगीत का गान किया जैसे शुकदेव जी ने गाया।मैं भागवत का छात्र भी नहीं केवल श्रोता हूं।। रामचरितमानस मेरा श्वास है, भगवद गीता मेरा विश्वास है,श्रीमद् भागवत मेरी तलाश है और उपनिषद मेरा प्रकाश है।।भरोसा  भरोसे को पैदा करता है,यह ग्रामर नहीं गिरा है।। लेकिन बापू ने एक मनोरथ व्यक्त किया कि मानस भागवत यात्रा हम करेंगे।जहां-जहां व्यास जी ने पीठिका रखी वहां यात्रा करेंगे और आखिर में कृष्ण शंकर दादा की भूमि अहमदाबाद की सोला भगवत विद्यापीठ में पूर्णाहुति करेंगे।।हर एक यात्रा का जन्म पद यात्रा है।।अंतरिक्ष यात्रा की जननी भी पदयात्रा है।।सुनीता विलियम्स ने भी यही लिखा है राम ने पदयात्रा की उसे में यज्ञयात्रा कहता हूं। बिना पदयात्रा रथ यात्रा की कामना नमकीन भूमि में बीज बोने जैसी बात है।।मां की कोख में बच्चा पदयात्रा पद प्रहार करता है।।राम राज्य का रथ जोड़ने के लिए पदयात्रा करनी होगी।।कृष्ण ने पदयात्रा की, शंकराचार्य जी ने की,गोस्वामी जी ने भी की,शिव जी ने पदयात्रा की,विनोबा भावे ने भी पदयात्रा की और विविध यात्राओं में पोथी यात्रा,शोभा यात्रा,वर यात्रा,कलश यात्रा,तीर्थ यात्रा,वन यात्रा,दशरथ की स्वर्ग यात्रा,पाताल यात्रा,बुद्ध की धर्मचक्र यात्रा, गंगासागर यात्रा,जीवन यात्रा,अंतरिक्ष यात्रा,विदेश यात्रा,विमान यात्रा,बस यात्रा, रेल यात्रा और आखिर में स्मशान यात्रा।।

यहां पूछा गया था वर्णाश्रम क्या है?बापू ने कहा ज्ञान शक्ति से जीवन प्रवृत्त है वह ब्राह्मण। धन शक्ति में प्रवृत क्षत्रिय,वित्त शक्ति से प्रवृत वैश्य और श्रम शक्ति से प्रवृत वो सेवक है।। तन प्रधान-सेवक, धन प्रधान-वैश्य,मन प्रधान-क्षत्रिय और आत्म प्रधान है वह ब्राह्मण है।।

मंगलाचरण के श्लोक

वर्णनां अर्थ संघनां रसनां छंद सामपि।

मंगलानां च कर्तारौ वंदे वाणि विनायकौ।।

वहां वर्ण,अर्थ संघ और रस में एक-एक वर्ण का संकेत है।।

बापू ने यह भी बताया कि जयदेव भाई मांकड़ बता रहे थे हमारे घर में पीतल के बर्तन थे और एक बार पिताजी-शिरीष भाई-ने अपने पिता डॉलर काका से कहा कि हम अब स्टील के बर्तन ले लेते हैं, तब डॉलर काका ने कहा कि हमारे आसपास सबके पास जब स्टील के बर्तन आ जाए तब हम भी खरीद लेंगे!यह साधु ब्राह्मण का जवाब है। लोग ऐसे मूल्य के साथ जीवन जीते थे।। लेकिन आज चारों ओर हमारा मूल्य करने के लिए लोग घूम रहे हैं,खरीददार फिर रहे हैं इसलिए बट जाना मगर बिकना नहीं।। कथाक्रम में हनुमंत वंदना के बाद राम राज्य में सहयोग किया वह सब की वंदना करते हुए मानस के प्रधान युगल की वंदना,सीताराम जी और जगत जननि जानकी की वंदना हुई और नाम वंदना में बताया की लीला,धाम,रूप समझ में ना आए केवल नाम पकड़ के रखना।।

== समाप्त ==

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