
- वैद्य परंपरा से विकसित यह मिश्रण रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कैंसर उपचार के दुष्प्रभाव कम करने में सहायक
जयपुर | 25 अगस्त 2025: कैंसर जैसी घातक बीमारी, जिसे आज भी दुनिया भर में बड़ी चुनौती माना जाता है, उसके उपचार के क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा से जुड़ा एक उल्लेखनीय प्रयास लंबे समय से मरीजों को नई उम्मीद देता आया है। ‘कर्कटोल’ नामक आयुर्वेदिक योगिक अनेक मरीजों के लिए लाभकारी साबित हुआ है और आज भी इसे कैंसर उपचार की सहायक संभावनाओं के रूप में उपयोग में लिया जा रहा है। वर्षों के उपयोग और अनुभवजन्य परिणामों से यह सिद्ध हुआ है कि इस अनूठे मिश्रण से भारत सहित विदेशों में भी सैकड़ों कैंसर मरीजों को लाभ प्राप्त हुआ है।
ग़ौरतलब है कि शोध और चिकित्सकीय आकलनों के आधार पर कर्कटोल गर्भाशय, स्तन, यकृत (लीवर), हड्डी, भोजन नली, रक्त कैंसर, सर्विक्स, ओवरी, यूट्रस, लंग्स, यूरिनरी ब्लैडर आदि कैंसर में तथा खासकर प्रोस्टेट कैंसर में प्रभावी पाया गया है। महत्वपूर्ण रूप से, भारत सरकार के केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सी.सी.आर.ए.एस) ने कर्कटोल की टॉक्सीसिटी टेस्टिंग पूरी कर ली है, जिसमें यह सुरक्षित और बिना किसी दुष्प्रभाव के प्रमाणित हुआ है।
बातचीत के दौरान डॉ. विपिन तिवारी ने बताया कि वह स्वयं इस उपचार को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, ”लगभग 45 वर्ष पूर्व अपनी अथक मेहनत, गहन अध्ययन के आधार पर मेरे दादाजी वैद्य नंदलाल तिवाड़ी द्वारा 8 जड़ी बूटियां को मिलाकर एक योगिक तैयार किया गया था, जिससे कैंसर मरीजों के इलाज में आशातीत सफलता मिली। कर्कटोल से मरीजों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है अब तक देश-विदेश के सैकड़ों कैंसर मरीज इससे लाभान्वित हो चुके हैं। मेरा उद्देश्य केवल यही है कि इस अमृत तुल्य कर्कटोल से देश-विदेश के अधिक से अधिक कैंसर मरीजों की सेवा की जा सके।”
आयुर्वेदिक परंपरा और आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान के संगम के रूप में कर्कटोल आज भी कैंसर उपचार की सहायक संभावनाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। निरंतर अनुभवों और शोध के साथ यह प्रयास आगे भी कैंसर मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है।

