वाल्मिकी आदि कवि है और योगी भी है।।
साधु को पहचानना कठिन है।।
अध्यात्म जगत में गुरुवाणी से ऊपर कोई वाणी नहीं।।
सृष्टि सब से पहला अवतार है।।
अनुरागी पना भी योगी पना है।।
संतराम महाराज के १९४ वें समाधि महोत्सव पर चल रही रामकथा धारा के चौथे दिन विशेष वक्ताओ की श्रेणी में भागवत कथाकार भूपेंद्र भाई पंड्या ने अपना भाव रखते हुए विशिष्ट बात करते हुए कहा कि यह अमृत कुंभ की कथा है। यह शास्त्र प्रमाण है कहा जाता है कि अमृत कहां है? पांच स्थान दिखाएं समुद्र में,चंद्रमा में,प्रियतम के मुख पर,नाग लोक में और स्वर्ग में है।।यदि समुद्र में अमृत है तब वह खारा क्यों है? चंद्रमा क्षय क्यों होता है?प्रियतम का पति का मृत्यु क्यों होता है? नाग लोक में नाग के कंठ में जहर क्यों है और स्वर्ग लोक में से पतन क्यों होता है आखिर अमृत कहां है?भागवत जनों के कंठ में बसता है।भागवत कथा में अमृत है इसलिए ये कथा कुंभ स्नान है।।और इतने बड़े अमृत के स्टॉकिस्ट बापू के पास हमें मुफ्त में अमृत मिल रहा है।।
आज कथा में जूनागढ़ प्रेरणा धाम एवं भाण साहब जगह कमीजला से जानकी दास बापू और निजानंद स्वामी, डाकोर के दंडी आश्रम महंत विजय दास जी भी उपस्थित थे।।
यहां संत-सपूत-साक्षर की त्रिवेणी में समरसता की त्रिवेणी का भी संगम हो रहा है।।
शिव अनादि योगी है,अनादि कवि भी है।वाल्मिकी आदि कवि है और योगी भी है।।
बापू ने गत दिन यहां कथाकार त्रिवेणी में जो भी बात हुई उन पर अपनी प्रसन्नता करते हुए कहा कि यहां चार प्रकार की वाणी प्रकट हुई।।गिर्वाण गिरा जो वेद की संस्कृत वाणी है। पुराण गिरा पौराणिक बाणी,अवधुती निर्वाण गिरा और गुरु वाणी गुर्वाण गिरा में संतों ने अपना प्रवचन किया।।
तीन शब्द महत्व के है जीवात्मा और परमात्मा जीवात्मा थोड़ा सहज है। परमात्मा की पहचान भी सहज है लेकिन महात्मा दुर्लभ है।।साधु को पहचानना कठिन है।।अध्यात्म जगत में गुरुवाणी से ऊपर कोई वाणी नहीं।।
फिर बापू ने समंदर में से राम चरित्र सागर जो खारा नहीं है।कृष्णचंद चंद्र में कोई वध घट नहीं है,सत्य का स्वर्ग पर अपनी बात कही।।
रामदास बापू के ग्रंथ के सूत्र भी बापू ने बताएं। योगी की व्याख्या कहते हुए बापू ने कहा जो भोगी नहीं है वो योगी बै।। क्योंकि हमारी प्रत्येक इंद्रिय भोग का काम करती है। लेकिन किसी का रूप देखकर कृष्ण का दिव्य स्वरुप याद आए तो वह भोग नहीं है। कोई भी व्यंजन का स्वाद लेते वक्त प्रभु प्रसाद याद आए श्रवण के वक्त।।
सृष्टि सब से पहला अवतार है बाकी के अवतार सृष्टि पर हुए हैं। सृष्टि परमात्मा का प्रथम अवतार है इतना जानने से यह सब मिथ्या है वह सब निकल जाएगा।। ब्रह्मचर्य वानप्रस्थ किसी आश्रम की बातों में जाने से पहले आश्रय खोज लो।। बापू ने कहा जो रोगी नहीं है,कुयोगी नहीं,अभोगी नहीं,भोगी भी नहीं जो रागी नहीं, जो सहयोगी है वही योगी है।। बहुत कम लोगों अपना सम्मान फूलों से होता है ज्यादा सन्मान लोगों की भूलों से ही होता है।। त्याग करना भी योग है। मिथ्या भाषण पर,नारी पर कूदृष्टि और समझे बगैर हिंसा करना सबसे बड़ा पाप है सीता जी ने वाल्मीकि रामायण में कहा है।।
अनुरागी पना भी योगी पना है।।
कथा प्रवाह में चार घाट पर कथा चल रही है। उस वक्त कुंभ में जाग बालिक और भारद्वाज के बीच संवाद में से शिव कथा प्रगटी है।। और शिव कथा में शिव चरित्र में पार्वती का जन्म हिमाचल के वहां होता है।। और फिर तप करके शिव को पाती है और शिव से प्रश्न पूछती है राम तत्व क्या है? भगवान शंकर ने राम अवतार के पांच कारण की बात कही और अयोध्या में भगवान राम दशरथ के महल में कौशल्या की कोख से प्रकट होते हैं।। और यह व्यास पीठ से त्रिभुवन को राम जन्म की बधाई देते हुए आज की कथा को विराम दिया गया।।