कई मनुष्य भव्य होते हैं दिव्य नहीं होते,दिव्य वह है जो नित नूतन है।।
सनातन का कभी पतन नहीं है।
परापूर्व से जो अचल है वह सनातन है।
यह ऐतिहासिक कथा नहीं आध्यात्मिक कथा है।।
सनातन की यह यात्रा अब भगवान जगन्नाथ के रथ की तरह चलती रहेगी:आचार्य गोविंद गिरि जी।।
साधुओं का समूह नहीं होता भेडों का होता है,साधु दलवंत नहीं होना चाहिए।
जहां सनातन धर्म की आलोचना हो ऐसे फंक्शन में भी जाना बंद कर देना चाहिए।।
खोजना बंद करो और खो जाओ वह आपको खोज लेगा!
भारतीय राजधानी की कलाकृती सम भारत मंडपम् में चल रही रामकथा का तीसरा दिन आज कृष्ण जन्मभूमि न्यास के गोविंद गिरी जी महाराज और तजाकिस्तान के राजदूत की विशेष उपस्थिति रही सनातन शब्द के विद्विद शब्दकोश में अर्थ दिए गए हैं इनमें एक है भगवद्गोमंडल जो गुजराती भाषा का ग्रंथ है लेकिन सार्वभौम है।वहां सनातन की परिभाषा दी गई है।वहां से शुरू करते हुए बापू ने कहा एक अर्थ है: दिव्य पुरुष।। देव पुरुष नहीं, क्योंकि देव स्वार्थी होते हैं।छल कपट करते हैं। देव वह है जिसको किसी पर भरोसा नहीं।लेकिन भगवान बुद्ध,महावीर और शंकराचार्य से लेकर जे कृष्णमूर्ति और ओशो तक सभी दिव्य चेतनाएं से हमारा नवमंडल भरा है और यह हमें प्रभावित नहीं प्रकाशित करता है।। गांधी और विनोबा भी ऐसे ही सनातन है।।
कई मनुष्य भव्य होते हैं दिव्य नहीं होते। दिव्य वह है जो नित नूतन है।।
अर्जुन कृष्ण को कहते हैं कि आप सनातन पुरुष है भगवत गीता में सात बार सनातन शब्द आया है। शाश्वत शब्द 10 बार आया है।। रामचरितमानस में शाश्वत शब्द दो बार आया है।। अत्री स्तुति का गान करते समय बापू ने कहा कि आप अन्यथा मत लेना लेकिन जो-जो ऋषि जैसे गान करते हैं वह सब शायद मुझे सुनाई देता है।।
चार प्रकार के भक्त कह गए इनमें से आप किस भक्त के वत्सल है? तब अत्रि कहना चाहते हैं रजोगुणी,तमोगुण,सत्व गुनी नहीं लेकिन गुणातित भक्त के भगवान वत्सल है।।सनातन का कभी पतन नहीं है। परापूर्व से जो अचल है वह सनातन है। यह ऐतिहासिक कथा नहीं आध्यात्मिक कथा है।।
हमारे पितृओं किसी मंत्र के बिना,बिना बुलाए हमारी मुश्किल समझ कर किसी भी स्वरूप में आ जाए वह सनातन है।।चेतनायें घूम रही है।आत्म सम्मान,आत्म स्मरण और आत्म बल अस्मिता के तीन अर्थ बताएं।।
साधुओं का समूह नहीं होता भेडों का होता है। साधु दलवंत नहीं होना चाहिए। ग्रुप बनाकर, मूल को भुलाकर,केवल शाखा फैलाएं ऐसा नहीं होना चाहिए।।मजहब यह पर्सनल ट्रुथ है धर्म वैश्विक सत्य है ऐसा स्वामी शरणानंद जी ने बताया। पुस्तक हाथ में रहा शिक्षक है ऐसा डॉक्टर राधाकृष्णन ने कहा है।।पुस्तक शिक्षक है ग्रंथ गुरु है। रामचरितमानस सदग्रंथ सद्गुरु है।।आदमी धार्मिक नहीं धर्मशील होना चाहिए। भागवत में भी सनातन के 30 लक्षण बताएं।।
सनातन धर्म पर जानबूझकर प्रहार हो रहे हैं। अवतारों की निंदा हो रही है,अवतारों को नीचा दिखाई जा रहा हैं। पुस्तकों में भी भेल सेल हो रही है, सबको नीचा दिखा रहे हैं। जहां सनातन धर्म की आलोचना हो ऐसे फंक्शन में भी जाना बंद कर देना चाहिए ऐसा बापू ने बताया।। जो ब्रह्मचारी और क्रिया रहित मौनी महापुरुष है वह सनातन है। ब्रह्मा को भी सनातन कहा है।। तल्लीन होकर एलिप्त हो जाओ ऐसा शरणानंद जी महाराज ने कहा है।। खोजना बंद करो और खो जाओ वह आपको खोज लेगा! एक अर्थ है विष्णु,परमात्मा,नारायण,शिव, सूर्य के 108 नाम में से एक नाम,अनादि,मूल, प्राचीन,पहले का,जिसका अंत नहीं,अविनाशी,नित्य एक भागवत का श्लोक कहा
मूलंहिविष्णुर्देवानांयत्र धर्म सनातन:
तस्य च ब्रह्म गोविप्राषटकोयग्यासदक्षिणा:
जिसका मूल विष्णु है।यानी की विशालता है। जो विष्णु सनातन धर्म में रहते हैं सनातन धर्म का एक स्वभाव मोक्ष भी है।। सनातन धर्म के संकेत में वेद, गाौ( गाय,वाणी,इंद्रिय,जल आदि),विप्र,तप,दक्षिणा पूर्वक का यज्ञ-यह पांच लक्षण भागवत के पृथु राजा में है।आनंद शंकर ध्रुव कहते हैं धर्म किसी त्योहार पर पहनने के वस्त्र नहीं हमारी चमडी है।।
कथा के आखिर में राम जन्मभूमि न्यास के गोविंद गिरी जी ने अपना जोश पूर्ण वक्तव्य देते हुए कहा संपूर्ण विश्व एक ही शक्ति का आविष्कार है वही सनातन है।।
और मैंकोले ने 1836 में गुलाम करने के लिए शिक्षा प्रथा डाली। आदरणीय प्रधानमंत्री ने कहा है कि अगले 10 साल में गुलामी का एक-एक चिन्ह हटा देंगे।राष्ट्रपति भवन में मिलकर वह आए और बताया कि अंग्रेजों की फोटो हटाकर वहां हमारे नौजवानों और हमारे शहीद हुए सपूतों की फोटो लगाई गई है ऐसे भी लोग आज तक नहीं देखे जो देश एक देश को शस्त्र बेचे, दूसरे देश को बेचे, अशांति फैला कर भी शांति का नोबेल मांगता रहे! और ना मिले तो किसी और से मिला नोबेल भी स्वीकार करें ऐसे बेशर्म आदमी आज तक नहीं देखा! लेकिन सनातन की आहलेक जगी है वह जगन्नाथ के रथ की तरह आगे ही आगे चलती रहेगी।।

