Homeगुजरातसाधु के संग से गंगावत, गगनवत, गंडवत और गेयवत पवित्रता आती है।।

साधु के संग से गंगावत, गगनवत, गंडवत और गेयवत पवित्रता आती है।।

लोकमत से ज्यादा साधुमत महत्व का है।।

काला रंग न शुभ है ना अशुभ है,वह दोनों से पर है इसलिए मुझे पसंद है।।

यह मेरा मानस चलता फिरता औषधालय है।।

राम जन्म की त्रिभुवन को बधाइयां।

महाराष्ट्र की वीर और धीर धरा के सभी धीर पुरुषों को प्रणाम करते हुए यवतमाल विदर्भ से चौथे दिन की राम कथा का आरंभ करते हुए बापू ने कहा कि लोकमत से ज्यादा साधु मत महत्व का है।।

यहां मनोरथी परिवार की तरफ से पूछा गया था कि बापू आपको काला रंग क्यों पसंद है? बापू ने कहा कि मेरे साधु मत के अनुसार काला रंग न शुभ है ना अशुभ है,वह दोनों से पर है इसलिए मुझे पसंद है।। और हमारे अवतार लीला में महत्व के अवतार भगवान राम और कृष्ण भी श्याम रूप में आए हैं। मीराबाइ को भी श्याम रंग सांवला रंग पसंद था।। क्योंकि काला रंग हर एक वस्तु का स्विकार करता है।। इसलिए काले रंग वाले कपड़े पहनने वाले को गर्मी ज्यादा लगती है।।

किसी ने पूछा था कि एक ही आसन पर बैठकर 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से सिद्ध हो जाएंगे? बापू ने कहा कि सिद्ध होने के लिए नहीं शुद्ध होने के लिए पाठ करो! क्योंकि हमने देखा है बड़े-बड़े सिद्ध भी कभी ना कभी गिरे हैं।।

हनुमान चालीसा में हनुमान शब्द चार बार आया है। और 40 में रहे शून्य को निकाल दो तो चार बार रहे हनुमान को पकड़ो।। वह हमें धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष प्रदान करेगा।। इसलिए चार बार लिखा गया है आदमी आदमी ना बन पाया,

तो फिर उसने खुदा बना दिया।

इतना झूठ अच्छा लगा उसको,

सच को शूली पर चढ़ा दिया।।

बापू ने कहा कि यह मेरा मानस चलता फिरता औषधालय है।। मैंने मानस मेडिसिन तैयार की है और हिला हिला कर आप सबको पिला रहा हूं। रामचरितमानस में नव पितृ और नव माताओं की चर्चा है।। पहले माता मां भवानी है और फिर मां जानकी,शतरूपा,कौशल्या,अहल्या,शबरी,तारा, मंदोदरी और त्रिजटा है।।

और पितृओं में आदि पिता शिव है। फिर स्वयंभू मनु दशरथ,जनक,जटायु,वाली,रावण,सत्य केतु और राम है।।

कुछ बाप रजोगुणी, कइं पिता तमोगुणी और कईं सत्वगुणी है।वाली रजोगुणी बाप है। रावण तमोगुणी बाप है। दशरथ,जनक,मनु,सत्य केतु सत्वगुणी बाप है।।लेकिन महादेव और भगवान राम गुणातित बाप है।।

वैसे धर्म पिता और क्षमा को माता कहा है आत्मा को पिता और मति बुद्धि को माता कहा है।। माता-पिता देव है जहां तक वह जीवित है तो उनकी सेवा करो और यदि नहीं है तो स्मरण करो।।

साधु के संग से इतनी पवित्रता आती है इनमें गंगावत, गगनवत, गंडवत यानी कि हाथी के गंड स्थल जैसी पवित्रता, मोती जैसी पवित्रता,भीष्म की ताकत और गेयवत यानी कि गाने योग्य पवित्रता आती है।।

माता-पिता का श्रद्धा से स्मरण करना श्राद्ध है।। शिव चरित्र का गायन करने के बाद राम जन्म की और ले जाते हुए बापू ने कहा कि ओशो का निवेदन है कि कैलाश में आज भी 500 बुद्ध पुरुष बैठे हैं। जब इनमें से कोई निर्वाण पद को पाएगा तो पृथ्वी पर मौजूद एक बुद्ध पुरुष उनका स्थान लेगा।। शिव वेद विदित वट वृक्ष के नीचे कैलाश में सहज आसन में बैठे हैं तब पार्वती अवसर देखकर राम के बारे में प्रश्न करती है।। और भगवान शिव राम जन्म के पांच हेतु बताते हुए पहले असुर कूल में रावण की बात करते हैं।।और रावण का अत्याचार भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया कि पृथ्वी गाय का रूप लेकर ब्रह्मा के पास गई और सब ने मिलकर पुकार की प्रार्थना की और आकाशवाणी हुई कि मैं अवतार लेने के लिए आ रहा हूं।।

फिर राम जन्म के पांच हेतु बताएं ईश्वर तत्व किसी भी हेतु के बिना भी अवतरित हो सकता है।।ये कह कर बापू ने अयोध्या का सुंदर वर्णन का गान किया और अयोध्या के राजमहल में दशरथ ने यज्ञ करवाया और यज्ञ के प्रसाद के रूप में मिली खीर से भगवान राम का मां कौशल्या के उदर से अवतरण हुआ और सभी माता ने एक-एक बालक को जन्म दिया।।

और राम जन्म की पंक्तियों का गायन करते हुए यवतमाल की भूमि से पूरे त्रिभुवन को राम जन्म की बधाई देते हुए आज की कथा को विराम दिया गया।।

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