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मारुति सुज़ुकी के गुजरात प्लांट में स्थित रेलवे साइडिंग, कार्बन क्रेडिट जेनरेट करने वाली विश्व की पहली मोडल शिफ्ट ट्रांसपोर्टेशन परियोजना बन गई है

  • यह परियोजना विश्व की सबसे बड़ी स्वैच्छिक कार्बन क्रेडिट रजिस्ट्री वेरा* के सत्यापित कार्बन मानक (VCS) कार्यक्रम के तहत पंजीकृत है।
  • प्लांट मे स्थित रेलवे साइडिंग का लक्ष्य अगले 10 वर्षों (वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2032-33 के मध्य) में लगभग 1.7 लाख टन Co₂e काउत्सर्जन कम करना है।

गुजरात, अहमदाबाद | 25 फरवरी 2026 — मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड (“मारुति सुजुकी”) ने सस्टेनेबल लॉजिस्टिक्स में वैश्विक मानक स्थापित करते हुए यह घोषणा की है कि गुजरात स्थित उसके प्लांट में बनी रेलवे साइडिंग को Verra के Verified Carbon Standard(“VCS”) कार्यक्रम के तहत विश्व की पहली मोडल शिफ्ट ट्रांसपोर्टेशन परियोजना के रूप में पंजीकृत किया गया है।

इस परियोजना के माध्यम से वित्त वर्ष 2023-24 से लेकर वित्त वर्ष 2032-33 के मध्य 10 वर्षों की क्रेडिटिंग अवधि में लगभग 1.7 लाख कार्बन क्रेडिट प्राप्त होने की उम्मीद है। रेलवे के द्वारा वाहनों का परिवहन करना एक कुशल एवं सतत माध्यम है और यह पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है।

उत्सर्जन में कमी का आकलन United Nations Framework Convention on Climate Change(UNFCC) के Clean Development Mechanism(CDM) के तहत निर्धारित AM0090 पद्धति के अनुसार किया गया है। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के स्वतंत्र सत्यापन के बाद, Verra अपने VCS कार्यक्रम के तहत मारुति सुज़ुकी को 1.7 लाख कार्बन क्रेडिट जारी करेगी।

इस अनोखी पहल के बारे में बात करते हुए मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड केCEO और मैनेजिंग डायरेक्टर श्री हिसाशी ताकेउची ने कहा, “यह मारुति सुजुकी के लिए अत्यधिकगर्व का क्षण है। गुजरात में स्थित हमारी रेलवे साइडिंग को ट्रांसपोर्टेशन में मोडल शिफ्ट की विश्व की पहली Verra-पंजीकृत परियोजना के रूप में मान्यता मिली है। वाहनों की आवाजाही सड़क की बजाय रेल के माध्यम से करके, यह परियोजना दर्शाती है कि कैसे व्यापकता, परिचालन दक्षता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी सहजता से एक साथ चल सकती हैं।रेल परिवहन की अंतर्निहित दक्षता का लाभ उठाते हुए, गुजरात स्थित रेलवे साइडिंग ने हमारे लॉजिस्टिक्स संचालन के कार्बन फुटप्रिंट को काफी कम कर दिया है। साथ ही सड़क पर ढुलाई वाहनों की भीड़भाड़ और ईंधन की कुल खपत भी घटाई है। वेरा से मिली इस मान्यता से हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं।” यह उपलब्धि हमारी सतत विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही भारत के शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में उठाए गए ठोस कदमों के अनुरूप उद्योग मानक स्थापित करने की हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।“

यह परियोजना United Nations Sustainable Development Goals (SDG’s) में योगदान देती है, जो विशेष रूप से Good Health and Well-being (SDG 3), Decent Work and Economic Growth (SDG 8) तथा Climate Action (SDG 13) पर केंद्रित हैं।

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