Homeगुजरातयवतमाल-महाराष्ट्र से मोरारिबापु की ९६३वीं रामकथा का समापन हुआ।।

यवतमाल-महाराष्ट्र से मोरारिबापु की ९६३वीं रामकथा का समापन हुआ।।

अगली-९६४वीं रामकथा २० से २८ सितम्बर, बरसाना धाम(मथुरा) से गुंजेगी।।

शारदीय नवरात्र पर श्री राधारानी जी का धाम पावन रामकथा से गुंजेगा।।

प्रसन्नता और आंसू देकर,सेवा लेकर जा रहा हूं।।

साधु तीन ‘एच’ पकड़ता है:हेड,हार्ट और हेन्ड।।

अश्रु के समान और कोई संपदा नहीं,आदमी भीगा होना चाहिए।।

सुनुजननिसोइसुतुबडभागी।

जो पितुमातुबचन अनुरागी।।

तनय मातुपितुतोषनिहारा।

दुर्लभ जननि सकल संसारा।।

-अयोध्याकॉंड दोहा-४१

इन बीज पंक्तियों का गान करते हुए रामकथा के विराम के दिन पर आज दर्डा परिवार की ओर से सब का एक-एक नाम बोलकर आभार और अभिवादन और विदाय के शब्द सजल नेत्र से अपना भाव विजय बाबू ने रखा।।

बापु ने महाराष्ट्र की चेतन वंत भूमि को प्रणाम करते हुए कहा की दर्डा परिवार लोकमत परिवार को साधुवाद दे रहा हूं।।

बाबूजी ने कहा कि मैं धार्मिक नहीं, लेकिन बाबूजी! आप धार्मिक हो ना हो लेकिन आप हार्दिक बहुत है। आपकी आंखे नम बन जाती है।मैं आपको आंसु दे कर जा रहा हूं।।अश्रु के समान और कोई संपदा नहीं।।आदमी भीगा होना चाहिए।। लग रहा है यही विषय यहां के लिए जो अपने आप चुना गया वही ठीक था।।आप पर अपने माता-पिता के आशीर्वाद उतरे।।

और आज एक यह भी प्रसंग बना के दर्डा परिवार के विजय बाबू और राजेंद्र बाबू 1981 तक साथ थे और साथ में धंधा रोजगार चला रहे थे।।

साथ रहो तो भी प्रेम से,बिलग रहो तो भी प्रेम से।।१९८१में बिलग होने के बाद में अपना कारोबार चलाया।।लेकिन आज खुशी की बात है आज से फिर वह दोनों भाई साथ हो रहे हैं।।

एक से दो बहुत होते हैं। दो से एक होना भगवत और पितृ कृपा है।।

बापू ने अपनी प्रसन्नता और आंसू देकर सेवा लेकर जा रहा हूं ऐसा कहा और बताया कि शास्त्र में भगवान की व्याख्या है:भग का अर्थ है- ऐश्वर्य। धन वाला धनवान होता है।ज्ञान वाला ज्ञानवान। बलवान शिलवान वैसे छे प्रकार के ऐश्वर्य जिन में होते हैं वह भगवान है:यश,श्री,धर्म,कीर्ति,ज्ञान और वैराग्य।।  यह शास्त्र की व्याख्या है। इसी व्याख्या को प्रणाम करके लोक व्याख्या करनी है तो भ- का मतलब भजन।भज का मतलब सेवा।।ग- गगन की तरह विशाल विचार धारा।।वा-पूरे जीवन वानप्रस्थ की तरह रहे।।न- जो नकारात्मक कभी ना हो। वह भगवान है।।

प्रश्न बौधिक होता है जिज्ञासा में जीव होता है।। भागवत में अंबरीश बड़ा समृद्ध है फिर भी भक्त है वह कथा बापू ने सुनाई।।

बापू ने अपनी बात कहते हुए कहा कि साधु तीन ‘एच’ पकड़ता है:हेड,हार्ट और हेन्ड।।

बचपन में मां गोद में बिठाकर कर पर उंगलियां घूमातीथी।।अभाव था तो  सर पर लगाने के लिए तेल नहीं था।।मैंने एक बार पूछा तो मां ने कहा कि मस्तक में रामनाम लिख रही हूं।। वैसे मॉंअनपढ थी सिर्फ राम ही लिख पाती थी।।ये थी मॉं की हेडदिक्षा।।

एक दिन पिताजी ने वैसे ही बुलाया जब मैं खेल रहा था और दाएं हाथ में राम लिख दिया और पिताजी की तरफ से दी हुई हेन्ड दीक्षा और राम दिक्षा।।

हाथ में राम हो वो कभीनहराम का स्पर्श नहिकरेगाा और दादा जी की आखरी पलें थी तब दादा ने मुजे बुलाया और अपने हाथ मेरे ह्रदय पर घूमाये और कहा की ह्रदय में रामनाम लिख रहा हुं।।वो थी गुरु बुध्ध पुरुष की हार्ट दिक्षा।।

मातृ देव से हेड दीक्षा,पितृ देव से हेन्ड दीक्षित हो जाए और आचार्य देव से हमारा हार्ट दीक्षित हो जाए।।

व्यास जी का लिखा एक मंत्र बताया:

आयु: श्रीयंयशोधर्मंलोकानाशिषएवचहन्तिश्रेयांसीसर्वाणिकुसोमहदअतिक्रमय।।

जो कह रहा है: जो माता-पिता का अतिक्रमण करता है,बचन अनुराग पूर्वक नहीं निभाता,अपमान करता है उसकी आयु,कल्याण,यश,कीर्ति,धर्म और लोगों का आशीष खत्म हो जाता है।।

परमात्मा कहां निवास करते है?

यज्ञ हमारा पिता है,आहुति हमारी मां है।। तो यज्ञ में और आहुति में निवास करते हैं।।जहां ब्राह्मण है वहां निवास करता है।। तप में,गाय में,श्रद्धा में और दया में निवास करता है।।

पूरी कथा पर अपनी बहुत प्रसन्नता जताते हुए यह मनोरथी परिवार बहूत खुश रहे वो साधुवाद देते हुए कथा का सुफल पूरी दुनिया के माता पितृ को समर्पित करते रामकथा को विराम दिया।।

कथा की आखिर में गृहराज्य मंत्री,पूर्व सांसद और यहां की अभिनेत्री सहित बहुत बड़े लोग भी कथा पंडाल में व्यास वंदना के लिए उपस्थित रहे।।

अगली-९६४वीं रामकथा मुंबइ के वीऩा डेवलपर्स के श्री हरेशनटवरलालसंघवी परिवार के मनोरथ पर शारदीय नवरात्र के विशेष दिनों में वृषभानुनंदिनी श्री राधारानी जी की जन्मभूमि श्री बरसानाधाम में पद्मश्री से अलंकृत परम विरक्त संत श्री रमेश बाबाजी की दिव्य उपस्थिति में २० से २८ सितम्बर मथुरा(उ.प्र.) के बरसाना धाम से बहेगी।।

ये रामकथा का प्रसारण आस्था टीवी चेनल एवं चित्रकूटधामतलगाजरडायु-ट्युबचेनल के माध्यम से पहले दिन शाम ४ से ७ बजे तक और बाकी के दिनों में सुब्ह १० से १:३० बजे तक देखा जा सकता है।।

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