अहमदाबाद 21 मार्च 2025: इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी फैसिलिटेशन सेंटर (आईपीएफसी), एक रणनीतिक पहल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के तहत जिसे भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, अहमदाबाद द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, यह पहल एमएसएमई को उनकी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) क्षमताओं को बढ़ाकर सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
आज की ज्ञान-संचालित अर्थव्यवस्था में, एमएसएमई को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइटस के माध्यम से अपने इनोवेशन की रक्षा करने में सीमित जागरूकता, तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय बाधाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आईपीएफसी की स्थापना आईपी फाइलिंग सहायता, इनोवेशन को बढ़ावा देने और एमएसएमई के बीच स्थायी विकास के लिए वन-स्टॉप समाधान प्रदान करके इन कमीयो को दूर करता है।
आईपीएफसी की गतिविधियाँ:
- एमएसएमई के लिए आईपी-संबंधित गतिविधियों का समर्थन करने के लिए एक समर्पित आईपी सुविधा केंद्र स्थापित करना।
- संपूर्ण आईपी समर्थन और गतिविधियों के लिए आईपी एटोर्नी और आईपी एजेंसियों के साथ सहयोग करना।
- घरेलू पेटेंट, विदेशी पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिजाइन और जीओग्राफीकल ईन्टीकेशन का ड्राफ्ट तैयार करने, फाइलिंग और अभियोजन के लिए सहायता प्रदान करना।
- आईपी फाइलिंग और अभियोजन के लिए एमएसएमई को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
जीओग्राफीकल ईन्टीकेशन का समर्थन करने के अपने मिशन के अनुरूप, ईडीआईआई ने गुजरात चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (जीसीसीआई) बिजनेस वुमन कमेटी के साथ उद्योग सहयोग से, जीओग्राफीकल ईन्टीकेशन (जीआई) महोत्सव, ‘रंग सूता’ जीआई उत्पादों के माध्यम से भारत की विरासत को बढ़ावा देना, 21-23 मार्च, 2025 को सिंधु भवन हॉल में आयोजित किया । यह प्रदर्शनी राष्ट्र भर से 50 से अधिक जीआई-टैग शिल्पों को प्रदर्शित करके भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाती है। कारीगर क्राफ्टस की विविध श्रृंखला का प्रदर्शन करेंगे जिसमें फुलकारी, जोधपुर बंधेज शिल्प, सोजत मेहंदी, पाटण का पटोला, माता नी पछेड़ी, गुजरात सूफ कढ़ाई, कच्छ रोगन शिल्प और कई ओर क्राफ्टस शामिल हैं।
21 मार्च को एक बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) मीट का भी आयोजन किया गया जो थोक बिक्री और नए ग्राहकों और बाजार तक पहुंच का अवसर प्रदान करता है। इस पहल का उद्देश्य जीओग्राफीकल ईन्टीकेशन (जीआई) उत्पादों की पहुंच का विस्तार करना और कारीगरो के विकास का समर्थन करना है। इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे, जिसमें 21 मार्च को कच्छी लोक संगीत का लाइव प्रदर्शन और 22 मार्च को कठपुतली शो शामिल है। यह महोत्सव भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा।