Homeगुजरातपिता सीमित होता है और माता असीम होती है।।

पिता सीमित होता है और माता असीम होती है।।

 माता का प्रभाव होता है और पिता का प्रताप होता है।।

मॉं के पास अश्रु,पसीना,रक्त और दूध का द्रव्य है।।

जो देने में देर लगे वह धन है और हाथ से जल्दी निकल जाए वह द्रव्य लक्ष्मी है।।

जिनके पास से पैसे किसी की मदद के लिए निकल आए तो समझना कि आपके पास लक्ष्मी है।।

आंसु आंख से नीचे आता है उसे सिडी बनाकर ईश्वर ऊपर आता है।।

पिता का गौरव है वह पालक है।।

पिता बच्चों को परंपरा सीखना है।।

विदर्भ महाराष्ट्र के यवतमाल की भूमि से चल रही रामकथा के सातवें दिन एक विशेष प्रकल्प हुआ: मानव सेवा समिति ट्रस्ट के द्वारा इकट्ठे हुई 70 लाख रुपए की राशि का चेक यहां कैंसर पीड़ितों के लिए काम करती विशेष संस्था जिनके सचिव और सीइओ शैलेश जोगलेकरहै।।और यहां के चंद्रपुर के सांसद एवं एमएलए के साथ मिलकर बापू के सामने वह चेक अर्पण किया गया।।

और बहुत बड़ी सेवा की बापू ने भी प्रशंसा की।

बापू ने कहा कि पिता और माता की कुछ विशेषताएं होती है।। राम के पिता दशरथ,जानकी के पिता जनक बहुत बड़ा होने के बावजूद पिता सीमित होता है और माता असीम होती है।। माता का प्रभाव होता है और पिता का प्रताप होता है।। प्रताप में ताप है उग्रता है।।प्रभाव में भाव है।।

मां के पास चार वस्तु होती है।।एक है- आंसू।।मां अपने आंसू से परिवार जनों का पोषण करती है।। भजन का प्रभाव बढ़ता है और प्रताप भी होता है लेकिन कोई भजनानंदी प्रताप को दबाकर प्रभाव बाहर निकल जाने के बाद भी भजनानंदी अपने स्वभाव में रहता है।।

जो देने में देर लगे वह धन है और हाथ से जल्दी निकल जाए वह द्रव्य लक्ष्मी है।।जिनके पास से पैसे किसी की मदद के लिए निकल आए तो समझना कि आपके पास लक्ष्मी है।।

जिनके पास मूल पुरुष की दी हुई संपदा है वही संप्रदाय ऐसा लोक अर्थ निकाल सकते हैं।।

मां का अपमान मंदिर में रही मूर्ति का अपमान है।मां के पास पसीना है।।परिवार के लिए पसीना बहाती है और मां के पास रक्त है वह रक्त बहाकर विरक्त बनती है।। परिवार की सेवा करती है।। और मां के शरीर का एक द्रव्य दूध बनाकर परिवार को पोषण देता है।।

आंसु आंख से नेत्रों से नीचे आता है उसे सिडी बनाकर ईश्वर ऊपर आता है।।

पिता का गौरव है वह पालक है।। पिता बच्चों को परंपरा सीखना है।।पिता आचरण करके बोले तो परिवार में जल्दी उतरता है।।

साधु के लक्षण वह है एकांत प्रियता प्रशांत प्रियता नितांत प्रियता और जलपांतता यानी कि व्यर्थ बकवास ना करें वह साधु के लक्षण है।।

छोटा करके देखिए,जीवन का विस्तार।

आंखों भर आकाश है बाहों भर संसार।।

-निदा फ़ाज़ली

आज बापू ने मावली का कीर्तन करवा के पांडुरंगविट्ठलामावली का कीर्तन करवा के व्यास पीठ से नीचे उतर कर सबके साथ बहुत लंबा नृत्य किया और पूरा पंडाल नृत्य में लीन हुआ।।

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