ग्रंथ के पास भी समय ना मिले तो अपने बुद्धपुरुष की पादुका के पास बैठो।।
भगवद कथा परम एकांत है।।
जब तक हृदय में श्रद्धा विश्वास का मिलन नहीं होता तब तक राम जन्म नहीं होता।।
पृथ्वी के आखिरी छोर से त्रिभुवन को राम जन्म की बधाई मिली।।
आर्जेन्टिनां में खूब सूरत हल्की बर्फबारी के बीच उसूआया में चल रही रामकथा के छठ्ठे दिन बापू ने बताया कि साधु के पास बैठना ना मिले तो ग्रंथ के पास बैठो।।ग्रंथ के पास भी समय ना मिले तो अपने बुद्धपुरुष की पादुका के पास बैठो।।विष्णु प्रिया- चैतन्य महाप्रभु की धर्म पत्नी जब चैतन्य ने संन्यास ले लिया तब पादुका के पास बैठी है।। कोई आदमी घर छोड़ना है या संन्यास लेता है तो कुछ कारण होगा। कारण के बिना कार्य नहीं होता,यद्यपि परमात्मा को ये सिद्धांत लागू नहीं होता।। लोग क्यों संन्यास लेते हैं?
परिवार में तिरस्कार होने के कारण।। महाभारत में पांडव कौरव कूल का नाश होने के बाद युधिष्ठिर गांधारी और धृतराष्ट्र को राजभवन में ले गये।।लेकिन भीम ने एक बार ताने लगाएं और दोनों ने घर छोड़ने का निर्णय किया, वल्कल धारण कर लिए।। तब पांडवों की माता कुंती ने भी वल्कल धारण कर लिए।।
आठ प्रकार के अहंकार आदमी में होते हैं:
बाल का अहंकार। धन का,रूप का,कूल का,विद्या का अहंकार,पद और प्रतिष्ठा का, त्याग का और धर्म का भी अहंकार होता है।।
विरोध के लिए नहीं लेकिन बोध के लिए, गुरु दत्त बोध के कारण में कहूंगा सनातन को पांच बात करनी होगी,अवसर आने पर कहूंगा।।
ओम सहनाववतु….मंत्र केवल गुरु-शिष्य के बीच ही नहि लेकिन पति-पत्नि के बीच,भाइ-भाइ,मित्र-मित्र के बीच,राजा और प्रजा के बीच,वक्ता और श्रोता के बीच भी होना चाहिये।।
दोनों का साथ ही रक्षण हो,साथ ही पालन पोषण हो।।साथ ही पराक्रम करें।
दोनों की विद्या तेजस्वी हो और दोनों एक दूसरे का द्वेष ना करें।।धैर्य रखना ही शौर्य है।। कायर धीरज नहीं रखता।।
फिर कथा प्रवाह में पार्वती ने तपस्या की और शिव और पार्वती का विवाह हुआ। शिव पार्वती के विवाह के बाद राम जन्म की कथा क्यों है?
क्योंकि शिव और पार्वती का विवाह श्रद्धा और विश्वास का सम्मिलन है।। जब तक हृदय में श्रद्धा विश्वास का मिलन नहीं होता तब तक राम जन्म नहीं होता।। दूसरा शब्द और सुरता का मिलन।। तीसरा आध्यात्मिक अर्थ है शिव और शक्ति का मिलन।।जन्मा और अजन्मा का मिलन।।अगुन और सगुन का सम्मिलन राम जन्म की ओर ले जाएगा।। सगुण और निर्गुण का मिलन।। विनाशी और अविनाशी का मिलन। मंगल और अमंगल का मिलन।महादेव और महादेवी का मिलन। परमेश्वर और परमेश्वरी का विवाह राम जन्म की ओर ले जाएगा।।
विवाह के बाद वेद विदित कल्पवृक्ष की छांव में भगवान शिव बैठे हैं और अवसर देखकर पार्वती ने राम के बारे में प्रश्न पूछे।।भगवद कथा परम एकांत है।। राम जन्म के पांच कारण बताए गए और आसुरी वृत्ति इतनी प्रबल हुई पृथ्वी अकूला के ऋषि मुनियों के पास गई। सब मिलकर देवताओं के पास और सब मिलकर ब्रह्मा के पास गए।। सब ने मिलकर स्तुति की।। आकाशवाणी हुई और सभी देवता अपने-अपने स्थान गए और राम अवध के दशरथ के महल में मां कौशल्या की गोद में अवतरित हुए।।
राम का प्रागाट्य गाया गया।। पृथ्वी के आखिरी छोर से त्रिभुवन को राम जन्म की बधाई के साथ आज की कथा को विराम दिया गया।।