गुजरात, अहमदाबाद 28 फरवरी 2025: उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर में, जहां सड़कों के किनारे बंद पड़े स्कूलों की लंबी कतारें थीं, कुछ जुनूनी शिक्षकों ने एक अलग भविष्य की कल्पना की। उनका सपना था कि हर बच्चा, चाहे वह कहीं भी हो, अच्छी शिक्षा हासिल कर सके। इसी सोच से कॉगरैड की शुरुआत हुई। यह सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने की एक कोशिश है, जिसे आईआईटी और एनआईटी के पूर्व छात्रों हिमांशु चौरसिया और सौरभ यादव ने मिलकर शुरू किया।
आज कॉगरैड ग्रामीण भारत में पढ़ाई के तरीके को पूरी तरह बदल रहा है। वे बंद पड़े स्कूलों को किराए पर लेकर उन्हें आधुनिक लर्निंग सेंटर्स में बदल रहे हैं, जहां हर बच्चे को समान अवसर मिल रहे हैं। उनकी अनोखी सोच ने शार्क्स का ध्यान खींचा और उन्हें 1 करोड़ रुपये की डील मिली, जिससे उनका मिशन और आगे बढ़ेगा।
हालांकि, अनुपम मित्तल और कुणाल शाह को लगा कि उन्हें एक समय में सिर्फ एक चीज़ पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन रितेश अग्रवाल, विनीता सिंह और नमिता थापर ने कॉगरैड के विज़न को समझा और डील में शामिल हो गए। यह डील 50 लाख रुपये के बदले 6% इक्विटी और 9% ब्याज दर पर 50 लाख रुपये के लोन के रूप में फाइनल हुई।
कॉगरैड के को-फाउंडर हिमांशु चौरसिया ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “हमारा सपना छोटे शहरों के बच्चों को शिक्षित करना और उन्हें शहरी बच्चों के बराबर मौके देना है। हम मानते हैं कि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा का अधिकार है, और हम इसे साकार करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। शार्क्स – रितेश अग्रवाल, विनीता सिंह और नमिता थापर के साथ साझेदारी करके हमें बेहद खुशी हो रही है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से हमें अपनी शिक्षा प्रणाली को और बेहतर और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।”
कॉगरैड अब सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा। वे टीचर ट्रेनिंग और ‘मेधा एआई’ नामक एक टीचर ट्रेनिंग ऐप पर भी ध्यान दे रहे हैं, जिससे भारत के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा में बड़ा बदलाव आएगा।
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