Homeगुजरातकथा पंडाल में अचल चरित्र शुरू होता है तब रघुवंश के इस...

कथा पंडाल में अचल चरित्र शुरू होता है तब रघुवंश के इस चरित्र से सब शांत हो जाता है।।

मानस के सात कूल के एक-एक ध्रुव वाक्य,सारांश है वह सभी सारांश मेघाणी के साहित्य में भी दिखते हैं।।

यह जगत में राम से भी कोई बड़ा शब्द है तो ‘साधु’ है।।

कथा पंडाल से त्रिभुवन को दी गइ राम जन्म की बधाइयां।।

गुजरात के बगसरा में बह रही रामकथा का आंठवादिन।बगसरा की भूमि के सत्व तत्व और बहुत प्रकार की अस्मिता से भरी भूमि को प्रणाम करते हुए बापू ने कहा कि वैसे राष्ट्रीय शायर है लेकिन तलगाजरडी दृष्टि में सायरमेघानी का कथानक गाने का एक अलग आनंद और प्रसन्नता है।। यहां संतो महंतों और बड़े पैमाने पर लोगों के साथ विद्या विधविध विधाओं के विद्वान बुद्धि जनों भी बहुत संख्या में हाजिर है।।

आरंभ में एक शिक्षक ने पूछे प्रश्न से बापू ने कहा कि जब कथा शुरू होती है तब पूरे पंडाल में शांति छा जाती है।। हमारे वर्ग करो में हमें मालूम है ऐसा नहीं होता? बापू ने कहा कि आपने भी फिल्में देखी होगी मैंने भी देखी है।।थिएटर में जब फिल्म शुरू होती है पूरा थिएटर चुप हो जाता है। इसी तरह कथा पंडाल में अचल चरित्र शुरू होता है तब रघुवंश के इस चरित्र से सब शांत हो जाता है।। रामकथा के नव कूल है लेकिन कोई एक दूसरे में समा जाते हैं तो सात कूल की बात हम करेंगे।।

वैसे नवखंड धरती है,पृथ्वी है, नव नाग है।भक्ति के नव प्रकार।राम का जन्म भी नवमी पर हुआ।नव नवग्रह जिनके खटिया पर टंगे थे ऐसे रावण के लिए मंदोदरी भी कुछ कहती है।रामकथा भी नव दिन की होती है और अब युद्ध के वक्त में नवमें अवतार बुद्ध की हमें ज्यादा जरूरत है।।

वहां बापू ने बताया कि मानस मेघाणी विषय ही क्यों पसंद किया क्योंकि मानस के सात कूल के एक-एक ध्रुव वाक्य,सारांश है वह सभी सारांश मेघाणी के साहित्य में भी दिखते हैं।।शिष्ट साहित्य मानस और मेघानी का तुलनात्मक अभ्यास ऐसा कुछ कह सकता है लेकिन मेरे लिए तो यह प्रासादिक प्रयास है।।

सबसे पहले रघुकुल है और दूसरा है जनक कूल बुद्ध कौशिक विश्वामित्र ने दोनों कूल के बीच में सेतु बनाया है।मेघाणी ने भी अलगता की दीवारों को तोड़कर सेतुबंध काम किया है।। तीसरा कुलक्ष कूल जो रावण का है।चौथा कपि कूल जो बहुत बड़ा है पांचवा कवि कुल। छठ्ठा साधुओं का कुल। सातवां मनु कूल हमारे आदि पिता मनु है।। मनु के दो पुत्र उत्तानपाद और प्रिय व्रत।। उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव हुए और बेटी देवहूतिकदर्म ऋषि के साथ उनका विवाह हुआ और 24 अवतार में सांख्या के ज्ञाता कपिल भगवान का अवतार जहां हुआ है।।

लेकिन कितना बड़ा कपिकुल!18पदम इनके जूथप(सेनापति)है!

विदेशी लोग अर्थवाद अतिशयोक्ति भी कहते हैं। बापू ने साधु शब्द के बारे में बताया कि विशेषण मुक्त,शणगार मुक्त लेकिन संस्कार संपन्न शब्द यह जगत में राम से भी कोई बड़ा शब्द है तो साधु है।। साधु की व्याख्या करते हुए बापू ने कहा कि जिनके जीवन सादु, जिनका जीवन साबुन जैसा उज्जवल है, जिनका जीवन सामने है,जिनका जीवन सच्चा है अच्छा है उसे हम साधु कहते हैं।।

और हर एक कूल की कुछ ना कुछ अलगता है कहीं सखावत दिखती है। कहीं व्यवहार वट।कहींखपावतहै।कहींखेलावत। यहां नपावट भी दिखते हैं। रखावट भी है और मेघाणी साहित्य में सभी प्रकार के वट हमें दिखाते हैं।।

बापू ने आज मेघाणी के दो रत्न बताते हुए कहा कि गोंडल के पास कुंकावाव गांव के पादर में 25 से ज्यादा घोड़े सवार आए और उस वक्त गोंडल नरेश थक गए हैं और आगे देरडी गांव जाना है लेकिन चक्कर आने के कारण जा नहीं सकते।। यह बातचीत के दौरान वहां के खेडूत्त पटेल ने सुन लिया और सभी को कहा कि मेरे घर के मेहमान बनो! और सबको अपने घर जाकर अच्छी रसोई खिलाई और गोंडल नरेश खुश होकर वहां के तलाटी के पास कागज लेकर लिखवाया कि यहां की पांच कोष जितनी जमीन में यह खेडुत की पीढी को लिख कर बक्षीस देता हूं और कोई इसके बीच में आए तो गौ हत्या,ब्रह्म हत्या,बाल हत्या और स्त्री हत्या का पाप लगेगा।।लेकिन उस वक्त तलाटी मूंछ में हंस रहे हैं।सब निकल जाने के बाद कटु वचन कहते हुए तलाटी पटेल को कहते हैं कि यह सब कागज फाड़ के दूध में डालकर उबाल कर पी जाओ क्योंकि जो जमीन लिख दी है वह गोंडल की है ही नहीं! वो जेतपुर क्षेत्र की जमीन है।।

और बात जेतपुर दरबार के पास पहुंचती है। और जेतपुर दरबार ताम्रपत्र पर पूरी जमीन लिख देते हैं और गोंडल और जेतपुर के बीच छोटे से गांव के लिए जो अनबन थी वह पतावट में अच्छी हो जाती है।।

झवेरचंदमेघाणी का यह प्रसंग बापू ने रसाल तरीके से किया और साथ ही साथ बापू ने कहा कि मुझे जो सबसे अच्छा लगता है वह गुजराती काव्य ‘छेल्लोकटोरो’ यानी की आखिरी गिलास पानी का जब बापू गोलमेजी परिषद के लिए ब्रिटेन जाते हैं उस वक्त पूरा काव्य लिखा है।। वह काव्य पूरा बापू ने पढ़कर बताया कि झवेरचंदमेघानी ने उस वक्त गांधी बापू के लिए कितना अच्छा शब्द लिखकर यह पूरी कविता उतारी है।।

सांप्रत समय की समस्या पर व्यंग्य करते हुए बापू ने बताया की बड़े लोग तूफान करते हैं और पुराने दिन हमारे आ गए! क्योंकि फिर लोगों ने चूल्हे जलाए हैं फिर लकडियां जलाई है, और फिर घर में गांव की तावड़ी पर रोटी बनाती बहन बिटिया दिख रही है। पुरुष वर्ग गैस की लाइन में खड़ा है और बहने चूल्हे पर रोटी सेक रही है।। यह पुराना वक्त फिर आ गया है।।

शिव चरित्र के गान के बाद राम जन्म की कथा कहते हुए भगवान शिव पार्वती को राम जन्म के पांच कारण की बात संक्षिप्त में बताते हैं।।

बाद में सभी देवताओं ने स्तुति गान किया और आकाशवाणी हुई कि मैं धरती पर आ रहा हूं।। और फिर प्रार्थना के बाद पुरुषार्थ के बाद प्रतिष्ठा के बाद भगवान राम अयोध्या धाम में दशरथ के महल में मां कौशल्या की कोख में अवतरण करते हैं।।

उसी वक्त माता भगवान को बालक बनाते हुए और भगवान को मनुष्य कैसे बनाएं वह सिखाते हुए बालक रूप देती हैं।

और अयोध्या के महल से एक बालक के रोने की आवाज आती है और बगसरा की व्यास पीठ से पूरे त्रिभुवन को राम जन्म की बधाई देते हुए आज की कथा को विराम दिया गया।।

कल इस कथा का आखिरी विराम का दिन है।।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read