Homeगुजरातकेन्या कथा का भावपूर्ण समापन हुआ।

केन्या कथा का भावपूर्ण समापन हुआ।

१५ अगस्त से हार्वर्ड विश्व विद्यालय में ‘तुलसी’ नाद गुंजेगा।।

तमाम सिद्धांतों से मुक्ति-सिद्धांत सार है।।

कथाओं का महारथी हनुमान है।।

श्रुतिसार,बोधसार,प्रेमसार,धर्मसार,सिध्धांत सार और मानस सार ये सार षटक है।।

पुरे त्रिभुवन को गुर पूर्णिमा की एडवान्स में बधाइयां दी गइ।।

धर्म का पर्याय स्वतंत्रता होना चाहिए,जिसे आप निजधर्म का सकते हैं।।

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बीज पंक्तियां:

नाथ न रथ नहि तन पद त्राना।

केहि बिधि जितब बीर बलवाना।।

सौरज धीरज तेहि रथ चाका।

सत्य सील द्रढ ध्वजा पताका।।

सखा धर्ममय अस रथ जाके।

जीतन कहं न कतहुं रिपु ताके।।

-लंकाकॉंड

कथा के आरंभ में मनोरथी परिवार की ओर से हार्दिक सतीष भाई मोदी ने अपनी भावमयी भाषा में बापू प्रत्ये आभार का भाव व्यक्त किया और गुजरात और भारत से आए हुए साधु और महानुभावों की ओर से भद्रायु वच्छराजानी ने अपने भाव रखते हुए बताया कि १११ साल पहले अफ्रीका में एक बापू आए थे और आज फिर एक बापू हमारी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए आए।।सभी की ओर से,बापू के संग आना और साथ रहना सभी का परम सौभाग्य बताया।।

बापू ने आरंभ में बताया की कथा से निरंतर जुड़े रहने के लिए कथा करना चाहिए।मैं तो सबसे एक डिस्टेंस रखे हुए हूं।।लेकिन लोकभारती सणोसरा जहां कथा रचनात्मक क्रियात्मक कैसे किया जाए वो संस्था ने रामवाडी नाम की संस्था निर्मित की है जो मानस के सूत्र को आत्मसात करते हुए दीप दीक्षा दूर तक पहुंचाने उनकी व्यवस्था करती है।। वहां के अरुण दादा का संपर्क करके आप संतत कथा से जुड़े रह सकते हैं।

जब कथा शुरू करते हैं तो उपक्रम,सूफी लोग उसे आगाझ-आरंभ कहते हैं और जिसका आरंभ होता है उसका अंत भी होता है,जिसे अंजाम कहते हैं। हमारे भावमयी भाषा में प्रारंभ और पूर्णाहुति कहते हैं।।लेकिन संस्कृत वांगमय में आखिर दिन को उपसंहार कहा जाता है।। उपक्रम से उपसंहार की यात्रा में आज उपसार कहना है।।

बापू ने कहा धर्म का पर्याय स्वतंत्रता होना चाहिए जिसे आप निजधर्म का सकते हैं।।

तलगाजरडी सार षटक कहने से पहले कथाक्रम में भीषण युद्ध में रावण का निर्वाण हुआ और रावण को गति देकर मां सीता का सब दर्शन कर सके इसलिए सीता जी को पैदल लाये गए।।सबको पुष्पक में बीठाकर अयोध्या में पुष्पक उतरता है। हजारों लोग प्रतीक्षा में है तब राम ने कौतुक किया और अमित अनंत रूप प्रकट करके सबको व्यक्तिगत रूप से मिले।।फिर वशिष्ठ जी ने राम के भाल में राजतिलक किया।।राम राज्य और प्रेम राज्य की स्थापना के बाद भूसुंडी चरित्र और कथा का विराम हुआ तब बापू ने कहा कि उपक्रम में कहा था धर्मरथ लौकिक नहीं,अलौकिक,मौलिक है।। धर्म ही जीवन है।अंतर यात्रा भी कहा। देहरथ के हम सारथी है।व्यासपीठ रथ और वक्ता रथी है,सारथी शास्त्र है।।लेकिन सबका महारथी हनुमान जी है। कथाओं का महारथी हनुमान है।।रामकथा व्यास पीठ रूपी रथ का लक्ष्य है:ब्रह्म,परमात्मा,सरल रूप में राम।।और परम विश्राम है:कृतकृत्यता का भाव है यह उपसंहार है।।

उपसार में सार षटक में छह सार है।एक है:श्रुति सार-जो हरिनाम है।दूसरा है:बोध सार-भगवान बुद्ध से वह हमें मिलता है।।वह है किसी से विरोध नहीं करना।तीसरा सार प्रेमसार है वह कराता विरक्ति की प्राप्ति।।चौथा भरत का धर्मसार है।पांचवा शंकराचार्य का सिद्धांत सार है।।लेकिन मुझे कहना है तो तमाम सिद्धांतों से मुक्ति सिद्धांत सार है।।छठा मानस सार और वह है:सत्य,प्रेम और करुणा।।

रामकथा का सु-फल गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दुनिया भर के बुद्धपुरुष और गुरुओं के चरणों में रखते हुए मांग की इनका शुभ फल केन्या की समग्र जनता को मिले।।

गुरु पूर्णिमा की एडवांस में बधाई देते हुए आज की कथा का विराम हुआ।।

अगली रामकथा जो क्रम में ९८२ वीं कथा है,दुनिया के इतिहास में पहली बार अमेरीका की विश्व विख्यात हार्वर्ड विश्व विद्यालय में भारत के  बहार तुलसी जी की जन्म जयंति का उत्सव और नव दिवसीय रामकथा भी साथ साथ चलेगी।।

ये कथा का जीवंत प्रसारण १५ अगस्त से २३ अगस्त के दरमियान टाइम डीफरन्स से चित्रकूटधाम तलगाजरडा यु-ट्युब चैनल के माध्यम से होगा।।

== समाप्त ==

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