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मृत्युलोक यज्ञ की भूमि है, पृथ्वी मृत्यु का यज्ञ कुंड है, मृत्यु यज्ञ है।।

इच्छायें रहते हुए शरीर चला जाए वह मृत्यु है,शरीर रहते हुए इच्छाएं चली जाए वह मुक्ति है:स्वामीशरणानंद जी।।

जिज्ञासा करो तो जागृति मिलती है।।

अध्यात्म में सवाल का इतना मूल्य नहीं जितना जिज्ञासा का है।।

शंकर की कथा नाम प्रधान है।।

भूसुंडी जी की कथा रूप प्रधान है।

परम सत्य कालातित है।।

सत्य का विचार,उच्चार और स्विकार यह महादेव का त्रिपुंड है।।

शनिवार रामकथा का आठवा दिन,सभी पूजनीयों को प्रणाम करते हुए बापु ने बताया कि कल यहां से कथा के बाद जा रहा था तब बहुत चिठ्ठियां मिली। समय मिला तब अवलोकन किया।कइं घरेलू प्रश्न थे कई बीमारियों की समस्या पूछी गई।घरेलू समस्या विवेक से घर में पूरी करो।सामाजिक समस्या समाज के व्यक्तियों को पूछ कर बाहर निकालो। धार्मिक समस्या कोई धार्मिक व्यक्ति से पूछो। शारीरिक समस्या किसी अनुभवी से पूछो।आप जितना भी प्रश्न पूछते हैं,सवाल के केवल जवाब दिए जाते हैं।लेकिन जिज्ञासा करो तो जागृति मिलती है।।सवाल को तर्क से काट सकते हैं तो फिर दूसरा तर्क आ जाता है! इसलिए अध्यात्म में सवाल का इतना मूल्य नहीं जितना जिज्ञासा का है।ब्रह्म जिज्ञासा होती है।ब्रह्म के बारे में कोई प्रश्न का उत्तर नहीं मिल सकता।लेकिन यह सब ठीक है,आखिरी है ऐसा मत समझना।जहां सब फेल हुए वहां तलगाजरडा कैसे सफल होगा! कहीं शक न शारद शेष नारद… भगवान भी अपने मुख से साधु के बारे में इतना नहीं बता पाए।घटना तब घटेगी जब जिज्ञासा करो।

पूछा गया है तुलसी जी शिव जी की बात करते हैं। राम,गणेश,सब की स्तुति करते हैं। क्या व्यास जी ने शिव की स्तुति की है?बापू ने कहा व्यास जी ने पूरा शिव पुराण लिख दिया।व्यास व्यास है।। देवी भागवत,पद्म पुराण रचना की।।व्यास को संकीर्ण मत समझो।व्यास ने रामायण का पूरा प्रसंग भी लिखा है।व्यास का अर्थ विशाल है।व्यासजीस देव की प्रतिष्ठा करेंगे उसे पूर्णतया करेंगे।जहां सीमा है वहां संघर्ष है।। व्यास सबका समावेश करते हैं। व्यास ना होते तो समास ना होता। पूरे विश्व को जोड़ने का काम वेद व्यास ने किया है।।दोषों से रहित अपने का अनुग्रह करने वाले वैराग्य और शांति का मंदिर… ऐसा स्त्रोत लिखा है।विश्वनाथ का अष्टक व्यास ने गाया है।।

यहां लॉरेंस के जीवन की कहानी बापू ने कही। लॉरेंस एक बाग में टहल रहा था।एक निर्दोष बालक साथ-साथ चल रहा था और दौड़कर बालक ने लॉरेंस की उंगली पकड़ ली। वह अनजान बालक किस भरोसे से मेरी उंगली पकड़ता है!फिर बच्चे ने पूछा:अंकल! यह गार्डन में इतने वृक्ष,सब हरे क्यों हैं लॉरेंस ने सोचा के ऐसा तो कभी मैंने सोचा ही नहीं। बच्चे ने कहा मेरे मां-बाप और टीचर ने कोई जवाब नहीं नहीं दिया।।निर्दोषचित् के आगे माहितीसभर चित हार जाता है।।वृक्ष हरे इसलिए है कि उसमें क्लोरोफिलहै।।बालक ने फिर पूछा हम में क्लोरोफिल क्यों नहीं?जवाब दिया बेटा!वृक्ष हरे हैं इसलिए हरे हैं।।सत्य अत्यंत सूक्ष्म और पकड़ में नहीं आने वाला है।सत्य हमेशा भूत वादी,असत्य भविष्यवादीहै।लेकिन परम सत्य कालातित है। विचारों के मैदान में सत्य नहीं खेलता।सीमाओं में आबध्धनहीं।वह गगन गढ़ में खेलता है।सत्य सोचना,हो सके तो सत्य बोलना और सत्य का स्विकारकरना।सत्य का विचार,उच्चार और स्विकार यह महादेव का त्रिपुंड है।।

यज्ञ करने के लिए भूमि चाहिए।भूमि शोधन करना चाहिए।मृत्युलोक वह यज्ञ की भूमि है।पृथ्वी मृत्यु का यज्ञ कुंड है।मृत्यु यज्ञ है।।नचिकेता को कठोपनिषद में यज्ञ विद्या सिखाई।।

स्वामी शरणानंद जी ने कहा है इच्छायें रहते हुए शरीर चला जाए वह मृत्यु है,शरीर रहते हुए इच्छाएं चली जाए वह मुक्ति है।।

नाम,रूप,लीला और धाम इनमें शंकर की कथा नाम प्रधान है।।भूसुंडी की कथा रूप प्रधान है।याज्ञवल्क्य की कथा लीला प्रधान है और तुलसी जी ने गाई वह कथा धाम प्रधान है।।

कल मुझे इतना ही कह कर जाना है आप निर्भय रहो!!जहां यज्ञ होता है वहां अग्नि होनी चाहिए।।ज्ञान अग्नि है।अच्छे कर्म से सुख,बुरे कर्म से दुख मिलता है यह यज्ञ का जव तल है।।जव पीला होता है वह सुख है और तिल काले रंग का होता है वह बुरा कर्म है,वह दुख है।।गुरु स्वयं यज्ञ है,अग्नि है। आहुति भी गुरु है।।स्वयं मंत्र है और स्वयं आचार्य है यज्ञ में स्नेह वह घी है और प्राण आहुति है।।मृत्युंजय मंत्र है।।आचार्य अपना सद्गुरु बुद्धपुरुष है और ऐश्वर्य यह विभूति-भस्म है।।

अपना व्यक्तित्व दे देना वह वसुधारा है।।

बापू ने कहा तुम्हारे संतानों को साधु के संतों के प्रति नफरत हो जाए ऐसी जबरदस्ती मत करना,सहज और स्वाभाविक रहने देना।।

फिर काग भूसुंडी के न्याय से बहुत संक्षिप्त में अयोध्या कांड,अरण्य कांड,किष्किंधा कांड, सुंदरकांड और लंकाकांड की कथा के प्रसंग को गाते हुए आज की कथा को विराम दिया।।

कल इस राम कथा का विराम का दिन है।।

== समाप्त ==

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