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शिष्य गुरु के वचन पर पूर्णत: भरोसा करता है तब गुरु को सब से ज्यादा संतोष मिलता है।।

हर जगह भाषांतर काम नहीं आएगा,भावांतर काम आएगा।।
अध्यात्म में शब्दकोश नहीं,हृदय कोष का अर्थ देखो।
सभी अभाव में राहत देती है:भगवद कथा।।
परम का वियोग का भी अभाव खटकता है।।
अभाव जब बहुत सताए तब कोई बुद्धपुरुष समाधि को फेंक कर अभावग्रस्त के समाधान के लिए प्रकट हो जाते हैं।।
सिताराम ही लक्षमी नारायण है।।

मनोहर आर्जेन्टिना के उशूवाया में चल रही रामकथा के चौथे दिन आरंभ में पूछा गया कि गुरु को सबसे ज्यादा संतोष कब मिलता है?बापू ने कहा जब शिष्य गुरु के वचन पर पूर्णत: भरोसा करता है तब मिलता है।।बहुत से पात्र है,लेकिन गौरांग चैतन्य महाप्रभु और सनातन गोस्वामी के बारे में कहते हैं कि पैरों के तले कुचल दे,या कंधे पर बैठा दे,मेरा भरोसा अडग है।।वही बात भरत जी करते हैं पादुका के पास रखे या सर पर मेरा भरोसा अखंड है।।

हर जगह भाषांतर काम नहीं आएगा,भावांतर काम आएगा।। शब्दकोश नहीं हृदय कोष का अर्थ देखो। तीर्थ दो प्रकार के हैं:बहिर तीर्थ और अंतर तीर्थ। हृदय में भाव,कर्तव्य परायणता और ब्रह्म विचार घूम रहे हैं तो यह अंतर तीर्थ है।।
शिवाजी समाधि में गए और सती को वियोग का अभाव सताने लगा।।

अभाव के बारे में बापू ने कहा कि बहुत से अभाव है धन का अभाव,परिवार की किसी विशिष्ट व्यक्ति के जाने का अभाव,प्रतिष्ठा का अभाव, प्रिय व्यक्ति के वियोग का अभाव।।पूर्ण प्रेम में वियोग ही संयोग और संयोग में भी वियोग होता है।। सद्गुरु दूर रहे वह भी अभाव है।।

सती को ८७ हजार साल का अभाव रहा और शरीर सुख गया।।यहां सब जगह पर भगवत कथा के बारे में लिखा है।सभी अभाव में राहत देती है:भगवद कथा।।परम का वियोग का भी अभाव खटकता है। कृष्ण गोकुल छोड़कर मथुरा गए। अभाव ना जीने देता है ना मरने देता है। कृष्ण ने कहा कि मैं आऊंगा इसका मतलब आप कोई वहां मत आना! और व्रजांगनायें,व्रज गोप ही नहीं पशु पक्षी भी आज्ञा पालन पर लांघ कर नहीं। गए वायु भी कालिंदी के इस तट पर रुक जाता था, क्योंकि हमारे बाप ने कहा है।।

महाभारत में पांडवों अभावग्रस्त में आते तब किसी न किसी महापुरुष जाकर कथा सुनाते थे। ऐसी ही एक प्रसिद्ध कथा नल और दमयंती की है जो आख्यान कारों ने बहुत गाई है।।

यह अभाव जब बहुत सताए तब कोई बुद्धपुरुष समाधि को फेंक कर अभावग्रस्त के समाधान के लिए प्रकट हो जाते हैं।। मैं तो समाधान को ही समाधि मानता हूं।।

बीते संवत सहस सतासी।:
तजी समाधि संभु अबिनाशी।।
राम नाम सिव सुमिरन लागे।
जानेउ सती जगत पति जागे।।

रामनाम और रामकथा हमें अभाव से पुनः स्थिति में ला देगा।। इससे बड़ा प्रमाण क्या दूं! इसलिए तुलसी कहते हैं राम भज! राम भज!

एकमात्र उपाय है रामकथा या रामनाम।।
यहां अद्भुत रहस्य खोले हैं चैतन्य महाप्रभु ने। खूब सुनो, खूब गाओ।। हर जगह कथा ही तो है। भगवद कथाओं ने विश्व का बहुत मंगल किया है।। यदि एक कथा न होती तो हमारे लिए कल्पना भी नहीं कर सकते!

बापू ने आज भगवान की व्याख्या देते हुए बताया: भ-जिसके जीवन में पांचो प्रकार का भजन है: पलक-पलक,सांस-सांस पर,धड़कन-धड़कन, कदम-कदम और माला के मनके-मनके के पर हरि नाम।।

ग-जीता,खाता पीता है जमीन पर लेकिन विहार है गगन में।। व्योमविहारी हो।।असंगता दूसरी शर्त है। वा-जीवन में किसी प्रकार की हवा छू न पाए। काम रूपी वात रोग कोई कामना नहीं।।

न- जीवन में नकारात्मक प्रतीति ही नहीं।। सुख मिला,दुख मिला। जय-जय कार मिला गालियां मिली,आवकार या तिरस्कार सबका स्विकार।।

ये परिस्थिति भगवान की तरफ जाने की शर्त है।। रामानुजाचार्य राम उपासक थे।लेकिन इष्ट देव लक्ष्मी नारायण थे।क्योंकि साउथ में लक्ष्मी नारायण है।।और बाद में आए रामानंदाचार्य सीताराम उसके इष्ट देव थे।। दोनों एकमत है इसलिए लक्ष्मी नारायण और कोई नहीं सीताराम ही है। वह खास ध्यान में रखना।।

फिर सती का प्राण त्याग और पार्वती के रूप में हिमाचल के वहां जन्म और नारद मिले और सती को कैसा वर मिलेगा हो बताकर तप के लिए बताया गया।।

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