सदगुरु ग्रंथ है।।
रामचरित मानस चलता फिरता सदगुरु है।।
मानस रूपी बुद्धपुरुष के सात लक्षण है।।
आर्जेन्टिना के उशूवाया में बह रही रामकथा के तीसरे दिन,सोमवार को आरंभ में बताया कि गोस्वामी जी ने यह दो पंक्तियों में लिखा है जिस दिन राम जन्म के बारे में श्रुति भगवती गाती है तब सभी तीर्थ वहां चले आते हैं।।
गुजराती कवि तुषार शुक्ल ने सनातन पर इतना बहुत हो रहा है उन पर जो लिखा वह पठन करते हुए बापू ने कहा:
सनातन धर्म का स्वभाव संगम मिटे भेद का भाव। दिया चले और हवा चलेगी अपना अपना स्वभाव।।
सनातन धर्म के ग्रंथ को देवताओं को अवतारों को निम्न दिखाने की कोशिश चल रही है। यह पीड़ा पूरे देश में है।।एकवेशधारी साधु ऐसा निवेदन कर रहा है कि हमारे 33 कोटि देवता मालिक नहीं है, नौकर चाकर है! मैनेजर तो वह जिनको मानते हैं वह है!! और तो हम क्या कहें सभी को बोलना चाहिए।। जिस सनातन धर्म की ग्लानी और हानि पर स्वयं साक्षात श्री कृष्ण अवतार धारण करने का संकल्प करते हैं।। इतना द्वेष? इतना ईर्षा? इतनी निंदा? शायद तय कर लिया होगा।। लेकिन सबको जागना चाहिए।। बोल बोल के मैं इतना ही कहता हूं बंगले वाले कुछ बोलो!!
परम पुरातन धर्म सनातन।।
इन सबकी बुद्धि निर्मल करें ऐसी जानकी जी के चरणों में प्रार्थना करें।।
बापू ने बताया सनातन धर्म को छोड़कर किसी और धारा में चंचूपात करें तो पता चलेगा।
जिनकी जिम्मेदारी है वह कोई बोलता ही नहीं है! कब बोलेंगे? हर एक क्षेत्र की जिम्मेदारी है।। अमेरिका से एक श्रोता ने जिज्ञासा की रामचरितमानस स्वयं सतगुरु है? बापू ने कहा कि मैंने कहा था क्योंकि लिखा है।। हमने ग्रंथ को गुरु माना है।।शिख परंपरा ने ग्रंथ को गुरु मानने की आस्था दिखाई है।।
सद्गुरु ज्ञान बिराग योग के।
बिबूधबेदभव भीम रोग के।।
सद्गुरु के बारे में चार बात कही है:सद्गुरुवैद है। जीवन नौका के कर्णधार है, आकाश में बहुत बादल छा जाए और जोरो से पवन आए तो बादल बिखर जाते हैं ऐसे ही सदगुरु मिल जाए तो नाना प्रकार के भ्रह्म रोग मिट जाते हैं।। सद्गुरु ग्रंथ है सात सोपान मानस रूपी बुद्धपुरुष के सात लक्षण है:
प्रथम सोपानबालकांड का लक्षण है निर्दोषता। बिल्कुल बालक जैसा भाव।। हमारे नगीन दास बापा कहते थे गुरु अपने घर आए तो लगे पड़ोसी का बालक खेलने आया है। शरीर शास्त्र इस निष्कर्ष पर है कि बालक जन्म लेता है तो वात्सल्य के कारण मां के वक्ष में दूध प्रकट होता है। ओशो का मंतव्य है बालक बिल्कुल निर्दोष है इसलिए स्वागत के लिए मुख में दुग्ध पान के लिए दूध प्रकट होता है कई महापुरुष है मगर ऐसा चित् गौरांग महाप्रभु का है।
अयोध्या कांड का लक्षण नि्वैर वृति। किसी से संघर्ष नहीं। जहां मन वचन और कम से किसी का वध ना हो वही अवध है।। बुद्ध पुरुष निदान जरूर करेंगे निंदा नहीं करेगा।। ऐसा कोई बुध्धपुरुष चलता फिरता रामचरितमानस है।। रामचरितमानस बुद्धपुरुष है।। लेकिन यह लोग कितने बीमार है? कितनी कठौता बरस रही है!
अरण्य कांड कहता है बुद्ध पुरुष रहता है भवन में लेकिन दृष्टि रखता है वन में।।भीतर से वनवासी स्थिति में जीने का अभ्यास करता है।। किष्किंधा कांड कहता है बुद्ध पुरुष सबके साथ मैत्री रखता है सुंदरकांड का लक्षण है मानसिक और शारीरिक सौंदर्य बुद्धपुरुष का लक्षण है।। लंका कांड जिसका जीवन सब के निर्वाण के लिए ही है।।एक व्यक्ति न जाने कितनों के निर्वाण का कारण बनता है।। उत्तरकॉंड जिसके जीवन परम विश्राम प्राप्त कर चुका है।।
हनुमान जी और महादेव जिन्होंने सब कुछ छोड़ा है बापू ने एक पंक्ति उठाई:
जननी जनक बंधु सूत दारा।
तन धन भवन सुर्हदपरिवारा।।
रामचरितमानस के पात्रों ने एक-एक वस्तु छोड़ी है भरत ने जननी को छोड़ा, लक्ष्मण ने पिता को, विभीषण ने बंधु को छोड़ा, स्वयंभू मनु ने पुत्रों को छोड़ दिया। महादेव ने पत्नी छोड़ी,दशरथ ने तन छोड़ा, अवध वासियों ने धन छोड़ा सीता जी ने भवन छोड़ा, सुग्रीव ने सुर्हद मित्रों को छोड़ा और वनवासियों ने अपने परिवार को छोड़ा।।
सबने एक-एक वस्तु छोड़ी लेकिन महादेव और हनुमान ने 10-10 वस्तुओं को छोड़ा है।।
शिव के चरित्र की कथा का गान करते हुए पार्वती ने परीक्षा लेने की कोशिश की,विफल रही और शिव ने मन में ही सती का त्याग करने का संकल्प लिया।।

