
राजस्थान और गुजरात में पवन ऊर्जा विस्तार के तहत 82 मेगावाट क्षमता का संचालन शुरू
अहमदाबाद, गुजरात | 25 जून 2026 | नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की स्वतंत्र विद्युत उत्पादक (इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर) कंपनी जूनिपर ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (जूनिपर ग्रीन एनर्जी) ने भारत के अब तक के सबसे बड़े विंड टर्बाइन (रोटर व्यास के आधार पर) के सफल कमीशनिंग की घोषणा की है। कंपनी ने एनविज़न के EN-182 विंड टर्बाइन जनरेटर को स्थापित किया है, जिसकी क्षमता 5 मेगावाट और रोटर का व्यास 181 मीटर है। इस उपलब्धि के साथ कंपनी ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी विकास यात्रा का एक और अहम पड़ाव हासिल किया है।
इन टर्बाइनों की स्थापना जुनिपर ग्रीन एनर्जी के पवन ऊर्जा पोर्टफोलियो के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि और परिचालन दक्षता में सुधार होगा और साथ ही भारत के स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के सफर में योगदान मिलेगा। कंपनी ने अपने बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो के तहत 22 जून 2026 तक राजस्थान के बाड़मेर तथा गुजरात के सुरेंद्रनगर और राजकोट जिलों में कुल 82 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का सफलतापूर्वक संचालन भी शुरू किया है।
इस उपलब्धि पर जुनिपर ग्रीन एनर्जी के सीईओ अंकुश मलिक ने कहा, “इन परियोजनाओं का सफल संचालन तकनीक और क्रियान्वयन क्षमता के मिश्रण के जरिए कंपनी की पवन ऊर्जा क्षमता के विस्तार के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत में सबसे बड़े रोटर व्यास वाले टर्बाइनों में शामिल एनविज़न के 5 मेगावाट टर्बाइनों की स्थापना के दौरान कई लॉजिस्टिक और इंजीनियरिंग चुनौतियों का सामना करना पड़ा, विशेष रूप से लगभग 89 मीटर लंबे ब्लेडों के परिवहन में। विभिन्न परियोजना स्थलों पर मात्र छह महीनों में एनविज़न के 51 EN-182 टर्बाइनों की सफल स्थापना कंपनी की टीमों की सूक्ष्म योजना, इंजीनियरिंग दक्षता और प्रभावी क्रियान्वयन क्षमता का प्रमाण है। कंपनी अपने विस्तार के साथ-साथ ऐसी नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किए हुए है, जो भारत की बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा आवश्यकताओं और महत्वाकांक्षाओं को समर्थन दे सके।”
हालिया कमीशनिंग के साथ कंपनी का नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो और मजबूत हुआ है, और यह कंपनी के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पहले जुनिपर ग्रीन एनर्जी गुजरात में विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से 305 मेगावाट क्षमता जोड़ चुकी है, जबकि राजस्थान में देश की पहली फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (एफडीआरई) परियोजना के कमीशनिंग की शुरुआत भी कर चुकी है। ये उपलब्धियां नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी की बढ़ती मौजूदगी और विविध परियोजनाओं के विकास की रणनीति को दर्शाती हैं।
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