
- जीप® और सिट्रोएन अगले तीन साल में 12 प्रोडक्ट लाएंगे। इनमें सात बिल्कुल नए प्रोडक्ट और पांच बड़े अपग्रेड होंगे, जिससे पैसेंजर वाहनों के प्रमुख सेगमेंट में स्टेलेंटिस का दायरा बढ़ेगा
- करीब 4,000 करोड़ रुपये का नया निवेश होगा। इससे भारत में स्टेलेंटिस का कुल निवेश, जो अभी 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है, 2030 तक बढ़कर करीब 15,000 करोड़ रुपये हो जाएगा
- पोर्टफोलियो में कम ईंधन खपत वाले आईसीई इंजन, हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड और बैटरी इलेक्ट्रिक, चारों तरह की टेक्नोलॉजी वाली गाड़ियां होंगी
- ग्रुप के लिए मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में भारत की भूमिका और बढ़ेगी
- नए रोडमैप का पहला प्रोडक्ट 2027 की दूसरी तिमाही में लॉन्च होगा
चेन्नई, भारत | 15 अक्टूबर 2026 | स्टेलेंटिस ने आज भारत में अपने विकास के अगले दौर की घोषणा की। अब तक कंपनी यहां अपने कारोबार की नींव तैयार कर रही थी। अब वह इस कारोबार को बड़े पैमाने पर फैलाने की ओर बढ़ रही है। फास्टलेन 2030 के तहत जीप® और सिट्रोएन अगले तीन साल में 12 प्रोडक्ट बाजार में उतारेंगे। इनमें सात बिल्कुल नए प्रोडक्ट होंगे और पांच में बड़े अपग्रेड किए जाएंगे। कंपनी का साफ लक्ष्य है कि भारत की सड़कों पर जीप और सिट्रोएन की गाड़ियां पहले से कहीं ज्यादा दिखें। नए लॉन्च बी, सी और डी एसयूवी सेगमेंट में होंगे। इनमें एक एमपीवी, ए-सेगमेंट कार और प्रीमियम पिकअप भी होगी। नए रोडमैप के तहत पहला प्रोडक्ट 2027 की दूसरी तिमाही तक लॉन्च करने की योजना है।
इन लॉन्च के लिए कंपनी अगले 3 साल में करीब 4,000 करोड़ रुपये (करीब 400 मिलियन यूरो) का नया निवेश करेगी। इसके बाद 2030 तक भारत में स्टेलेंटिस का कुल निवेश करीब 15,000 करोड़ रुपये हो जाएगा। रोडमैप में जीप के 5 और सिट्रोएन के 7 लॉन्च शामिल हैं। दोनों ब्रांड की भूमिका अलग-अलग होगी और दोनों मिलकर एक-दूसरे की कमी पूरी करेंगे। इन प्रोडक्ट्स के साथ स्टेलेंटिस भारत के पैसेंजर वाहन बाजार के उन सभी सेगमेंट में पहुंच जाएगी, जहां बढ़त की सबसे ज्यादा गुंजाइश है।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब कंपनी का कारोबार रफ्तार पकड़ रहा है। कैलेंडर वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में स्टेलेंटिस इंडिया का कारोबार पहली तिमाही के मुकाबले 35% बढ़ा। वहीं सिट्रोएन की रिटेल बिक्री 2026 की दूसरी तिमाही में पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 68% बढ़ी।
इस घोषणा पर स्टेलेंटिस एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तियानशु शिन ने कहा, “स्टेलेंटिस के लिए भारत की दोहरी भूमिका है। एक तरफ यह अहम बाजार है, जहां हम अपना कारोबार बढ़ाना चाहते हैं। दूसरी तरफ इस क्षेत्र और पूरे ग्रुप के कामकाज में यहां की क्षमताओं की अहमियत लगातार बढ़ रही है। भारत के साथ हमारा रिश्ता लंबे समय का है और हमारी नजर बिक्री के आंकड़ों से कहीं आगे है। फास्टलेन 2030 के तहत हमने क्षेत्र के स्तर पर काम करने का जो मॉडल अपनाया है, उसमें भारतीय टीम को फैसले लेने की ज्यादा आजादी मिली है। आज हम जो रोडमैप पेश कर रहे हैं, उससे साफ है कि इस बाजार पर हमें लंबे समय का भरोसा है। एक के बाद एक नए प्रोडक्ट, अलग-अलग ईंधन और ऊर्जा वाली टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर और सोर्सिंग में भारत की क्षमताएं, इन सबसे हमें वह आधार मिलता है, जिस पर हम 2030 तक यहां ज्यादा बड़ा और ज्यादा प्रतिस्पर्धी कारोबार खड़ा कर सकते हैं।”
स्टेलेंटिस इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश हजेला ने कहा, “भारत को लेकर हम कितने गंभीर हैं, यह सड़कों पर उतरने वाली हमारी गाड़ियां बताएंगी। पिछले कुछ सालों में हमने यहां मजबूत नींव तैयार की है। अब कारोबार को बड़ा करने की बारी है। अगले तीन साल में जीप और सिट्रोएन के 12 लॉन्च से बाजार में हमारी मौजूदगी काफी बढ़ेगी। भारतीय ग्राहकों के पास अलग-अलग सेगमेंट और पावरट्रेन में चुनने के लिए ज्यादा विकल्प होंगे। ज्यादा लोकलाइजेशन और पहले से ज्यादा मजबूत सेल्स और सर्विस नेटवर्क से भी इसमें मदद मिलेगी। करीब 4,000 करोड़ रुपये के नए निवेश के साथ हम यहां अपना कारोबार बड़ा कर रहे हैं, ग्राहकों की जरूरतों के और करीब पहुंच रहे हैं और मुकाबले में और मजबूत हो रहे हैं। साथ ही हम स्टेलेंटिस के वैश्विक कामकाज में भारत की भूमिका भी मजबूत कर रहे हैं।”
विकास का यह अगला दौर अब तक हुए 11,000 करोड़ रुपये (1 बिलियन यूरो) से ज्यादा के निवेश की नींव पर खड़ा है। यह निवेश मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर, सोर्सिंग और एक्सपोर्ट में किया गया है। फिलहाल भारत में स्टेलेंटिस के तीन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, एक महाराष्ट्र के रंजनगांव में और दो तमिलनाडु के तिरुवल्लूर और होसुर में। बेंगलुरु में कंपनी के इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर केंद्र हैं और हैदराबाद में आईसीटी का कामकाज है। साथ ही देश में उसके सप्लायर्स का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।
नए रोडमैप में जीप® प्रीमियम एसयूवी बाजार में स्टेलेंटिस की स्थिति मजबूत करेगा। नए प्रोडक्ट्स और आधुनिक पावरट्रेन विकल्पों के साथ यह ब्रांड कई सेगमेंट में उतरेगा। साथ ही अपनी पहचान वाली खूबियां, यानी दमदार क्षमता, असली एसयूवी वाला मिजाज और अलग दिखने वाला डिजाइन, इसकी ताकत बनी रहेंगी। सिट्रोएन मुख्यधारा के और ज्यादा बिक्री वाले सेगमेंट में कंपनी की पहुंच बढ़ाएगा। इसके प्रोडक्ट भारतीय ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे। इनकी कीमत ग्राहकों की पहुंच में होगी और ये भीड़ से अलग दिखेंगे। इनमें आराम, डिजाइन और टेक्नोलॉजी पर खास जोर रहेगा, जिससे ब्रांड कहीं ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच सकेगा।
भारत में आवाजाही का भविष्य किसी एक टेक्नोलॉजी के भरोसे तय नहीं होगा। इसे देखते हुए कंपनी के आने वाले प्रोडक्ट मल्टी-एनर्जी रणनीति पर आधारित होंगे। इनमें कम ईंधन खपत वाले इंटरनल कंबशन इंजन, हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड (पीएचईवी) और बैटरी इलेक्ट्रिक (बीईवी) टेक्नोलॉजी होगी। इसके लिए स्टेलेंटिस अपनी वैश्विक क्षमताओं का इस्तेमाल करेगी। किस गाड़ी में कौन सा पावरट्रेन होगा, यह ग्राहकों की जरूरत, कीमत, नियमों, चार्जिंग जैसे बुनियादी ढांचे की तैयारी और हर सेगमेंट के आर्थिक हिसाब-किताब को देखकर तय होगा। मकसद यह है कि हर ग्राहक को उसके इस्तेमाल के हिसाब से सही टेक्नोलॉजी मिले।
प्रोडक्ट बढ़ाने के साथ कंपनी ग्राहकों तक अपनी पहुंच भी बढ़ाएगी और गाड़ी रखने को लेकर उनका भरोसा भी मजबूत करेगी। स्टेलेंटिस अपने जीप और सिट्रोएन ब्रांड के साझा नेटवर्क को लगातार बढ़ा रही है। इसमें बिक्री की पहुंच, सर्विस, पार्ट्स की उपलब्धता और गाड़ी रखने के पूरे अनुभव पर खास ध्यान है। स्टेलेंटिस ब्रांड हाउस फॉर्मेट के जरिए कंपनी टियर-2 और टियर-3/4 शहरों के उन बाजारों में विस्तार करेगी, जहां बढ़त की अच्छी संभावना है और कारोबार के लिहाज से यह फायदेमंद हो।
कंपनी की रणनीति के केंद्र में लोकलाइजेशन बना रहेगा। जहां भी कारोबारी और तकनीकी रूप से संभव होगा, आने वाले प्रोडक्ट्स में भारत के उद्योग, इंजीनियरिंग और सप्लायर इकोसिस्टम का इस्तेमाल होगा। स्टेलेंटिस का लक्ष्य दोनों ब्रांड में 90% लोकलाइजेशन का है। साथ ही ग्रुप की वैश्विक सोर्सिंग में भारत का योगदान भी लगातार बढ़ाया जाएगा।
ग्रुप के लिए एक्सपोर्ट केंद्र के रूप में भी भारत की भूमिका बढ़ेगी। स्टेलेंटिस इस समय भारत से करीब 50 देशों को एक्सपोर्ट करती है। होसुर प्लांट में बनने वाले करीब 95% इंजन और गियरबॉक्स विदेश भेजे जाते हैं। फास्टलेन 2030 के तहत ग्रुप की एशिया-पैसिफिक रणनीति के हिस्से के रूप में भारत में विकसित गाड़ियों को भी एक्सपोर्ट करने की योजना है। ये गाड़ियां देश के बाजार के साथ विदेशी बाजारों में भी बिकेंगी।
अगले दौर का लक्ष्य साफ है। कंपनी ज्यादा सेगमेंट में उतरना चाहती है, ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचना चाहती है और पावरट्रेन के ज्यादा विकल्प देना चाहती है, ताकि पूरे भारत में जीप और सिट्रोएन की मौजूदगी बढ़ती रहे। हर प्रोडक्ट, उसके पावरट्रेन और आगे के लॉन्च के समय की जानकारी उस प्रोडक्ट के बाजार में आने से कुछ पहले दी जाएगी।
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