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चित्रकूटधाम तलगाजरड़ा में गुरु पूर्णिमा उत्सव: मोरारी बापू द्वारा स्वामी विष्णुदेवानंद गिरिजी की आध्यात्मिक विरासत को श्रद्धांजलि

तलगाजरड़ा, गुजरात | 10 जुलाई 2025 – गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु एवं रामकथा वाचक पूज्य मोरारी बापू के जन्मस्थान तलगाजरड़ा स्थित चित्रकूटधाम में भक्ति, अध्यात्म और ज्ञान की त्रिवेणी से युक्त एक ऐतिहासिक उत्सव का आयोजन हुआ। 10 जुलाई 2025 का यह दिन गुरु तत्त्व और आध्यात्मिक परंपरा को समर्पित एक स्मरणीय दिवस के रूप में मनाया गया।

गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर स्वामी विष्णुदेवानंद गिरिजी पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का लोकार्पण किया गया। स्वामी जी, जिन्हें श्रद्धापूर्वक “बड़े महाराज” के नाम से जाना जाता है, वे पूज्य मोरारी बापू के दादा श्री त्रिभुवनदास बापू के छोटे भाई थे। वे ऋषिकेश स्थित कैलाश आश्रम के छठे पीठाधीश्वर, काशी के कैलाश मठ के मंडलेश्वर, वराह सोरों मंदिर के प्रमुख, तथा निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर पद पर प्रतिष्ठित थे।

इस डॉक्यूमेंट्री में उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा को दर्शाया गया है, जिसमें गुजरात के भावनगर जिले में बाल्यकाल से लेकर बड़ौदा और काशी में संस्कृत शास्त्रों का अध्ययन, और अंततः ऋषिकेश में परमहंस संन्यास दीक्षा तक शामिल हैं। आध्यात्मिक जगत में उनके योगदान के लिए उन्हें “विद्या वाचस्पति” जैसी उपाधियाँ प्राप्त हुईं, जो उनके गुरुजनों और भारत सरकार द्वारा प्रदान की गई थीं। “संन्यासी शिरोमणि” के रूप में विख्यात स्वामी विष्णुदेवानंद गिरिजी को भारत की प्रमुख वेदांत परंपराओं में मार्गदर्शक के रूप में सम्मान प्राप्त है। अनेक संतों और संप्रदायों की गुरु परंपरा स्वयं को उनसे जोड़ती है।

डॉक्यूमेंट्री फिल्म में स्वामीजी की मूल हस्तलिखित टिप्पणियाँ, नोट्स और दुर्लभ ध्वनि रिकॉर्डिंग्स भी सम्मिलित की गईं हैं, जिन्हें पूज्य मोरारी बापू ने ससम्मान प्रस्तुत किया।

इस विशेष अवसर पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। स्वामी विष्णुदेवानंद गिरिजी की अधिकृत अंग्रेज़ी जीवनी “द डिवाइन साइलेंस ऑफ़ कैलाश” तथा उनके जीवन व साधना पर केंद्रित हिंदी पुस्तक “साक्षात्कार”, जिसमें उनसे संबंधित साक्षात्कारों का संग्रह प्रकाशित किया गया है।

पूज्य मोरारी बापू द्वारा यज्ञकुंड के पास संध्या समय पर दिए गए सहज, आत्मीय प्रवचनों का संकलन करने वाली पुस्तक का पहला खंड भी इसी अवसर पर प्रस्तुत किया गया। इसके अतिरिक्त, मोरारी बापू की 12 ज्योतिर्लिंग यात्रा पर आधारित कॉफी टेबल बुक के लंबे समय से प्रतीक्षित हिंदी और गुजराती संस्करणों का भी विमोचन किया गया।

गुरु पूर्णिमा 2025 का यह बहुआयामी आयोजन केवल गुरु को समर्पित श्रद्धांजलि नहीं था, बल्कि वह परंपरा, भक्ति और ज्ञान का एक सजीव संगम था जो आज भी पूरे विश्व में हृदयों को आलोकित करने वाली अखंड आध्यात्मिक परंपरा को नमन करता है।

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