
अहमदाबाद, गुजरात | 31 जुलाई 2026 | इन्फिस्टार रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड ने फिनलैंड की कंपनी आर्सीप्लग ओय (Arciplug Oy) के साथ एक विशेष जॉइंट वेंचर किया है। इस भागीदारी के तहत भारत के पहले “मेक इन इंडिया” मॉड्यूलर प्लग फ्लो कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट बनाए जाएंगे। इस पहल को देश में क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने और आधुनिक बायोगैस तकनीक उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
दोनों कंपनियों ने साझेदारी में आर्सीस्टार बायोएनर्जी प्राइवेट लिमिटेड नामक नई कंपनी रची है। यह कंपनी 3 टन प्रतिदिन (TPD) से कम क्षमता वाले मॉड्यूलर प्लग फ्लो सीबीजी प्लांट को तैयार करेगी। यह प्लांट कृषि अवशेष, नगर निगम के ठोस कचरे (MSW) और अन्य जैविक कचरे से क्लीन एनर्जी का उत्पादन करेंगे।
इस तकनीक को पहले से यूरोप और एशिया के कई देशों में सफलतापूर्वक उपयोग की जा रही है और अब भारत में पहली बार लाई जा रही है। भारत जब आयातित फोसिल फ्यूअल पर निर्भरता कम करने के लिए क्लीन एनर्जी की तरफ तेजी से बढ रहा है तब इस टेक्नोलोजी से देश को एनर्जी सिक्योरिटी, क्लायमेट चेन्ज, वेस्ट मेनेजमेन्ट तथा वोटर कन्झर्वेशन की दिशा में व्यवहारिक तथा स्थिर सोल्यूशन्स प्राप्त होंगे।
इन मॉड्यूलर प्लांट्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें केवल 4 से 5 महीने में शुरु किया जा सकता है, जबकि पारंपरिक बायोगैस प्लांट को तैयार होने में 12 से 18 महीने का समय लगता है।
साथ ही, इस तकनीक में पारंपरिक वेट डाइजेशन सिस्टम की तुलना में अत्यधिक कम पानी का उपयोग होता है, इसमें लगभग 30 प्रतिशत कम फीडस्टॉक की जरूरत होती है और बिजली की खपत भी बहुत कम होती है। इससे प्लांट का चलाने का खर्च घटता है और प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से अधिक लाभदायक बनता है।
ये मॉड्यूलर प्लांट 100 से अधिक अलग अलग प्रकार के जैविक पदार्थों जैसे नेपियर घास, नगर निगम का कचरा, धान का पुआल, प्रेसमड, कपास का अवशेष, फल एवं सब्जियों का कचरा, पोल्ट्री वेस्ट और मछली अपशिष्ट आदि से बायोगैस तैयार कर सकते हैं। इसलिए इनका उपयोग कृषि, उद्योग और नगर निकायों में आसानी से किया जा सकता है।
इस जोईन्ट वेन्चर पर प्रतिक्रिया देते हुए इन्फिस्टार ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सुहृद वी. साराभाई ने कहा कि भारत को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और किफायती एनर्जी सोल्यूशन्स की जरूरत है। आर्सीप्लग के साथ यह भागीदारी ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, कचरा प्रबंधन और ग्रामीण विकास जैसी कई राष्ट्रीय जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट में अधिकांश उपकरण भारत में ही बनाए जाएंगे, जिससे हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी तथा आधुनिक बायोगैस तकनीक एमएसएमई तक कम लागत में पहुंच सकेगी।
आर्सीप्लग ओय के वाइस प्रेसिडेंट जारी वाल्टानेन ने इस भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत जैव-ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के सबसे तेजी से बढते बाजारों में से एक है। उन्होने दुनिया के कईं देशों तथा भिन्न भिन्न् परिस्थितियों में इस टेक्नोलोजी को सफलतापूर्वक स्थापित किया है, उन्हें विश्वास है कि यह टेक्नोलोजी भारत में भी उद्योगों, नगर निकायों और किसानों को जैविक कचरे से अधिक अच्छे तरीके से क्लीन एनर्जी बनाने में मदद करेगी और देश के पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करने में बडी़ भूमिका निभाएगी।
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत इन्फिस्टार रिन्यूएबल्स गुजरात के गांधीनगर जिले में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से एक पायलट प्रोजेक्ट स्थापित कर रही है। लगभग 60 एकड़ में बनने वाली इस परियोजना में नेपियर घास की खेती की जाएगी, सौर ऊर्जा से बिजली तैयार होगी और बायोगैस उत्पादन के बाद बचने वाले अवशेष से जैविक खाद बनाई जाएगी। प्लान्ट में तैयार होने वाली सीबीजी गैस को स्थानीय सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर को 15 वर्ष के ऑफटेक समझौते के तहत सप्लाय करने का प्रस्ताव है।
आर्सीस्टार बायोएनर्जी का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में पूरे भारत में लगभग 150 मॉड्यूलर प्लग फ्लो सीबीजी रिएक्टर स्थापित करना है। केंद्र और राज्य सरकारों की अनुकूल नीतियों, सब्सिडी तथा SATAT और गोबर्धन जैसी योजनाओं के द्रारा कंपनी एमएसएमई और औद्योगिक इकाइयों को इन परियोजनाओं में निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगी।
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