Homeगुजरातबापु ने बताये नीज जीवन के द्वादश ज्योतिर्लिंग।।

बापु ने बताये नीज जीवन के द्वादश ज्योतिर्लिंग।।

सावन में पावन बधाइयां
सावधान महामंत्र है।।
बापु ने बताये नीज जीवन के द्वादश ज्योतिर्लिंग।।
त्रिभुवनदास दादा मेरा शिव है,मेरा ज्योतिर्लिंग है।। गुरु शिव रूप होता है।।
सम्मान देने में भी सावधान और सन्मान प्राप्त करने में भी सावधान रहे।।
साधु संत महापुरुषों की चर्चा में सावधान रहे
किसी से संघर्ष में सावधान रहे।। जो सावधान रहे वह साधु है।।

स्विट्झरलेन्ड की मनोहर वादियों मे स्थित सुंदर लाओस नगर के कॉंग्रेस हॉल में चल रही रामकथा के सांतवे दिन आज भारत में सावन मास शुरू हो रहा है और सबको श्रवण की बधाइया के साथ बापू ने कहा हमारे यहां द्वादश ज्योतिर्लिंग क्यों है?हमारे वैदिक शाश्वत सनातनी परंपरा में 12 अंक का बहुत महत्व है।।जैसे द्वादश अक्षर मंत्र है। वनवास के साल भी 12 है लेकिन कैकयी मॉं ने 14 साल कहे हैं।। पांडवों 12 साल का वनवास और तेरहवा साल अज्ञातवास में रहे।। हमारे यहां द्वादश गुरुओं की परंपरा है।।द्वादश वैष्णव का भी लिस्ट है। 12 का बड़ा महिमा है।। शिव साधना के केंद्र में 12 शिवलिंग है।।
बापू ने कहा मैंने बचपन में राम से ज्यादा शिव को भजा है। राम जी मंदिर में आरती पूजा करता था लेकिन मंत्र राम का और सेव्य स्वरूप रहा शिव का तब दादा थे।।रुपावा नदी में स्नान करने जाते थे मैं भी बाबुल के झुंड के नीचे मासूम रेत के शिवलिंग बनाता था और प्रति सावन में पार्थिव शिवलिंग के ऊपर सावित्री मां ने खदान की हुई मिट्टी का लेप करता था।।आवल बाबुल के और करेण के फूल बिल्व पत्र चढ़ाता था और बैठकर शिव स्मरण करता था।। एक प्रसंग जो चमत्कार नहीं है लेकिन हुआ जरूर है: दादा जर्मन धातु पात्र के लोटे से पूजा करते थे,स्नान करते थे।। स्नान करते समय अचानक एक दिन एक शिवलिंग लोटे में आ गया दादा शिवलिंग नहीं रखते थे। शालिग्राम रखते थे। हरि पूजक थे लेकिन हर के निंदक नहीं थे।।कहा यह शिवलिंग तुम रख।। सावन के बाद हर रोज पूजा में रखना और आज वह शिवलिंग मेरी पूजा में है।। जिसका नाम रखा है त्रिभुवनेश्वर महादेव।। धीरूकाका और मैं कंटक और कीचड़ में भूतनाथ जाते थे।।सालों तक शिव अभिषेक किया।मेरे निज जीवन में द्वादश ज्योतिर्लिंग भी है। द्वादश ज्योतिर्लिंग का महिमा अद्भुत है।।चार विशेष है पहले है सोमनाथ, फिर काशी विश्वनाथ, महाकाल और रामेश्वरम और मानस 900 कथा की जो अद्भुत बात हुई वह घटना भी बापू ने कहीं।।
फिर कल तलगाजरडा में विश्वनाथ,व्रजनाथ और त्रिलिंग महादेव,राम जी मंदिर में जीवनेश्वर महादेव प्रभुदास बापू को जूनागढ़ में एक साधु ने दिया वह प्रभुनाथ महादेव और त्रिभुवनेश्वर और सेंजल का ध्यानेश्वर महादेव।। 12वां मेरे लिए स्वयं त्रिभुवनदास दादा मेरा शिव है, मेरा ज्योतिर्लिंग है।। गुरु शिव रूप होता है।। जिसका संपूर्ण जीवन अविरोध हो,कभी किसी से अनुरोध न हो और प्रतिशोध से मुक्त हो वह बुद्ध पुरुष है।। सावन है सावन के सबको पावन बधाई बापू ने कहा आज का मंत्र है सावधान।सावधान महामंत्र है।सावधान का अर्थ है सचेत,होश में रहना,जागृत रहना।। कृष्णमूर्ति के शब्दों में एवर्नेस।।सावधान महामंत्र के आचार्य लक्ष्मण है।। मानस सावधान कथा भी हुई है रामचरितमानस में सावधान शब्द आए सब गाकर बापू ने कहा कि सुनने वाले और बोलने वाले भी सावधान रहे।।आप राम कथा में आए हैं किसी चेतना ने आपको निमंत्रित किया है। यह घटना बार-बार नहीं घटती।।यह अवसर है।।परम त्यागी के समान कोई धनवान नहीं।
भूसुंडी और गरुड़ की चैतसिक एकता बताइए दोनों एक दूसरों को तात कहते हैं मैं भी आपको बाप कहता हूं इसका मतलब तात और बच्चा दोनों को कह सकते हैं।। सम्मान देने में भी सावधान और सन्मान प्राप्त करने में भी सावधान रहे। साधु संत महापुरुषों की चर्चा में सावधान रहे।।किसी से संघर्ष में सावधान रहे।। जो सावधान रहे वह साधु है शरीर में भी सावधान रहो गलत जगह हाथ और दृष्टि न जाए। मन से सावधान रहे बुद्धि और चित से सावधान रहे और दादा कहते थे अहंकार से भी सावधान रहे।।
कथा प्रवाह में विश्वामित्र के साथ जा कर अहल्या उध्धार हुआ वो कथागान हुआ।।

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