
हद से ज्यादा जहां भोग होगा वहीं भय होगा ही।।
भोग के बेटे का नाम भय है।।
प्रेम से किया गया सत्संग स्वर्ग से कई गुना बेहतर है।
स्व का संसर्ग साधु है।।
सत्संग में जो सुख है वह स्वर्ग में नहीं।
विचार कालांतर में शास्त्र बन जाते हैं।।
माला बेचकर कोई मालामाल नहीं हो सकता।।
स्वर्ग में प्रौढ़ता नहीं वर्ना माया और तंत्र का प्रयोग क्यों करें!,यह प्रयोग ही कायरता है।।
सत्संग के अतिरिक्त कोई स्वर्ग नहीं।।
रामकथा में बिलकुल सादगी से रामजन्म गाया गया
कोच्चि-केरलम् में चल रही रामकथा के पांचवे दिन बुधवार को आरंभ में छोटा सा प्रकल्प हुआ।।
गुजराती लेखक,वक्ता,संशोधक भद्रायुवच्छराजानी का एक पुस्तक ‘ओशोनी आसपास’ व्यास पीठ के द्वारा ब्रह्मार्पण किया गया।।
और बापू की रामकथाओं का संपादन करते हुए नितिन भाई वडगामा ने पेरिस में हुई रामकथा ‘मानस रुद्राभिषेक’ का भी व्यास पीठ के द्वारा ब्रह्मार्पण हुआ।।
बापू ने अपने प्रतिभाव में कहा कि आदमी की भद्रता उनकी आयु बढ़ाती है उसे भद्रायु कहते हैं! और यहां संध्या समय जो बैठक होती है वहां जो वक्तव्य होते हैं वहां सत्य पड़ा है उसका वक्तव्य निर्भीक होता है।यह निर्भीक प्रवचन की प्रसन्नता व्यक्त की और बापू ने कहा अच्छी बातों का कॉपीराइट होना ही नहीं चाहिए।।ओशो ने अपने कोई विचार को कॉपीराइट नहीं किया।यह सब का है। प्रसाद बांटा जाता है। फिर भी प्रेक्टिकल होना चाहिए।जिस रूप में विचार लोगों के पास जाए, अच्छी बातें पहुंचनी चाहिए।।विचार कालांतर में शास्त्र बन जाते हैं। माला बेचकर कोई मालामाल नहीं हो सकता।।
कठोपनिषद का एक मंत्र:
स्वर्गेलोके न भयंकिंचनास्ति न तत्रत्वं न जरयाबिभेति।
उभेतीर्त्वाऽशनायापिपासेशोकातिगोमोदतेस्वर्गलोके।।
-कठोपनिषद्
इसमें स्वर्ग लोक का वर्णन है।।स्वर्ग लोक में ऐसा ऐसा होता है।।स्वर्ग लोक में भय नहीं है और हम स्वर्ग लोक का छेद उड़ाते हैं! तुलसी ने उड़ाया है इसलिए हम भी उड़ाते हैं।। स्वर्ग स्वल्प है,अंत में दुख देता है।।वहां बुढ़ापा नहीं है।वहां भूख तरस नहीं है।।कोई शौक नहीं है।सब वहां मोद-आनंद करते हैं।स्वर्ग लोक में भय नहीं तो इंद्र भयभीत क्यों रहता है?और यह प्रमाण रामचरितमानस में बहुत मिलते हैं।।
हद से ज्यादा जहां भोग होगा वहीं भय होगा ही। भोग के बेटे का नाम भय है।। बुढ़ापा नहीं मतलब बुद्धि की परिपक्वता नहीं।छलने की योजनाएं स्वर्ग में बनाई जाती है।।छोटी-छोटी बातों पर उलझनें है कोई ऋषि मुनि साधना करते हैं तो भी मेनका को कैसे भेजे?शंकर की समाधि तोड़ने के लिए कामदेव को उकसाया।।
शास्त्र देश,काल,पात्र,प्रसंग,घटना से संशोधित होने चाहिए।।अजरा प्रज्ञा होनी चाहिए। प्रज्ञा पचा नहीं पाते।भरत चित्रकूट में राम को मिलने जाते हैं तो स्वर्ग वाले बाजी बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। कितने घबराए हुए हैं की तांत्रिक प्रयोग भी चित्रकूट में किए गए। इंद्र के हजार नेत्र है फिर भी उसे सत्य नहीं दिखता।।इंद्र को मलिन मन का स्वार्थी कहा गया है।।स्वर्ग में प्रौढ़ता नहीं वर्ना माया और तंत्र का प्रयोग क्यों करें! यह प्रयोग ही कायरता है।।
मृत्यु लोक में बुढ़ापा भी है बौधिकता भी है।।भूख प्यास नहीं इसका मतलब स्वर्ग में प्राण नहीं है।।भूख तरस प्राण का प्रमाण है।।मृत्यु लोक में हम सप्राण प्राणवान है।।मानस में १४ लोगों को मरे हुए मानें है।। वहां कोई शोक नहीं यह भी झूठ है वहां बार-बार शोकसभा भराती है।।मोद का अर्थ है भोग यह प्रमोद नहीं है।।
बापू ने कहा कैलाश पीठाधीश्वर,विद्या वाचस्पति विष्णु देवानंद गिरि जीवकी टिप्पणी,कहते हैं स्वर्ग क्या है?वर्णन तो बहुत है। चाणक्य ने स्वर्ग और नरक से लौटे हैं उसके लक्षण भी दिखाए हैं।। सत्संग के अतिरिक्त कोई स्वर्ग नहीं।।स्व संसर्ग शब्द लिखा है।।संपर्क टूट सकता है, संपर्क क्षणजीवी है संसर्ग दीर्घजीवी है।।सत्संग का पलड़ा भारी है वह जमीन से जुड़ा हुआ है।।सत्संग मृत्युलोक में है।।प्रेम से किया गया सत्संग स्वर्ग से कई गुना बेहतर है स्व का संसर्ग साधु है।।सत्संग में जो सुख है वह स्वर्ग में नहीं।
अब यही सूत्र सत्संग में लागु होता है तो सत्संग में भय नहीं होता।।क्योंकि जहां सत्य है वहां भय कैसा यहां बुढ़ापा नहीं,उत्साह की जवानी आ जाती है।। सत्संग में भूख तरस नहीं।समय का ज्ञान नहीं रहता कथामृत, हरिनाम ही आहार है।।सत्संग में ब्रह्मानंद,परमानंद, सही में मोद-आनंद है।।
फिर राम जन्म की ओर कथा को मोड़ते हुए कहा की शिवजी को पार्वती ने अच्छा समय देखकर राम के जन्म के बारे में पूछा और बिल्कुल संक्षिप्त में राम जन्म के पांच कारण बताते हुए दशरथ के वहां पुत्र कामेश्टी यज्ञ हुआ और राजा दशरथ के राजमहल में मां कौशल्या की कूख में भगवान राम का प्रागट्य हुआ और एक मां परमेश्वर को बालक कैसे बन जाए वह कहती है। और भगवान बालक रूप में आए।।कोच्चि की व्यास पीठ से पूरे त्रिभुवन को राम जन्म की बधाई देते हुए आज की कथा को विराम दिया गया।।
== समाप्त ==

