
लीला का श्रवण,दर्शन,लीला में प्रवेश और एकाकारपनागुणातित श्रोता के लक्षण है।।
शिवजी गुणातित वक्ता और श्रोता है।।
जो किसी का नहीं है वह सब का होता है।।
शून्य ही पूर्ण है,जो बिल्कुल खाली हो जाता है वो सबका है।।
सत्य जहां से मिले,जब मिले,जिनके द्वारा मिले,जिस समय मिले-ले लेना चाहिए।।
रास रासेश्वर,रसराज,गोप-गोपेश्वर की गोपनीय पवित्र भूमि से बह रही रामकथा चौथे दिन में प्रवेश कर रही है।।
आज के दिन विशेष लोगों में जलारामबापा परिवार वीरपुर की ओर से पूज्य रघुरामबापा एवं हरिओम दादा और विशेष विद्या उपासकों की उपस्थिति रही दो-तीन प्रश्न पूछे गए।।
बापू ने कहा था कि गुणातित श्रोता की खोज है।। गुण का अर्थ होता है दोरी,रस्सी और रस्सी का एक ही काम है- बांधना।। सत्व गुण भी बंधन है। गुणातित श्रोता के बारे में ज्यादा कहते हुए बापू ने कहा:
सुनी महेश परम सुख मानी…. जब कथा सुनने गये पार्वती ने कथा सुनी लेकिन सुख नहीं मिला, शिवजी रामकथा के रचयिता,वक्ता,श्रोता और हनुमान जी के रूप में कथा के साक्षी भी है।।गुणातित श्रोता को ही कथा का परम सुख मिलता है सत्व गुनी श्रोता को सुख मिलता है। कुछ ना मिले ऐसा तो नहीं, कोई न कोई खुशी तो मिलती ही होगी गुणातित श्रोता के चार लक्षण कहते हुए बापू ने कहा कि गुरु कृपा,संतों की कृपा,ग्रंथ कृपा और गौरी शंकर की कृपा से कहूं तो गुणातित श्रोता कथा सुनता है पहला लक्षण है कथा की लीला का श्रवण करें।। जो भी वर्णन है उनका श्रवण करें।।शंकर कहते हैं कि मैं कथा का वर्णन करने जा रहा हूं:
मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवहु सो दसरथ अजिर बिहारी।।
बापू ने कहा कि मैं बोलता कम और सुनता ज्यादा हूं क्योंकि मुझे मालूम है कि मेरे में कोई और ही बोल रहा है! मात्रा भेद से सबको मालूम है कि खुद नहीं लेकिन अन्य बोलते हैं।। किसी भी क्षेत्र हो जब बिल्कुल औतप्रोत हो जाते हैं तो आपको समझ में आता है कि यह कौन बोल रहा है!
लंका में चार ऐसे लोग हैं जिनके पीछे ‘ण’ शब्द लिखा है।।और यह ‘ण’ किसी का नहीं होता: रावण, विभीषण,सुषेण और कुंभकर्ण।।लंका दहन पर हनुमान जी ने रावण के ण को जला दिया। बाकी के तीन सलामत रहे क्योंकि वह किसी न किसी के हुए हैं।। जो किसी का नहीं है वह सब का होता है।। रावण सबका नहीं हो पाया।।
लाओत्सू नामक चीनी साधु 2500 साल पहले का यह चिंतक कहता है शून्य ही पूर्ण है। जो बिल्कुल खाली हो जाता है वो सबका है।।
युगों में कहीं ना कहीं दाग है, निष्कलां केवल गोपनाथ है।।गोपनाथ ने जिसे भी धारण किया वहां भी कहीं कलंक है,जैसे कि:सर्प,बिच्छू,चंद्रमा,गंगा, पार्वती,नदी-कहीं ना कहीं दाग है।।
महादेव जैसा देव नहीं, महिम्न जैसा कोई स्तोत्र नहीं अघोर जैसा कोई मंत्र नहीं और गुरु जैसा कोई तत्व नहीं ऐसा पुष्पदंत कहता है।।
दूसरा है लीला का दर्शन।।येगुणातित श्रोता का दूसरा लक्षण है।।तीसरा लीला में प्रवेश और चौथा खुद लीला में एकाकार हो जाना।।
रोज के क्रम में आज नरसिंह मेहता का पद रामसभा में रमवानेग्या’ता…. पसली भरी ने रस पीधो रे…. यहां यह पूरे काव्य का रसास्वादन करते हुए बापू ने कहा कि पहले प्याला का सूत्र है आग्या सनातन धर्म का ओ(०) ग्रुप है, सबकास्विकार करें बापू ने नामदेव चरित्र भी कहा और बताया कि सत्य जहां से मिले,जब मिले,जिनके द्वारा मिले,जिस समय मिले-ले लेना चाहिए।।
शंकर गुणातित वक्ता और श्रोता है।।
कुंभज की कथा के बाद सती को संशय हुआ और रास्ते में राम की लीला चल रही थी। सती ने समझा राम की परीक्षा ली जाए। परीक्षा के लिए सीता का वेश धारण किया,लेकिन परीक्षा में विफल रही और शिवजी ने देख लिया की सती ने सीता माता का रूप लिया है।मन में ही शिव जी ने प्रतिज्ञा की और रास्ते में अच्छी कथाएं कहते हुए कैलाश में जाकर आसन बिछाकर शिवजी समाधिष्ट हो गए।।

