
रामचरितमानस का भाष्य सुंदरकांड माना गया है सुंदरकांड का भाष्य हनुमान चालीसा है।।
मुखर हो तो ऋषि,मौन हो जाए तो मुनित्व पैदा होता है।।
ज्ञानेश्वर जी ने कहा है मेरे मन की गति आश्रम की ओर हो,इधर-उधर ना भटके।।
हनुमान चालीसा की प्रत्येक पंक्ति गुरु महिमा है हनुमान जी गुरु,सद्गुरु,बुद्धपुरुष है।।
आपको किसी में भी गुरु तत्व न दिखाई दे तो हनुमान जी को गुरु माने।।
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देखत बन सर सैल सुहाए।
बालमीकि आश्रम प्रभु आए।।
राम दीख मुनि बासु सुहावन।
सुंदर गिरि काननु जलु पावन।।
-अयोध्याकाण्ड,दोहा क्रमांक 123, चौपाई संख्या 5 एवं 6.
बालमीकि मन आनँदु भारी।
मंगल मूरति नयन निहारी।।
-अयोध्याकाण्ड, दोहा क्रमांक 124, चौपाई संख्या 5
इन बीज पंक्तियों गायन करते हुए आज नवमे विराम के दिन कुछ उप संहारक बातें कहते हुए जहां तलगाजरडा के त्रिभुवानिय ठाकुर विराजमान है और सभी विराजित स्वरूप को प्रणाम करते हुए निमित्त मात्र मनोरथी परिवार ने जो आभार का भाव व्यक्त किया सभी पर प्रसन्नता का भाव दिखाते हुए और परम वैष्णवी वारकरि परंपरा धारा के सभी साधकों को प्रणाम करते हुए बापू ने कहा की हनुमान चालीसा में श्री गुरु चरण सरोज रज यह लिखा गया। वर्णन है तो रघुबर बिमल जस लेकिन वर्णन तो हनुमान जी का करते हैं तो क्या समझे? वेदों का भाष्य उपनिषद,उपनिषद का भाष्य भगवत गीता,भागवत गीता का भाष्य श्री रामचरितमानस। गीता में सब योग रामचरितमानस में प्रयोग है। रामचरितमानस का भाष्य सुंदरकांड माना गया है सुंदरकांड का भाष्य हनुमान चालीसा और हनुमान चालीसा में जो रघुवर है।।केवल राम रघुवर नहीं है भरत,लक्ष्मण शत्रुघ्न भी रघुवर है और रघुकुल में चारों वर-श्रेष्ठ है।। हनुमान जी भी रघुवर है राम हनुमान जी से कहते हैं तू मुझे लक्ष्मण से भी दुगुना प्रिय है।। हनुमान चालीसा गुरु महिमा है। हमने हनुमान चालीसा पर १० कथा की, ११वीं हनुमान चालीसा का एक पाठ बाकी है।। हनुमान चालीसा की प्रत्येक पंक्ति गुरु महिमा है।।हनुमान जी गुरु, सद्गुरु,बुद्धपुरुष है।।
आपको किसी में भी गुरु तत्व न दिखाई दे तो हनुमान जी को गुरु माने।।
ऋषि मुनि के नाम से मानस में जितनी मात्रा में मुनि शब्द है इतना ऋषि शब्द नहीं।।मुनि का मतलब है साधु।।कोई साधु गाने,नाचने बोलने लगे तब ऋषि, और मौन हो जाए तो मुनि है।।मुखर हो तो ऋषि मौन हो जाए तो मुनित्व पैदा होता है।।
मुनि की पहली निष्ठा है मौन।दूसरी निष्ठा मंत्र।तीसरी माला,चौथी मनन,पांचवी मारुति निष्ठा।छठी मानस निष्ठा,सातवीं महत् पद निष्ठा।आठवीं विश्व मांगल्य की निष्ठा।।
रामचरितमानस में आश्रम की सूची है वहां भरद्वाज मुनि का आश्रम।नारद जी का आश्रम। मनु शतरूपा का आश्रम। कपट मुनि का आश्रम।विश्वामित्र,गौतम मुनि,वाल्मीकि और राम का चित्रकूट आश्रम। अत्रि मुनि का,अगस्त्य मुनि का आश्रम,शबरी आश्रम। कालनेमि का आश्रम।कागभुसुंडि आश्रम और सब के साथ जोड़कर किल्लारी का वाल्मीकि आश्रम ऐसे १८ आश्रम की बात है।।
ज्ञानेश्वर जी ने कहा है मेरे मन की गति आश्रम की ओर हो,इधर-उधर ना भटके।।
फिर संक्षिप्त में शेष कथा का गायन करते हुए संधि के प्रस्ताव लेकर अंगद को भेजा गया।। संधि विफल हुई और फिर राम रावण का युद्ध जो सभी युद्धों में सबसे प्रधान है।।रावण को ३१ बाण चला कर गति देकर सीता जी को पुष्पक विमान में लेकर अयोध्या में वापस राम लौटे।।वशिष्ठ मुनि ने राम का राज्याभिषेक किया वह सब कथा और आखिर में सत्य प्रेम और करुणा का गान करके इस रामकथा को तलगाजरडा के ठाकुर जहां विराजमान है वह त्रिभुवानिय ठाकुर के चरणों में अर्पण करके बापू ने कहा कि एक कथा मूल जो १००-२०० साल पहले की मूर्तियां वांगर(महुआ के पास) है वहां कथा करेंगे महाराष्ट्र में भी अगली साल कथा लेकर आएंगे और सबको प्रसन्नता,प्रपन्नता और संपन्नता का साधु भाव देते हुए रामकथा का विराम हुआ।।
अगली,क्रम में ९७९वीं रामकथा अरब सागर की बेटी राणी कोच्चि,जिल्ला एर्नाकुलम्-केरलम् से १३ जून से २१ जून के बीच शुरु होगी।
ये रामकथा का जीवंत प्रसारण आस्था टीवी चैनल तथा चित्रकूटधाम तलगाजरडावयु-ट्युब चैनल के माध्यम से नियत नियमित समय पर होगा।।
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