
बुद्ध का साक्षी भाव,ध्यान और मीरां का समर्पण यह दो नहीं है,मूल में एक है,दिखते दो है।।
कई लोग ऐसे हैं पूरा जीवन अच्छा गया लेकिन मृत्यु बहुत बुरा हुआ है,प्रमाण है:महाभारत।।
तुलसी जी जैसा सगुण और निर्गुण का शुद्ध भाव से सिद्ध किसी ने नहीं किया है।।
निर्गुण को समझना बहुत आसान है,सगुण को समझना मुश्किल है।।
तप,दम,कर्म,वेद,वेदांत और प्रतिष्ठा कहां रहती है
यह सब का एक ही निवास स्थान है:सत्य।।
केरलम् के कोच्चि की पावन भूमि में चल रही रामकथा की धारा शुक्रवार को सातवें दिन में प्रवेश कर रही है।।
अनेक जिग्यासायें से शुरू करते हुए बापू ने कहा की विज्ञान क्या होता है?ज्ञान और विज्ञान में क्या अंतर है? बापू ने बताया कि बिल्कुल छोटे रूप में बताउं तो ज्ञान थियोरी है विज्ञान प्रैक्टिकल है।।ज्ञान के समान कोई पवित्र नहीं है ऐसा गीता में कहा है। अपने जीवन में वह प्रयोग करके प्रतिष्ठित करते वो विज्ञान है।।ज्ञान अनंत है,वही ब्रह्म है।संवेदनाहीन विज्ञान सामाजिक पाप है ऐसा गांधी जी ने कहा है।।७५०० लोगों की मृत्यु और लाखों डॉलर खर्चने के बाद अच्छा हुआ कल शांति समझौता हुआ। यह सब विज्ञान के साधनों से लड़ाई लड़ी गई थी। रामचरितमानस कहता है ज्ञान मोक्ष देता है। बिल्कुल मान शून्यता ज्ञान है।यह थियोरी हो गई। ज्ञान खड़क की धार है।।ज्ञान दीप है और दीप जलाने के लिए दूध दोहना,गर्म करना,खटाई डालकर दही बनाना,मंथन करके मक्खन निकालना फिर नवनीत से घी निकाल कर दीपक जलाना यह सब प्रैक्टिकल है।।
मृत्यु के मिमांसा महाभारत में,भगवत गीता में भी की है।।गोरख और कबीर ने भी मीमांसा की है। सब बुद्ध पुरुषों का सार यह लगता है कि कई लोग ऐसे हैं पूरा जीवन अच्छा गया लेकिन मृत्यु बहुत बुरा हुआ है।।प्रमाण है:महाभारत। कुंता माता जैसी कोई महान स्त्री नहीं लेकिन कुंता का मृत्यु बहुत खराब तरीके से हुआ।।वन में आग लगी और भागी जा रही है। मृत्यु भयावह है।।विदुर का मृत्यु भी खराब है मृत्यु के वक्त विदुर अपने कपड़े फाड़ रहे हैं भीष्म जैसे महापुरुष भी ६ महीने तक सहन करके लेटे हैं।।गंगा का बेटा है।वैसे कर्ण सूर्य का बेटा उनकी मृत्यु भी भयानक है।।धृतराष्ट्र की मृत्यु, खुद कृष्ण की मृत्यु,वैसे लीला है।।
लेकिन जीवन कभी आदर्श नहीं बन सके ऐसे लोगों की मृत्यु की आखिरी पल बहुत अच्छी रही ऐसा भी है।। रामचरितमानस में ऐसी ११ मृत्यु दिखाई है ताडका जैसी कोई क्रोधी नहीं, भयंकर स्त्री नहीं। वैसे सुबाहु,वाली,कुंभकर्ण,अक्षय कुमार,खुद रावण सभी की मृत्यु अच्छी हुई है।।
नचिकेता को मृत्यु की विद्या को दान किया गया। मृत्यु एक विद्या है।
तुकाराम कहते हैं मैंने अपना मरण मेरी आंखों से देखा और मेरे लिए अनुपम उत्सव बन गया।
हमारे गुजराती के भद्रायु भाई ने अपनी धर्मपत्नी की मृत्यु को महोत्सव बनाया और रंग बिरंगी कपड़े पहनकर आने को कहा था।।विदाय का भी सम्मान होना चाहिए।।निर्गुण को समझना बहुत आसान है सगुण को समझना मुश्किल है।।तुलसी की दोहावली को पढ़ना तब निर्गुण और सगुण की सही समझ आ सकती है।।
अज्ञान को समझे बिना ज्ञान का कथन करें,अंधेरे को समझे बिना प्रकाश का कथन करें और सगुण को समझे बिना अगुण का कथन करें वह तो मेरा गुरु लगता है!ऐसा तुलसी लिखते हैं।।तुलसी जी जैसा सगुण और निर्गुण का शुद्ध भाव से सिद्ध करना इतना किसी ने नहीं किया है।।
जब हम चेक बुक में अंक लिखते हैं तो गरबड़ कर सकते हैं लेकिन शब्दों में,आखर में,अक्षर में कोई गड़बड़ नहीं कर सकते हैं।।
कई लोग पूरी जिंदगी सगुण-निर्गुण में निकाल देते हैं बुद्ध का साक्षी भाव,ध्यान और मीरा का समर्पण यह दो नहीं है।मूल में एक है,दिखते दो है।। बुद्ध अप्पदीपो भव कहते हैं और दीया है तो उनमें घी, स्नेह,भक्ति-समर्पण है।।बुद्ध और मीरा को अलग नहीं किया जा सकता हैं।
जो ज्ञान नृत्य नहीं करता वह पंगु है। जो नृत्य विवेक छोड़ देता है वह नृत्य नहीं।
परमात्मा है उसकी साबिती क्या है? हम सांस लेते हैं,हम भूल भी जाए तो भी हम सांस लेते हैं वह परमात्मा की प्रतीति है।।परमात्मा हमारी सांस चलाता है।
हवा खिलाफ थी,फिर भी चराग खूब जले।
खुदा भी अपने होने का क्या-क्या सबूत देता है! -खुमार बाराबंकवी
जो मिला है उसे दिखाऊं कैसे।
मुश्किल यह है,उसे छुपाऊं भी कैसे!
–राज कौशिक
यह हकीकत है कि वहां पहुंचा है कोई एक दो। लेकिन चांद की चर्चा तो सब करते हैं।।
कठोपनिषद का एक मंत्र:
तस्यै तपो दम: कर्मेति प्रतिष्ठा।
वेदा: सर्वांगानि सत्यमायतनम्।
कहता है यह छह वस्तु:तप,दम,कर्म,वेद,वेदांत और प्रतिष्ठा कहां रहती है?यह सब का एक ही निवास स्थान है: सत्य।।सत्य नहीं तो इसका कोई मतलब नहीं रहता प्रेम में छह वस्तु रहती है:गुण रहितता, कामना रहितता,निरंतर वर्धमान,अविच्छीनता,सूक्ष्मतरता और अनुभवरूप।।
करुणा में भी छ वस्तु:मौन,अहिंसा,अश्रु,आर्तनाद, अमृत और अहोभाव रहते हैं।।
संक्षिप्त में मानस की जनक की वाटिका का प्रसंग, सीताराम जी का विवाह और फिर विश्वामित्र की अयोध्या से विदाई के बाद बालकांड का समापन हुआ।।
== समाप्त ==

