
ऋषि के पास सिद्धियां होती है,मुनियों के पास शुद्धि होती है।।
ऋषि बहुधा ब्रह्मांड का पिंड का दर्शन करते हैं,मुनि मंडल भीतरी दर्शन करता है।।
थोड़ा मौन का अभ्यास करो!साप्ताहिक मौन,एक दिन का मौन या साल में कुछ दिन।।
कबीर-ऋषि और मुनि का संयुक्त साधु है।।
जिनका चित्र पूजते हो उनके चरित्र का ध्यान करो,मन से महसूस करो,मनन करो।।
अपनी निष्ठा जितनी हो सके गोपनीय रखो।
चित्र चरित्र और डिजाइन हमें प्रेरणा देगी।।
“जब तक दिल और दिमाग को नुकसान ना करें तब तक विज्ञान स्वीकार्य है”: बापु
श्री कृष्ण जी की भूमि और व्रज मंडलों के मुख्य वन अग्रवन-आग्रा नगरी में बह रही कथाधारा में रिषिओं की वंदना का तीसरा चरण शुरु हो रहा है,गुरुवार को तीसरे दिन में पहुंचे तब मन ही मन कर्म प्रवाही यमुना जी,इस भूमि और सभी को प्रणाम करते हुए बापु ने कहा इन दिनों में मानस के ऋषियों की वंदना कर रहे हैं।।
बार-बार स्पष्टा करुं कोई भेद न करें,कोई निम्न या कोई श्रेष्ठ ऐसा न कहे।।
फिर भी ऋषि बहुधा ब्रह्मांड का पिंड का दर्शन करते हैं,मुनि मंडल भीतरी दर्शन करता है।।
ऋषियों के नेत्र खुले हैं,ऋषि दर्शन के देवता है। मुनिगन भीतरी दर्शन करते हैं।।
दुनिया में जितने भी वैज्ञानिक हुए,हमारे मनिषीओं ने ऋषि कहा है।।यूरी गागरिन स्पेस में गया और पृथ्वी पर लौटा तब एक रिषी आया ऐसा जगत ने कहा।।नील आर्मस्ट्रांग चंद्र से वापस आया तो जगत के अखबारों ने ऋषि शब्द से वंदना की।।
एक भी वैज्ञानिक को भारत के मनिषीओ नें मुनि नहि कहा है।।
एक ब्रह्मांड को और एक पिंड को देखता है। विश्वामित्र ऋषि होने के नाते नया स्वर्ग बनाने की बात करते हैं।जब महामुनि बन जाते हैं तब उनका भीतरी दर्शन शुरू होता है।।ऋषि सदैव मुखर होगा मुनि सदैव मौन रहेगा।।
एक निवेदन करते हुए बापु ने कहा थोड़ा मौन का अभ्यास करो!साप्ताहिक मौन,एक दिन का मौन या साल में कुछ दिन।।अपना जन्मदिन पड़ता हो तब जितने साल के हुए इतने घंटे या इतने दिनों का मौन धारण करें।।
पूछा गया कि कबीर ऋषि है कि मुनि?वैसे हमारे महापुरुष नानक जी,रामकृष्ण परमहंस,मीरांबाई, नरसिंह मेहता,तुकाराम,ज्ञानदेव,स्वामी रामतीर्थ सभी के बारे में हम कह सकते हैं।।कबीर ऋषि और मुनि का संयुक्त साधु है।।यह सब महापुरुष भी ऐसे ही साधु है।
गुरु के चित्र का दर्शन हमें सावधान करता है।चित्र मंजिल नहीं,लेकिन सावधान करता है।जिनका चित्र पूजते हो उनके चरित्र का ध्यान करो,मन से महसूस करो।।परमात्मा या गुरु ने जो चित्रण किया है इस पर बहुत मनन करो।।गुर्जिएफ की भाषा में गुरु एक डिजाइन बनाता है।।भगवान कृष्ण रासलीला में संलग्न होते हैं वह उनकी डिजाइन है।।
पंडित रामकिंकर जी महाराज ने रामायण के बहुत रहस्य खोले हैं,उद्घाटित किए हैं।पंडित जी के विचारों को मैं सबको,कथा जगत को अनुरोध करूं की विनम्रता से विचारों को ले और नाम देकर प्रस्तुत करें।क्योंकि प्रज्ञाचोरी भी बहुत होती है।।
अपनी निष्ठा जितनी हो सके गोपनीय रखो।चित्र चरित्र और डिजाइन हमें प्रेरणा देगी।।
बापु ने बहुत पुरानी याद ताजा करते हुए कहा कि सौराष्ट्र में मोरबी के पास मच्छु डैम टूटा।।बहुत भयानक दुर्घटना घटी।।तब में अलियाबाडा में था। और रहा न गया तो पीडीतों को मिलने के लिए मोरबी पहुंचा।।
किसी ने कहा कि हमें कुछ कहो,आश्वासन दो। सोच रहा था क्या आश्वासन दुं। फिर भी एक डिजाइन शुरू हुई।किसी भी सिद्धांत को ठीक से बताने के लिए दृष्टांत दे वह डिजाइन है।।
स्वामी रामतीर्थ ने जो डिजाइन बनाई थी वहीं उन दिनों मन में आई।।स्वामी जी ने कहा था:जब एक एक साधु जापान गया था।।और जापान भूकंप का देश है।बार-बार भूकंप आते हैं।एक गृहस्थी के घर सत्संग चल रहा था।।उसी वक्त भूकंप हुआ! सब लोग जो अभ्यासु थे वह भागे! साधु बैठा रहा।।
फिर थोड़ी देर के बाद अच्छा हुआ तो सब आए और पूछा कि हम तो आदती है,भूकंप आते हैं तो डरते नहीं।लेकिन आप क्यों बैठे रहे?तब साधु ने कहा कि भूकंप आता है तो सब भागते हैं।आप बाहर भागे,मैं अंदर भागा था,भीतर भागा था।।जो अंतर यात्रा करता है उसे कोई भूकंप हिला नहीं सकता! तब मैंने बताया था कि थोड़ी अंतर यात्रा भी करना।।
मुनि होने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है।।
मौन जैसा जगत में कोई मुखर नहीं यदि हम मौन सुन पाए तो! ऋषि दर्शन करता है मुनि मनन करता है।।ऋषि गृहस्थ है,मुनि गृहस्थ हो तब भी वानप्रस्थी है।ऋषि मुनियों के पास सिद्धियां होती है,मुनियों के पास शुद्धि होती है।।ऋषि कर्मयोगी है।।
मानस के सातों ऋषि ने कुछ न कुछ सृजन-सर्जन-निर्माण किया है।वाल्मीकि ने मानस का सृजन किया।वह मानस के निर्माता है।।सभी ऋषि निर्माता है,क्रिएटर है।वशिष्ठ जी भाग्य निर्माता है।प्रारब्धवादी है,चाहे तो भाग्य बदल सकते हैं ऐसी शक्ति वाले हैं।।विश्वामित्र नए स्वर्ग के निर्माता है। याज्ञवल्क्य कथा के निर्माता है।भारद्वाज राम के मार्ग के निर्माता है।अत्रि दत्तात्रेय के निर्माता है। तीन देवताओं का रूप दत्त का वह निर्माण करता है।। कुंभज मंत्र निर्माता है।।सभी कर्मठ है।।
पूरे रामचरितमानस में ‘परम साधु’ शब्द केवल एक बार आया।कोई कोई ही होता है! साधु के मेले नहीं होते।।’साधुता’ शब्द केवल एक बार आया।महाकाल के मंदिर में जो परम साधु बैठा है।। आश्रम बनाने के बाद भी कभी मुनि नहीं बना जा सकता।।
साधक सरिता बनकर,ईश्वर को सागर समझ कर जाए तो ईश्वर से,ईश्वर में मिल सकता है।।
ए.आइ.के बारे में बापु ने कहा जब तक दिल और दिमाग को नुकसान ना करें तब तक विज्ञान स्वीकार्य है।।
बहुत से प्रश्न के जवाब देते हुए कीर्तन गान के बाद आज की कथा को विराम दिया गया।।
== समाप्त ==

