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पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी के 60वें जन्मोत्सव समारोह में श्री मोरारी बापू की विशेष उपस्थिति

मुंबई | 26 सितंबर 2026 | श्रीमद राजचंद्र मिशन धरमपुर द्वारा आयोजित और पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी के 60वें जन्मोत्सव समारोह के अवसर पर आयोजित भव्य ‘अहो गुरुदेव’ समारोह में प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और रामकथा वाचक श्री मोरारी बापू ने विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराई।

‘60 इयर्स ऑफ एन एनलाइटन्ड एक्जिस्टेंस’ के पावन विषय पर 25 और 26 सितंबर के शुभ दिनों में आयोजित इस द्वि-दिवसीय महामहोत्सव में पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी के तपोमय जीवन, अमृत वाणी और विराट मानव सेवा कार्यों के प्रति अहोभाव व्यक्त करने हेतु अनेक संतों-महंतों, प्रबुद्ध महानुभावों तथा हजारों आत्माभिलाषी भक्त एकत्र हुए थे। यह मंगल उत्सव उनके 60वें अवतरण वर्ष के अवसर पर वर्षभर प्रवाहित होने वाले भक्ति और सेवा पर्व का एक अविभाज्य अंग है, जिसके अंतर्गत संपूर्ण विश्व में विभिन्न दिव्य आध्यात्मिक सत्संगों, सांस्कृतिक अनुष्ठानों और निष्काम मानव सेवा के भगीरथ कार्यों का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी के जीवन और कार्यों पर आधारित एक चित्रमय जीवनपट का विमोचन किया गया, साथ ही उनके द्वारा ‘सर्विंग कम्पैशनेटली’  विषय पर प्रवचन भी दिया गया।

पूज्य गुरुदेवश्री तथा उनके मातृ-पितृ चरणों में वंदना अर्पित करते हुए पूज्य श्री मोरारी बापू ने भावपूर्वक कहा, “ऐसे परम प्रबुद्ध आत्मा को प्रकट करने वाले पुण्यशाली मातृ-पितृ के श्रीचरणों में मेरे कोटि-कोटि प्रणाम। पूज्य गुरुदेवश्री को भी मेरे साष्टांग प्रणाम, जो स्थूल देह रूप में हमारे बीच विद्यमान होने के बावजूद, आत्मिक तत्व से परम अलौकिक, दिव्य और गुणातीत हैं।”

पूज्य गुरुदेवश्री के साथ अपने परम आत्मिक संबंध का स्मरण करते हुए पूज्य श्री मोरारी बापू ने भावपूर्वक कहा, “मैं विचारमग्न हूँ कि किस मुख से अभिव्यक्ति करूँ। वाणी तो असीम है, परंतु इस पावन अवसर पर किन शब्दों का चयन करूँ, इस विषय पर मैं धर्मसंकट महसूस कर रहा हूँ। मेरे ये शब्द केवल उनकी प्रशंसा तक सीमित नहीं हैं। पूज्य गुरुदेवश्री के साथ मेरा यह नाता कोई प्राकृतिक या लौकिक नाता नहीं है, यह तो चिन्मय आत्मा का संबंध है। इसी पवित्र आत्म-संबंध के कारण ही उनके निरंतर आशीर्वाद मुझ पर बरसते हैं और मैं भी अपने भावपुष्प तथा भक्ति उनके चरणों में अर्पित करता हूँ। मैं यहाँ केवल इसी दिव्य और आध्यात्मिक नाते के खिंचाव के कारण उपस्थित हुआ हूँ।”

पूज्य गुरुदेवश्री के दिव्य जीवनचरित्र पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने भावपूर्ण वाणी में कहा, “उनके पावन जीवन में पंच महायज्ञ की दिव्य धारा प्रवाहित होती है। उनमें से एक द्रव्ययज्ञ है, परंतु इसे केवल लौकिक धन या भौतिक आहुति के संकुचित अर्थ में नहीं समझा जाना चाहिए। आज के युग में, मैं इस द्रव्ययज्ञ को परम साधना और निष्काम सेवा-रहस्य के रूप में देखता हूँ। मैंने उनकी अखंड और निरंतर साधना के प्रत्यक्ष दर्शन किए हैं, और उनकी दिव्य उपस्थिति तथा करुणा-कृपा से जो यह विराट मानव सेवा रूपी भगीरथ कार्य हो रहा है, वही सच्चा और परम द्रव्ययज्ञ है।”

ऋषि चैतन्य आश्रम की आध्यात्मिक प्रमुख एवं संस्थापिका आनंदमूर्ति गुरुमां ने भी इस सभा को संबोधित किया था।

‘अहो गुरुदेव’ पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी के 60वें वर्ष के शुभ पड़ाव को चिह्नित करता है और यह उत्सव भारत सहित विदेशों में भी आध्यात्मिक महोत्सवों, सेवा कार्यों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की वर्षभर चलने वाली श्रृंखला के रूप में जारी रहेगा।

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