
अगली-९८३ वीं रामकथा १-सितंबर से उडुपी(कर्णाटक) से प्रवाहित होगी।।
गाते और सुनते वक्त मिले सूत्रों में हम सावधान रहे।।
मैं पढ़ने,पढ़ाने नहीं,प्रसाद बांटने आया हुं।।
नामप्रसाद और हरिप्रसाद वितरित करने आया हुं।।
गुरु का प्रसाद पंच शिक्षा,पंच दीक्षा और पंच भिक्षा प्रदान करता है।।
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गुर प्रसाद सब जानिअ राजा
कहिअ न आपण जानि अकाजा
(बालकाण्ड-193/2)
मख रखवारी करि दुहुँ भाई
गुरु प्रसाद सब विद्या पाई
(बालकाण्ड-356/2)
सहित समाज तुम्हार हमारा
घर बन गुर प्रसाद रखवारा
(अयोध्याकांड-305/1)
इन बीज पंक्तियों को लेकर विश्व प्रसिध्ध हार्वर्ड युनिवर्सिटी-बोस्टन,अमरिका में चल रहा अनुष्ठान और पहली बार विदेश में तुलसी जयंति महोत्सव चल रहा है वहां आज आखिरी,नौवें दिन उपसंहारक बातें करते हुए युवान भाई-बहनों की पूरी फुलवारी की समझ और शालीनता भरी सेवा की बापू ने नोंध ली।यहां साक्षरों,कविओं,विवेचकों अपने क्षेत्र से सारस्वत आए सभी को नमन करते हुए यूनिवर्सिटी के सभी संचालक मैनेजमेंट में रहे सबको पूरे भारतवर्ष की ओर से धन्यवाद दिया।। क्योंकि यहां आदर दिया है तो हम प्रसन्नता लेकर विदा हो रहे हैं ऐसा बापू ने बताया।।
विराम के लिए एकत्रित है।कला में पंचदेव को याद करते हैं।कथा में कौन से पंचदेव है?बापू ने बताया हमें व्यास पीठ पर पांच वस्तु पर ध्यान रखना चाहिए:शब्द देवता,सूर देवता,स्वर देवता,लय के देवता और ताल देवता का ध्यान रखना चाहिये।।भूल का स्वीकार न करना सबसे बड़ी भूल है।।
गाते और सुनते वक्त मिले सूत्रों में हम सावधान रहे देह से और नेत्रों से प्रेम करते हैं तो वियोग लगेगा, लेकिन आत्मा से प्रेम करते हैं तो वियोग नहीं लगेगा ऐसा रूमी ने कहा है।।
बापू ने कहा विचारों का भी परिग्रह न करें।
मैं पढ़ने,पढ़ाने नहीं,प्रसाद बांटने आया हुं।नाम प्रसाद और हरिप्रसाद वितरित करने आया हुं।।आरंभ में गुरु प्रसाद जानकारी प्रदान करता है।मध्य में गुरु प्रसाद विद्या देता है और अंत में घर और वन में हमारी रक्षा करता है।।
गुरु का प्रसाद पांच प्रकार की शिक्षा,पांच दीक्षा और पांच प्रकार की भिक्षा देता है।यह पांच शिक्षा में विद्या,विनय,निपुणता,गुण और शील मिलता है। गुरु प्रसाद के रूप में पांच दीक्षा में शब्द दीक्षा,स्पर्श,रूप रस और गंध दीक्षा मिलती है।।पांच प्रकार की भिक्षा में गुरु अभय बनाता है।अभेद की भिक्षा देता है।अमन की भिक्षा,आश्रय देता है और अश्रु प्रदान करता है।।
जब युद्ध अनिवार्य हुआ तो राम और रावण के बीच भीषण युद्ध के बाद रावण को गति देकर पुष्पकारुढ होकर अयोध्या में प्रवेश किया। निज भवन मैं सबसे पहले कैकई से मिले।फिर सबको मिले।वशिष्ठ जी ने दिव्य सिंहासन मंगवाकर राम जी के विशाल भाल में राजतिलक किया और सिंहासन पर सिताराम जी की स्थापना करके विश्व को राम राज्य प्रदान किया चारों घाट पर चलती रामकथा के विराम के बाद इस छाया में चल रही रामकथा में सत्य,प्रेम और करुणा जो मानस का सार है वह दिखाकर तुलसी ने भी कथा का विराम किया।।
बापू ने मनोरथी पावन और पोपट परिवार एवं युनिवर्सिटी का आभार व्यक्त करते हुए रामकथा के अंत में विश्व शांति और विश्व विश्रांति के लिए पूरी रामकथा हार्वर्ड युनिवर्सिटी को समर्पित की।।
अगली-९८३ वीं रामकथा १ से ९ सितंबर के दरमियान उडुपी(कर्णाटक) से बहेगी।।नियमित नियत समय पर आस्था टीवी चेनल और चित्रकूटधाम तलगाजरडा यु-ट्युब चेनल से इस कथा का जीवंत प्रसारण होगा।।
== समाप्त ==

