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रेकिट द्वारा ‘नई माताओं और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की स्व-देखभाल’ कार्यक्रम के अंतर्गत भावनगर में वेक्टरजनित रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक अनूठी मूर्ति की स्था’पना की

विश्‍व मलेरिया दिवस 2025 के अवसर पर मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में स्थानीय समुदायों को मजबूत एवं सक्षम बनाने के लिए ‘हमारे साथ मलेरिया का खात्‍मा – पुनर्निवेश। पुनर्कल्पना। पुनर्जीवन।’ पर जोर देना।

गुजरात, भावनगर 30 अप्रैल 2025: विश्व मलेरिया दिवस 2025 के अवसर पर, विश्‍व की जानी-मानी उपभोक्‍ता स्‍वास्‍थ्‍य एवं स्‍वच्‍छता कंपनी, रेकिट ने गुजरात सरकार और जिला स्वास्थ्य विभाग, भावनगर के सहयोग से अपने ‘नई माताओं और पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्व-देखभाल’ कार्यक्रम के अंतर्गत से मलेरिया, डेंगू और अन्य वेक्टर जनित रोगों से लड़ने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। अपनी किस्‍म का पहली सार्वजनिक मूर्तिइस वर्ष के विश्व मलेरिया दिवस केविषय,“हमारे साथ मलेरिया का खात्‍मापुनर्निवेश। पुनर्कल्पना। पुनर्जीवन।को प्रमुखता से उजागर करती है। भारत के मशहूर मूर्तिकार डॉ. बिभूति अधिकारी ने इस मूर्ति को तैयार किया था, जिन्हें उनकी अभूतपूर्व रचना, विश्व की पहली इनोवेटिव रोलिंग पेंटिंग के लिए भी जाना जाता है।

हमारे साथ मलेरिया का खात्‍मा पुनर्निवेश। पुनर्कल्पना। पुनर्जीवन ‘’ विषय पर आधारित यह मूर्ति मलेरिया, डेंगू और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम में निवेश करने के लिए एक प्रेरित करेगी।  यह मूर्ति जलवायु परिवर्तन को ध्‍यान में रखकर 100% रिसाइकिल किए हुए और रिसाइकिल किए जाने योग्‍य चीजों बनाई गई है। इसका उद्देश्य गुजरात राज्य में समुदाय को जागरूकता संबंधी गतिविधियों के लिए अपना समय देने और 2030 तक भारत को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए देश के उद्देश्य के अनुरूप एक आंदोलन को फिर खड़ा करना है। रेकिट के तहत मोर्टिन ब्रांड द्वारा समर्थित, यह मूर्ति1957 से मोर्टिन की पहचान रही लूई द मॉस्किटो से प्रेरित बताई जाती है।

एमएस रॉड और स्क्रैप मेटल से तैयार की गई इस मूर्ति में खंभों पर टिकी तीन बड़े आकार के मच्छरों की आकृतियाँ हैं , जिसे सिट्रोनेला घास और मैरीगोल्ड फूलों से सजाया गया  है, ये दोनों ही प्राकृतिक रुप से मच्छर भगाने के लिए जाने जाते हैं। इसके डिज़ाइन में परिवर्तित होने वाली लाइटिंग लगाई गई है जो स्थानीय मलेरिया प्रवृत्तियों के  अनुसार बदलती रहती है: हरा रंग कम जोखिम को, नारंगी रंग चेतावनी को, और लाल रंग गंभीर खतरे की चेतावनी देता है। एक इंटीग्रेटेड एलईडी स्क्रीन मलेरिया पर “जानें, कार्यवाही करें और रोकथाम करें” के मुख्य संदेश लगाततार प्रदर्शित करती है क्योंकि मलेरिया के बारे में जागरूकता ही मलेरिया की रोकथाम है। यह फीचर स्पष्ट जानकारी देता है और मलेरिया की रोकथाम और नियंत्रण में जन भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।

यह मूर्ति भारत में सर तख्तसिंहजी अस्पताल और सरकारी मेडिकल कॉलेज, भावनगर में लगाई गई है। यह मूर्ति महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने के लिए दुनिया भर में स्थापित विभिन्न कला मूर्तियों से प्रेरित है, जिनमें न्यूयॉर्क शहर में वैश्विक जल संकट को दर्शाने वाली “द वॉटर टैंक प्रोजेक्ट” और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए पुर्तगाल में “द अम्ब्रेला प्रोजेक्ट”, आदि शामिल हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और जिला स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलरकर प्लान इंडिया द्वारा कार्यान्वित इस पहल का उद्देश्य समुदायों को जानकारी प्रदान करना और डेंगू और मलेरिया जैसे वेक्टर जनित रोगों को रोकने के लिए असरदार उपायों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस कार्यक्रम में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री, श्रीमती निमुबेन जयंतीभाई बांभानिया के साथ भावनगर नगर निगम (बीएमसी), भावनगर के महापौर श्री भरतभाई बराड, बीएमसी, भावनगर के नगर आयुक्त, आईएएस डॉ नरेंद्र कुमार मीना, बीएमसी, भावनगर के स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री राजूभाई रबाडिया, भावनगर के मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी
डॉ चंद्रमणि कुमार, जिला सरकारी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ चिन्मय शाह और प्रसिद्ध मूर्तिकार
डॉ विभूति अधिकारी ने भागीदारी की।

विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2024 के अनुसार, मलेरिया भारत में अभी भी एक महत्‍वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्‍या है, वर्ष 2023 में मलेरिया के 2 मिलियन मामले होने का अनुमान लगाया गया है। विश्व मलेरिया दिवस रोकथाम में निवेश करने, समुदायों और हमारी स्वास्थ्य व्‍यवस्‍था को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता की जोरदार वकालत करता है।हाल हीमेंअनावरणकी गई मच्छर की18-फुट ऊँची मूर्ति उम्‍मीद और कार्रवाई का एक शानदार नमूना है।

भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की माननीय राज्य मंत्री श्रीमती निमुबेन बंभानिया ने कहा, “विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर, मुझे सर तख्तसिंहजी जनरल अस्पताल और सरकारी मेडिकल कॉलेज, भावनगर में रेकिट और प्लान इंडिया के सहयोग से मच्छर की शानदार मूर्ति का अनावरण करते हुए  काफी खुशी हो रही है। यह शानदार मूर्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता की जरुरत पर बलजोर देती है। मैं ‘नई माताओं और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए स्व-देखभाल’ पहल और इस उद्देश्य को पूरा करने में जुटी सभी टीमों के प्रयासों के लिए उनकी सराहना करती हूँ।”

भावनगर नगर निगम (बीएमसी), भावनगर की स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री राजूभाई रबाडिया ने कहा, “विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर, भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की माननीय राज्य मंत्री श्रीमती निमुबेन बांभाणिया ने भावनगर नगर पालिका से सर तख्तसिंहजी जनरल अस्पताल और सरकारी मेडिकल कॉलेज में मच्छर की मूर्ति का अनवारण किया। भावनगर नगर पालिका की ओर से, मैं रेकिट और प्लान इंडिया द्वारा दी गई मूर्ति की स्थापना के लिए हार्दिक आभार और बधाई देता हूं। कार्यक्रम के दौरान, भावनगर नगर निगम के महापौर श्री भरतभाई बराड, श्रीमती निमुबेन बांभाणिया की टीम, प्लान इंडिया टीम और हम सभी मौजूद थे। यह मूर्ति न केवल अस्पताल परिसर की सुंदरता बढ़ाती है बल्कि जन जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस सराहनीय पहल में शामिल पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं।”

गौरव जैन, कार्यकारी उपाध्यक्ष रेकिटसाउथ एशिया के ने कहा, “रेकिट में, हमारा मानना है कि बदलाव की शुरुआत जमीनी स्तर पर लोगों को सशक्त बनाने से होतीहै। हमारे ‘नई माताओं और पाँच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्व-देखभाल’ कार्यक्रम के तहत हम परिवारों को मलेरिया से बचाव के बारे सही जानकारी और उपकरणों से लैस करने के लिए समुदाय की अगुवाई वाली कार्रवाई के साथ नवाचार को शामिल कर  रहे हैं। इस वर्ष के विश्व मलेरिया दिवस का विषय, “हमारे साथ मलेरिया का खात्‍मा पुनर्निवेश। पुनर्कल्पना। पुनर्जीवन ‘’ के अनुसार हमारे प्रयास रोकथाम, शिक्षा और सहयोग पर आधारित हैं। हम इस मिशन में सहयोग देने के लिए गुजरात सरकार का आभार व्‍यक्‍त करते हैं। आज उठाया हमारा हर  कदम  एक स्वस्थ, अधिक मजबूत भारत की नींव को ठोस करता है – और हमें 2047 तक विकसित भारत के विजन के  और करीब लाता है।”

हमारी यह पहल जमीनी स्तर पर शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा देकर मलेरिया उन्मूलन की दिशा में डब्ल्यूएचओ के वैश्विक प्रयासों में मदद करती है। इस कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (सीएचडब्ल्यू) द्वारा मलेरिया के लक्षणों और रोकथाम पर स्वास्थ्य शिक्षा के साथ-साथ जांच और निगरानी को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्वास्थ्य विभागों के साथ साझेदारी शामिल है। “मलेरिया सुरक्षा चक्र” और कस्टम-डिज़ाइन किए गए स्कूल किट जैसे अभिनव उपकरणों की मदद सेयह मुहिममच्छर जनित बीमारियों को रोकने में व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) की भूमिका पर बल देती है।

रेकिट की यह मूर्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य और सार्वजनिक कला के एक शानदार नमूने को  दर्शाती है,जो एक सार्वजनिक स्थान को शिक्षा, जुड़ाव और नवाचार के केंद्र में बदल देती है। यह केवल एक कला का नमूना भर नही है, बल्कि आशा की किरण  है – जो रचनात्मक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों में भावनगर के नेतृत्व को दर्शाने के साथ भारत और दुनिया भर में इसी तरह के प्रयासों को प्रेरित करता है।

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