जवानों!जब तक आप है भारत का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।।
युद्ध के समय पर शिबिर में रहने मिले तो भाला तो ना उठा सकूं,लेकिन माला लेकर बैठूंगा!
उपनिषद के चार सूत्र कश्मीर का स्वस्तिक है।।
सबबिधि साधु के नव लक्षण का गान हुआ।।
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भारत माता का सर ऊंचा उठाता जम्मू का बहूत बडा,ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर,मंगलवार प्रभात को ग्यारहवे दिन ‘मंगल’ पंक्तिओं का गान करते हुए कथागान शुरु हुआ।।बापु ने कहा अखंड भारत के महत्व के भूभाग में आए है।।
कल अमृतसर वाघा बॉर्डर पर राष्ट्र के गौरव,जुस्से का दर्शन किया,कहा कि गजब था।। पहले भी मैं गया हूं।परेड का दर्शन किया है।।लेकिन भारत दिने दिने नवं नवं होता जा रहा है।।
वाघा बॉर्डर से अमृतसर 20-25 किलोमीटर है। भारत जिस तरह जवानों को आधार देता है पूरा स्टेडियम हर रोज खचाखच भरा रहता है।।
वहां बीएसएफ के जवानों,स्थानीय प्रशासन,पुलिस इंचार्ज सतत हमारे साथ रहे।व्यास पीठ को बड़ा आदर दिया।।जिनके पैरों की एक चाल से भारत सलामत है।। जब तक आप है भारत का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।।युद्ध के समय पर शिबिर में रहने मिले तो भाला तो ना उठा सकूं,लेकिन माला लेकर बैठूंगा ऐसा मैंने फरीदकोट की कथा में कहा था वह बापू ने याद किया और कहा कि बड़ा गौरव अनुभव होता है।।
आज सब प्रकार की साधुता में पहला है-शांति।।
सब प्रकार का मतलब है सब,पूर्ण,पूर्णांक जो नव है वहां१-शांति:साधु अंदर से शांत होता है।समंदर ऊपर से तरंगीत है।आकाश और अवकाश में अंतर है।।आकाश सात है।।अवकाश सबका एक है।सात आकाश अवकाश के भीतर रहता है।।अवकाश ही आकाश की माता है।।भगवान विष्णु का स्वरूप शांत है।आकाश गरजता नहीं मेघ गर्जन करता है। साधु के हृदय को चिदाकाश कहा है।विष्णु शांत है विष्णु में वय,बल,गति,गुण सब बहुत है फिर भी शांत है।।विष्णु भरत रूपी साधु का अवतार है।। लक्ष्मीकांत है,कमल नयन है,लक्ष्मीपति है फिर भी शांत है।।सबके बीच रहते हुए असंग है,आसक्ति से मुक्त है।।
रामचरितमानस परम साध्वीय ग्रंथ है।।मानस सब बिधि साधु है।।
२-शक्ति:शांति है इसका मतलब कायर,भीरू, शक्तिहीन,डरपोक नहीं है।।बिना फने का बाण मारा हनुमान जी को गिरा दिए।।शांति ही साधु की शक्ति है।।कोई भी परिस्थिति जिसे डिस्टर्ब ना कर सके। ३-भक्ति:भजन बहुत होता है।।४-करतूति:हंस जैसी करतूति है।।५-विरक्ति:विरती से भरा होता है।।६-मस्ती:साधु में मस्ती होती है,उर्जावान होता है।।७-स्मृति:तेज स्मृति से भरा होता है।।८-कीर्ति:कीर्ति कायम बढती है।।९-मुक्ति:मुठ्ठी में मुक्ति भरी रहती है।।
मातृदेवो भव,पितृदेवो भव,आचार्य देवो भव,अतिथि देवो भव-उपनिषद के चार सूत्र कश्मीर का स्वस्तिक है।।स्वस्तिक का केन्द्र बिंदु उपनिषद है।।
सेतुबंध रामेश्वर के स्थापन तक की संक्षिप्त कथा का गान कर के आज की कथा महिषासुर मर्दिनी मॉं वैष्णोदेवी के चरणों में समर्पित हूइ।।
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शेष-विशेष
अब यह कथायात्रा और दुर्गम रास्तों से हिमालय की पहाडीयों से गुजरती २१ और २२ ऑक्टोबर अंतिम मुकाम केदारनाथ पहुंचेगी।।
बापु ने नादुरस्त तबियत और बडे-बूजर्गों से विवेक करते हुए तबियत को ध्यान में रखते हुए हो सके तो वहां तक आने का कष्ट न करने को कहा बै।।
दो दिन यात्रा के कारण कथायात्रा के अंतिम मुकाम केदारनाथ में २३ ऑक्टोबर को कथा गान करके मानस भारत स्वस्तिक यात्रा-१ का विराम होगा।।
कथा-विशेष
केदारनाथ:मानस भारत स्वस्तिक यात्रा-१ का आखिरी पडाव
भारत के उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में,गढ़वाल हिमालय पर्वत श्रृंखला में स्थित भगवान शिव का एक अति पवित्र हिंदू मंदिर और तीर्थस्थल है।।
समुद्र तल से लगभग ३५८३ मीटर (११७५५ फीट) की ऊंचाई पर मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है।
यह भगवान शिव के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है, उत्तराखंड के चार धाम में शामिल है,और पंच केदार में से भी एक है।
इस मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा माना जाता है और ८वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा इसका जीर्णोद्धार किया गया था।
यह मंदिर कत्युरी शैली में बड़े भूरे रंग के पत्थरों की इंटरलॉकिंग शिलाओं से बिना सीमेंट के बनाया गया है।
भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के कारण यह मंदिर हर साल अप्रैल/मई से लेकर नवंबर (भाई दूज तक) तक श्रद्धालुओं के लिए खुलता है।
सर्दियों में भगवान की उत्सव डोली को उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में ले जाया जाता है।
यहां की मुख्य यात्रा गौरीकुंड से लगभग १८ किलोमीटर के पैदल ट्रैक से शुरू होती है। इसके अलावा गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी से हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है।
मंदिर के पीछे आदि शंकराचार्य की समाधि और भीमशिला स्थित है,जिसने २०१३ की आपदा के दौरान मंदिर की रक्षा की थी।
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