Homeगुजरातगुरु चरण रज आश्रित के मन का मैल को हरती है।

गुरु चरण रज आश्रित के मन का मैल को हरती है।

गुरु आश्रित के लिए रज का बहुत महत्व है।।

राम को गाना सत्य को गाना,प्रेम को गाना है,राम को गाना करुणा को गेय करना है।।

भजन पुरुष की दो आंखें तेज और भेज है।।

वेदकालीनभुजिया पर्वत की गोद में बसे माधापर में चैत्र ववरात्र के अनुष्ठान सम रामकथा के दूसरे दिन के आरंभ में बताया कि हमने जो तीन पंक्तियों उठाई है इसमें मुकुल शब्द की रचना का एक ही अर्थ होता है:दर्पण।।यह गुरु वंदना की पंक्ति हमें कहती है कि गुरु चरण रज आश्रित के मन का मैल को हरती है।। यहां जन का अर्थ बताते हुए बापू ने कहा कि जन का का मतलब जन भी है। परमात्मा का निज जन महदजन, महाजन। एक अर्थ है भक्तजन, सेवक, दास,किंकर,आश्रित जो ऐसे जन आश्रित है उनके मन का दर्पण सुंदर है।।

उसी के मैल को गुरु के चरण की रज दूर करती है।। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि इतने सुंदर दर्पण पर मेल कहां से आए?

तो चार प्रकार के मैल है:हमारे अंदर रहे अहंकार का मेल।होना ना चाहिए और किसी में एसा स्पर्धात्मक मानसिकता।हम ही सुंदर है बाकी सब असुंदर है और सुंदरता के परदे के पीछे छुपा हुआ दोष।। जो गुरु हरता है।।उसे यह सब कुछ वहीं रोक देता है इसीलिए गुरु आश्रित के लिए रज का बहुत महत्व है भरत का समर्पण और लक्ष्मण के समर्पण में फर्क है भरत ने सोचा कि राम कभी अपराध कर सकते हैं? और कैकई का मुदित मन भी कहता है।। कैकई प्रशंसनीय है कि नींदनीय? अभी भी चर्चा का विषय है।। लेकिन वह सोचती है कि जिनका नाम तारक महामंत्र है वह कोई अपराध कैसे कर सकता है? कैकई के मन का मुकर सुंदर है।।

दूसरी तरफ बापू ने कहा कि हमें किसी का अपराध न दिखे तो समझना कि हमारा मन मल मुक्त हो गया है।। कृष्ण का चरित्र धीरललित है और राम चरित्र धीरे उदात है।। राम को गाना सत्य को गाना है।। राम को गाना प्रेम को गाना है और राम को गाना करुणा को गेय करना है।।

भजन पुरुष की दो आंखें तेज और भेज है।। दो ही विद्या हमें दिखती है परा और अपेरा।।

आठ प्रकार के दर्पण है: मानस दर्पण, हृदय दर्पण, मन दर्पण,अपना चेहरे का दर्पण,आंख दर्पण,जल दर्पण,काया दर्पण और जगत दर्पण।।

कच्छ उपाधि से मुक्त समाधियों का प्रदेश है।।

फिर राम नाम वंदना के प्रकरण में कहा गया की राम नाम भी है। राम मंत्र है। महामंत्र है। परम मंत्र है गोप्य मंत्र है। उदार मंत्र है। तारक मंत्र है। शांति देने वाला मंत्र है।हमको आराम और विश्राम देने वाला है तुलसी जी ने 72 पंक्तियों में राम नाम का महिमा गान किया है।उनका गान करते हुए बापू ने कहा कि सबसे अच्छा नाम राम का है।।लेकिन राम इतना छोटा नहीं है।आपके लिए कोई भी नाम अनुकूल पड़े वो नाम का जाप कीजिए।।

आखिर में राम नाम ही काम आएगा।।

फिर कथा के चार घाट की भूमिका को दिखाकर आज की कथा को विराम दिया गया।।

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