
“कच्छ की महिमावंत भूमि पर कथा गाने का अवसर मिला उनकी पांच प्रसन्नता है”
दुनिया के रिचेस्ट गांव माधापर में 25 करोड़ के खर्च से रामजी मंदिर का नवनिर्माण होमे जा रहा है-वो प्रसन्नता है।।
कच्छ के प्रति मेरा पक्षपात मेरा प्रेमपात है।।
राम चरित मानस खुद एक दर्पण है।।
हमने प्रतिबिंब ही देखे हैं बींब देखा ही नहीं है।।
पीरारी,विरारी और धीरारी कच्छ की धरा अपने में अनगिनत आध्यात्मिक,ऐतिहासिक और विशेष खूश्बूओं से भरी है।।बापु का भी कत्छ की मीट्टी से विशेष हेत रहा है।।अब तक बापु ने ३५ कथाओं का इन पवित्र पौराणिक मीट्टी से भरी धरा पर कथा गान किया है।।ये कच्छ की ३६वीं और कथा क्रमांक की ९७४वीं कथा का मंगलाचरण हुआ।।
कथा आरंभ पर ये माधापर गॉंव जहां भारत-पाक युध्ध के समय यहां की महिलाओं ने केवल एक रात में रन वे तैयार किया था वो सब महिलाओं के हस्तों और संतो महंतो 1008 कबीर रवि भाण संप्रदाय विरानी मोटी से शांति दास बापू,महामंडलेश्वर मुलजी राजा कापडी,दिलीप राजा कापड़ी पूंजल दादा अखाड़ा,कल्याण दास जी बापू हरि साहेब आश्रम-मोरझर,स्वामी प्रदीपानंद बापू आर्ष केंद्र माधापुर और शिवराम बापू कबीर आश्रम मोरबी, भुज के विधायक केशुभाइ पटेल और निमित्त मात्र मनोरथी डबासिया परिवार की ओर से भी दीप प्रागट्य एवं स्वागत किया गया।।
जन मन मंजु मुकुर मल हरनि।
किए तिलक गुन गन बस करनि।।
अग्य अकोबिद अंध अपात्री।
काइ बिषय मुकुर मन लागी।।
मुकुर मलिन अरु नयन बिहिना।
राम रुप देखहि किमी दीना।।
इन बीज पंक्तियों और कथा बीज के बारे में बताते हुए बापु ने कच्छ की महिमावंत भूमि पर कथा गाने का अवसर मिला उनकी पांच प्रसन्नता बताते हुए कहा की पहली प्रसन्नता यह है:जिन भूमि में भारत पाक युद्ध दरमियां बहनों बेटियों ने एक ही रात में रन-वे बना दिया इसी वंदनीय भूमि पर कथा गान हो रहा है।। दूसरी प्रसन्नता,वर्षों से रामचरितमानस का गान और पाठ,करीब -करीब 100 सालों से भी गान हो रहा है।।बीज किसी और ने बोया है,मैंने 35 कथा करके हृदय रक्त से सिंचने का काम किया है,और यहां अवसर मिला।।तीसरा है चैत्र नवरात्र चल रहे हैं और कथा गान हो रहा है। हिंदू धर्म के नए साल का पहला आरंभ आज से हो रहा है।।चौथी प्रसन्नता सालों से अबोल रह कर जिन परिवार की चौथी पीढी कथा गान करवा रही है।और पांचवी प्रसन्नता यह है माधापर गांव दुनिया का रिचेस्ट गांव है लेकिन वह नहीं फिर भी 25 करोड़ के खर्चे से माधापर में रामजी मंदिर का नवनिर्माण होमे जा रहा है।।
बापू ने कहा कि कच्छ के हर एक गांव में राम,कृष्ण शिव-दुर्गा,हनुमान गणपति आदि के मंदिर होने चाहिए और राम जन्म रामनवमी,जन्माष्टमी, शिवरात्रि पर शोभायात्रा भी निकालनी चाहिए।। कच्छ के प्रति मेरा पक्षपात है। लेकिन साधु को सब समान है कच्छ के प्रति मेरा पक्षपात मेरा प्रेमपात है यहां अनेक देवस्थान, मंदिर,मठ,संतो,संत वाणी, और कलाकारों की यह भूमि है।।
कथा बीज में मुकुर शब्द के बारे में बापू ने कहा कि मुकुर का मतलब दर्पण,आईना होता है।। रामचरितमानस में आठ बार मुकुर शब्द का प्रयोग हुआ है इसलिए इस कथा का विषय मुकुराष्टक चुना है।। जैसे हम मधुराष्टक का गान करते हैं।।
वितरागी आदमी भी तिलक करते समय एक बार आईने में देखता होगा।।
कहां-कहां मुकुर शब्द लिखा है वह भी आए दिन हम बात करेंगे ।।
राम चरित चरितमानस खुद एक दर्पण है।। यदि हमारी आंख में खराबी ना हो और दर्शन का भाव हो तो हम अपने आप को रामचरितमानस में दिख सकते हैं।। लेकिन हमने प्रतिबिंब ही देखे हैं बींब देखे ही नहीं है।।
गुर्जयेफ या सोक्रेटीस की सुभाष भट्ट ने कहीं बात करते हुए बापू ने कहा कि एक महात्मा के पास युवक आया और कहा कि मुझे आपसे दीक्षा लेनी है चलकर दोनों तालाब के किनारे पहुंचे।। गुरु जी ने युवान को कहा कि जल में क्या दिखता है? युवा ने कहा कि प्रतिबिंब दिखता है।। तब महात्मा ने कहा कि तुं नापास हुआ है।। यदि तुझे मछली दिखती तो पास होता।।
बापू ने कहा कि मैं होता तो यह कहता की मछली की आंख,आंख में भी मछली की नजर और यह नजर की असर कितनी है वह दिखता तो मैं पास करता!
भगवद कथा बिंब खोजने की बात है।।
वैसे रामनचरित मानस हम अलग तरीके से लिखे तो नीचे मानस यह मानस का चरित्र राम की ओर हमें खींचता है।। यानी कि मानस मानुस यह प्रथम सीढ़ी है।।
18 वक्ताओं ने रामायण कहकर भी इसे गाया है।। बापू ने आज की स्थिति के बारे में बताया कि जैसे किसी फोन में सिम कार्ड रखते हैं, न जाने कौन मनुष्य रूपी फोन में सिम कार्ड रख गया है कि युद्ध ही युद्ध चल रहे हैं! और गुजराती में जैसे कहावत है कि किसी पागल के ऊपर गगरी रखते हैं! यानी कि गांडी माथे बेडूं! ऐसी हालत हो गई है।।
फिर ग्रंथ परिचय देते हुए रामचरितमानस के सात सोपान। पहले सोपान के सात मंत्र और यह मंत्र में पहली वंदना और फिर सोरठा में वंदना प्रकरण में विद विध प्रकार की पंच देवों की वंदनाओं को समझाते हुए बापू ने कहा की गुरु वंदना करते हैं तो लगता है जो भटकावे वह नहीं लेकिन जो हमें कहीं जाकर अटाकावे-रोके,वो गुरु है।।
गुरु वंदना का गान कर के हनुमंत वंदना तक कथा को लेकर आज विराम दिया गया।।

