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पूरे भारत को ग्रीन भारत बनाने हेतु घाटकोपर-मुंबइ से ९६७वीं रामकथा का शुभारंभ।।

दो पवित्र हेतुओं के लिये घाटकोपर से रामकथा का आरंभ हुआ।।

राष्ट्रगान वंदेमातरम् की देढ सदी के अवसर पर होगी मातृपंचक की वंदना।।

तलगाजरडा के हनुमान जी के तुलसी पत्र के प्रसादी के रूप में 5 लाख रुपए की राशि में अर्पण हूइ।।

घाटकोपर घटकोपर है।।

दुनिया के बहुत प्रसिद्ध राष्ट्रगान में वंदे मातरम प्रथम पंक्ति में है।।

प्रयोग जीव करें योग इश्वर करें।।

निराधार निसंतान बीमार बुजुर्गों को आजीवन निशुल्क आश्रय दे रहे,विश्व के सबसे बड़े वृद्धाश्रम विनुभाई बचुभाई नाग्रेचा भवन ‘सद्भावना वृद्धाश्रम’ राजकोट की सहायता हेतु,एवं पूरे भारत में सद्भावना वृद्धाश्रम के द्वारा 151 करोड़ वृक्षों का रोपण और देखभाल के साथ संपूर्ण भारत को ग्रीन भारत बनाने हेतु, बापू द्वारा आज ‘मानस वंदे मातरम’ रामकथा आचार्य अत्रे मैदान, पंतनगर घाटकोपर(पूर्व)-मुंबई पूर्व से आरंभ हुआ।।

यह कथा के निमित मात्र मनोरथी घाटकोपर मुंबई के विधायक पराग भाई किशोर भाई शाह परिवार लाभ ले रहा है।।

आरंभ में राजकोट स्थित सद्भावना वृध्धाश्रम को १०८ करोड का मातबर दान मिलनेवाला है वो विनुभाइ बचुभाइ नागेचा के साथ विधायक परागभाइ शाह,किरीटभाइ सोमैया,मनोज कोटक,मिहिर कोटेचा,रमेशभाइ सचदेव,मितल खेताणी के हस्तों से दीप प्रागट्य हुआा

परागभाइ ने अपना शब्द भाव रख्खा।।

पारबति भल अवसर जानी।

गइ संभु पहिं मातु भवानी।।

-बालकॉंड

इन बीज पंक्तियों का गान कर के इस कथा के बीज और हेतु की बात बताते हुए बापु ने बताया कि परमात्मा की अहेतु अनंत कृपा से यहां कथा का आरंभ हुआ तब आनंद और प्रसन्नता। यह कथा बहुत समय पहले होनी थी लेकिन बीच में कोरोना आ गया।।आज ही योग रहा होगा।।मुनि नम्र मुनि महाराज के आशीर्वाद की छाया में पराग भाई परिवार मनोरथी है और दूसरा वृक्षों और वृद्धो के लिए राजकोट का वृद्धाश्रम जहां विजय भाई, मित्तल भाइ की टीम का बहुत बड़ा मनोरथ है 151 करोड़ वृक्ष बोने हैं और पराग भाई का मनोरथ है कि जैसे सावरकुंडला,राजुला और टिंबी में बिल्कुल नि:शुल्क हॉस्पिटल चल रही है वैसी जूनागढ़ में भी आरंभ करने का है पवित्र हेतु है।। दो पवित्र कारण है।।

बापू ने बताया कि मैं कभी अपील नहीं करता लेकिन पवित्र हेतु के लिए विनय जरूर करता हूं और विनय करने से पहले चित्रकूट धाम तलगाजरडा के हनुमान जी के तुलसी पत्र के प्रसादी के रूप में 5 लाख रुपए की राशि में अर्पण करता हूं और सबको परमात्मा प्रेरित करें इतनी राशि यहां यह पवित्र हेतु के लिए अर्पण करें।।

पराग भाई धारा सभ्य के बदले ‘मारा सभ्य’ लग रहा है क्योंकि परिवार के संस्कारों से मुझे नाता है जो गहन संस्कार है।।घाटकोपर घटकोपर है।

और बंकिम चंद्र बंकिम बाबू ने १८८२ में आनंद मठ नवल कथा में वंदे मातरम लिखा 150 साल हो रहे हैं और अनुष्ठान के लिए मुझे बोलना है।।

मनोरथ बहुत बड़ा है लेकिन शुद्ध स्वभाव के कारण यह विनय है।।

बंकिम बाबू का यह गान जो बहुत लंबा है और आखिरी पदों में मां दुर्गा की स्तुति है संस्कृत और बंगाली में है।।लेकिन तथा कथित राजनीति ने बहुत काट छांट कर दी है।।

दुनिया के बहुत प्रसिद्ध राष्ट्रगान में वंदे मातरम प्रथम पंक्ति में है।।

हमारी संस्कृति संस्कार और सभ्यता में एक मातृ पंचक है जिसमें पांच माता को वंदन करना सिखाया है एक है जगदंबा, पराम्बा। पूरा देवी भागवत उनके वर्णन के लिए है।। कोई स्वीकार करें ना करें जगदंबा पूरे विश्व की मां है।। दूसरी माता हमारी पृथ्वी।। तीसरी मॉं है भारत माता। चौथी जन्मभूमि और पांचवी हमें जन्म देने वाली हमारी जन्मदाता।। रामचरितमानस का आरंभ मातृ वंदना से ही हो रहा है।। प्रयोग जीव करें योग इश्वर करें।। ईश्वर नहीं है ऐसा भरोसा नास्तिकों में है ईश्वर है ऐसा भरोसा आस्तिको में है लेकिन भरोसा दोनों जगह है।।

फिर ग्रंथ माहात्म्य ग्रंथ परिचय में सात कांड और प्रथम कांड के आरंभ में सात मंत्र और मातृ वंदना और बाद में चौपाइयों और वंदना प्रकरण का गान सुनाते हुए गुरु वंदना और आखिर में हनुमंत वंदना के बाद आज की कथा को विराम दिया गया।।

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