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गोदरेज की डिज़ाइन यात्रा पर एक नई नजर : अहमदाबाद में ‘शेपिंग ड्रीम्स, डिज़ाइनिंग लाइव्स’ कैटलॉग लॉन्च

इंटरनेशनल आर्काइव्स डे पर सीईपीटी यूनिवर्सिटी में गोदरेज की 128 साल की विरासत को समेटती विशेष प्रदर्शनी, स्टील अलमारी, कुर्सी और फ्रिज के जरिये आधुनिक भारतीय जीवनशैली के बदलते सपनों की कहानी 

गुजरात, अहमदाबाद 9 जून 2025: इंटरनेशनल आर्काइव्स डे के मौके पर, गोदरेज एंटरप्राइजेज आर्काइव्स ने अहमदाबाद स्थित सेप्ट यूनिवर्सिटी में अपनी चर्चित प्रदर्शनी ‘शेपिंग ड्रीम्स, डिज़ाइनिंग लाइव्स: अ गोदरेज स्टोरी’ का आधिकारिक कैटलॉग जारी किया। इस खास मौके पर गोदरेज आर्काइव्स काउंसिल की चेयरपर्सन डॉ. फिरोज़ा जे. गोदरेज ने कैटलॉग का अनावरण किया।

कैटलॉग में गोदरेज के तीन प्रतिष्ठित उत्पादों — स्टील अलमारी, कुर्सी और रेफ्रिजरेटर — की विरासत को रेखांकित किया गया है। ये उत्पाद भारतीय मध्यवर्गीय जीवनशैली की पहचान बन चुके हैं और आधुनिकता के प्रतीक माने जाते हैं। ये सिर्फ उपयोगी वस्तुएं नहीं, बल्कि देश में सामाजिक और आर्थिक बदलावों के अहम गवाह भी रहे हैं।

यह कैटलॉग शोधकर्ताओं, डिज़ाइन पेशेवरों, इतिहासकारों और भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में तैयार किया गया है। यह रोजमर्रा के जीवन और डिज़ाइन के बीच के गहरे रिश्तों को समझने का अनूठा दृष्टिकोण देता है। यह कैटलॉग सेप्ट यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद में ₹1500/- में उपलब्ध है। इसकी प्रतियां खरीदने के लिए archives@godrej.com पर संपर्क किया जा सकता है।

कैटलॉग के विमोचन के बाद एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें यह समझने की कोशिश की गई कि यह कैटलॉग डिज़ाइन विरासत को किस तरह संजोता है और उसे आज के दौर से कैसे जोड़ता है। इस चर्चा में प्रो. एबिगेल मैकगोवन (यूनिवर्सिटी ऑफ वर्मॉन्ट), डिज़ाइनर और हैनो की संस्थापक सरिता सुंदर, और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन, अहमदाबाद की सीनियर फैकल्टी तनिष्का काचरू शामिल रहीं। चर्चा का संचालन आर्किटेक्ट और सेप्ट आर्काइव्स की आर्किविस्ट समन कुरैशी ने किया।

पैनल ने कहा कि यह कैटलॉग सिर्फ बीते समय का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे पुराने डिज़ाइन आज भी हमारे जीवन और सोच का हिस्सा बने हुए हैं।

यह प्रदर्शनी, जिसके लिए यह कैटलॉग तैयार किया गया है, को डिज़ाइन इतिहासकार और शिक्षक दीपाली श्रीवास्तव ने क्यूरेट किया है और डिज़ाइन का कार्य नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन (एनआईडी) की पूर्व छात्रा धारिणी पाध ने किया है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 12 मई 2025 को हुआ था और यह 13 जुलाई तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। इसे अहमदाबाद स्थित सीईपीटी यूनिवर्सिटी की लीलावती लालभाई लाइब्रेरी में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक देखा जा सकता है।

प्रदर्शनी में गोदरेज एंटरप्राइज़ेज़ आर्काइव्स के संग्रह से चुनी गई कई दिलचस्प वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं — जैसे पुराने विज्ञापन, प्रोडक्ट कैटलॉग, पत्राचार और व्यक्तिगत कहानियां। ये सभी मिलकर यह कहानी बयां करते हैं कि किस तरह बीते 128 वर्षों में गोदरेज ने भारतीय घरों की आकांक्षाओं और जीवनशैली को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गोदरेज एंटरप्राइज़ेज़ आर्काइव्स की प्रमुख वृंदा पाठारे ने कहा, “आर्काइव्स हमारे साझा इतिहास की अमूल्य धरोहर के संरक्षक होते हैं। यह कैटलॉग तीन आइकॉनिक उत्पादों — स्टील अलमारी, कुर्सी और फ्रिज — के जरिए गोदरेज की 128 वर्षों की नवाचार और डिज़ाइन यात्रा को सामने लाता है। इंटरनेशनल आर्काइव्स डे के इस अवसर पर हम यह मानते हैं कि आर्काइव्स न केवल अतीत को सहेजते हैं, बल्कि आने वाले समय के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं। हमें सीईपीटी यूनिवर्सिटी के साथ इस खास प्रदर्शनी में साझेदारी कर बेहद खुशी हो रही है।”

सीईपीटी यूनिवर्सिटी के प्रोवोस्ट डॉ. त्रिदीप सुहृद ने कहा, “यह कैटलॉग डिज़ाइन, नवाचार और भारत के रोजमर्रा के जीवन की एक सदी से भी लंबी कहानी को गोदरेज आर्काइव्स के नजरिये से पेश करता है। इसमें संग्रहित तस्वीरें, इमर्सिव टाइमलाइन और इंटरैक्टिव डायरामा के ज़रिए यह दिखाया गया है कि किस तरह गोदरेज ने आधुनिक भारतीय जीवनशैली और बदलती आकांक्षाओं को आकार दिया है। सीईपीटी यूनिवर्सिटी में डिज़ाइन हमारे शिक्षा दर्शन का अहम हिस्सा है और हम मानते हैं कि आर्काइव्स केवल अतीत को सहेजने का माध्यम नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के डिज़ाइनरों, वास्तुकारों और विचारकों के लिए सीख और प्रेरणा का स्रोत भी हैं। हमें इस सार्थक प्रदर्शनी में गोदरेज आर्काइव्स के साथ साझेदारी कर गर्व हो रहा है।”

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