
अपनी विद्या जब किसी बुद्धपुरुष के पास पेश होती है तो वह साधुता में नहाती है।।
कथा ही हमारी कंठी है,कथा ही हमारी जनेउ है,कथा हमारी मुद्रा है।।
जो क्षमा मांगे वह वीर है जो क्षमा दे वह महावीर है।।
तुझे क्षमा मांगने की जरूरत नहीं और मैं क्षमा देने वाला कौन?-ऐसा माने वह परमवीर है।।
वाणी का नियंत्रण वैराग्य का लक्षण है।।
हमारे जीवन में आते विघ्नों को हटाए वह बैरागी है।।
पोलैंड में चल रही राम कथा के पांचवें दिन बापू ने हर रोज सायंकाल जो प्रेम सभा होती है उनके बारे में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि छांदोग्य उपनिषद में लिखा है कि अपनी विद्या जब किसी बुद्धपुरुष के पास पेश होती है तो वह साधुता में नहाती है।।
गौतम ऋषि के पास सत्य काम विद्या प्राप्ति के लिए जाता है।अद्भुत प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कोई भारतीय ही ऐसा कर सकता है।तब गौतम ने पूछा कि तुम्हारा गोत्र क्या है?दौड़कर सत्य काम अपनी मां जाबाली के पास जाकर पूछता है हमारा गोत्र क्या है? मां ने कहा तू मेरा बेटा है, गुरु को कह दे हमारा गोत्र सत्य काम जाबाल है। पीछे मेरा नाम लगा दे! मां का गर्भ ही हमारा नहीं मां हमारा गोत्र भी बन जाती है।।जाकर गुरु से कहा तो गौतम ऋषि ने कहा कि तेरे चेहरे की प्रसन्नता और तेरा तेज देखकर मैं कह सकता हूं कि ब्राह्मणेत्र कोई ऐसा जवाब दे नहीं सकता! यज्ञोपवित दिया,ना मंत्र दिया,न उपदेस दिया और इतना ही कहा कि यह 400 गायें हैं वह ले जाओ और 1000 हो जाए तब लौटना।। तेरे शब्दों में सत्य है लेकिन इतनी बात भी पूछी कि तूने कहां से विद्या पाई है? सत्य काम ने कहा कि पहले देवताओं से विद्या पाई।।उर्ध्व लोक से सरस्वती से पाइ।सदग्रंथ से,महापुरुषों की दृष्टि से स्पर्श से और आचार्य से पाई है।।गौतम ने पूछा तो तो फिर मेरे पास क्यों आया! तब सत्य काम कहता है किसी बुद्धपुरुष के पास जाने से विद्या में साधुता आती है।।
बापू ने कहा कथा ही हमारी कंठी है,कथा ही हमारी जनेउ है,कथा हमारी मुद्रा है।।
आज के दिन जो क्षमा मांगे वह वीर है जो क्षमा दे वह महावीर है।।बापू ने कहा कि संवत्सरी पर मैं भी कहूं कि तुझे क्षमा मांगने की जरूरत नहीं और मैं क्षमा देने वाला कौन? ऐसा माने वह परमवीर है।। बापू ने कहा कि आज गणेश चतुर्थी है। गणेश बैरागी है।।गनों के इश है। प्रथम पूज्य है।त्रिभुवन पूज्य है।।इतने बड़े लेकिन वाहन बिल्कुल छोटा चूहा वैराग्य का प्रतीक है।। गणपति को तिनका- दूर्वा समर्पित करते हैं। दुर्वा का रस पीने से डायबिटीज कम होता है, गणेश मोदक प्रिय है, ऐसा भी कहा जाता है।। गणेश को तृण अर्पण किए जाते हैं इसका मतलब है तृण सम सिद्धि तीन त्यागी।। गणेश जी कभी क्रोध नहीं करते।।रिद्धि सिद्धि हे,लोभी नहीं है। गणेश विवक्तदेशसेवी एकांत स्थान में बैठने वाला जो वैराग्य का लक्षण है।।वाणी, मन और शरीर तीनों को स्थिर करके बैठना वैराग्य का लक्षण है।। जिनके मां-बाप श्रद्धा और विश्वास हो वह बैरागी ही होगा।। गीता कहती है वाणी का नियंत्रण वैराग्य का लक्षण है।। हमारे जीवन में आते विघ्नों को हटाए वह बैरागी है।।
और आज संवत्सरीहै।महावीर स्वामी को याद करते हुए बापू ने कहा कि महावीर के जैसे बैरागी कोन! ओशो कहते थे कि महावीर स्वामी ने कपड़े छोड़े नहीं लेकिन सहजता से छूट गए हैं।।
गुजरात के फूलछाब अखबार के पूर्व तंत्री कौशिक भाई मेहता ने एक कविता लिखकर भेजी और बापू ने वह कविता बैरागी राग में कंपोजकरी।।
बापू ने कहा हाथ से छूटे वह त्याग और हार्ट से छूटे वह वैराग्य है।। जहां वैराग्य आया वहां सन्यास होगा ही,वह किसी भी कपड़े में हो।
उत्तराकॉंड का एक दृश्य जहां पार्वती शंकर से पूछती है कागभुसुंडि के बारे में तो पूरी चौपाई और पंक्तियों का गान करके बापू ने कहा की शिवजी पार्वती से कहते हैं कोटि-कोटि विरक्तों में कोई एक जीवन मुक्त होता है।।
राम जी के जन्म के बाद चारों भाइयों के नामकरण संस्करण हुए। फिर यज्ञोपवित संस्कार और विद्या संस्कार हुए।। बाद में विश्वामित्र के साथ राम लक्ष्मण जाते हैं। रास्ते में ताड़का का वध किया। अहल्या उद्धार की कथा करते हुए संक्षिप्त में धनुष्य भंग और परशुराम का प्रसंग कहकर कन्या विदाई का गान किया और बारात 1 महीने तक रुकी।। बाद में अयोध्या गई और अयोध्या से विश्वामित्र ने विदाई ली और बालकांड का समापन हुआ।।
आज की कथा को सीताराम जी के विवाह के उपलक्ष में सीताराम जी के चरणों में अर्पण करके कथा को विराम दिया गया।।

