
*तलगाजरडी भावारण में गोपनाथ की भूमि बनेगी रस और रास भूमि।।*
*पद वाक्य के लिए साक्षात्कार के लिए नरसिंह का महिमा है,चमत्कार के लिए नहीं है।।*
*नरसिंह मेहता ने गोपनाथ और गोपीनाथ दोनों को पाया वह यह भूमि है।।*
*इस जगत में संघर्ष की नहीं किसी के संस्पर्श की जरूरत है।।*
*बुद्धि की आंखों से नहीं दिखता,बुद्ध की आंख से देखना चाहिए।।*
*कथा बीज पंक्तियां:*
*बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी।*
*त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी।।*
*नाथ कृपॉं अब गयउं बिषादा।*
*सुखी भयउं प्रभु चरन प्रसादा।।*
*-बालकॉंड*
आध्यात्मिक चेतना के स्वर्णपृष्ठ और कविता के उन्नत शिखर रूप नरसिंह मेहता कि ये भूमि,जहां कवि कान्त को शब्द साक्षात्कार हुआ और ‘सागर और शशि’ की रचना की।।
बापू ने आयोजन वक्त कहा था कि यहां के मुख्य यजमान नरसिंह मेहता खुद है और निमित्त मात्र यजमान रमानाथ जी बाजोरिया जी,शुभोदय और अभ्युदय बाजोरिया परिवार है।।
कथा के आरंभ में ब्रह्मचारिणी आश्रम के गादी पति सीताराम बापू,महंत श्री जगह के गादीपति आत्मानंद सरस्वती जी,नेक नामदार ऑफ महारानी साहिबा ऑफ भावनगर संयुक्ता कुमारी जी,छोटी कुमारी जी,नायब कलेक्टर जयदीप सिंह जी के हस्तों दीप प्रागट्य हुआ।।
सीताराम बापू ने अपने शब्द भाव रखते हुए कहा की 1992 में जब स्मारक का ट्रस्ट बन रहा था वह विचार अब सार्थक हो रहे हैं और 594 वर्ष में दोबारा नरसिंह मेहता रासलीला और अब रामकथा को लेकर बापू के रूप में आ रहे हैं।।सोमनाथ और गोपनाथ में हरि-हर है।।
आत्मानंद बापू ने भी अपना शब्द भाव रखा। यहां रामकृष्ण और शिव की मानों त्रिवेणी बन रही है।।
कथा का आरंभ करते हुए बापू ने कहा भगवान, ईश्वर,परमात्मा,इश,ब्रह्म,परब्रह्म ऐसे गोपनाथ की कृपा से आज हम नरसिंह मेहता की साक्षात्कार की भूमि पर रामकथा करने जा रहे हैं।।
यहां की प्रगट-अप्रगट चेतनाओं को प्रणाम करके बापू ने कहा कि यहां के संत महंत सबको साधुवाद भाव नगर राजवी परिवार की सद्भाव पूर्वक सहयोग भावनगर ठाकोर भावसिंह जी कांत और ब.क. ठाकोर सबको शरद पूर्णिमा पर इकट्ठे करते थे।। पूण्य श्लोक राजवी कृष्ण कुमार सिंह जी का दर्शन मैंने खुद भी किया है।।
गोपनाथ के कथा का मनोरथ इसीलिए भी हुआ कि मैं जब बहुत छोटा सा आठ साल का था तो दर्शन करने के लिए आया।उस वक्त के दरिया के पास ही एक सिद्ध महात्मा बैठते थे उनके दर्शन किए और मन में एक भाव उठा था कि कभी गाने का अवसर मिले।।उसी भाव इस मनोरथ को दिवंगत रमाशंकर बाजोरिया जी जो वृंदावन से जाकर कैलाश वासी हुए और छोटा बेटा सुबोधय चित्रकूट से कैलाश गए और माता पद्मा जी,मीना,नवमी और अभ्युदय का यह संकल्प मनोरथ सिद्ध हुआ है।।
आज जलाराम बापा का परिवार,भरत भाई परिवार यहां पर चिमन भाई सबको सहकार के बदले बापू ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।।
बापू ने कहा कि यहां के कवि जवाहर बख्शी ने लिखा है कि पद वाक्य के लिए साक्षात्कार के लिए नरसिंह का महिमा है,चमत्कार के लिए नहीं है।। नरसिंह मेहता ने गोपनाथ और गोपीनाथ दोनों को पाया वह यह भूमि है।।लेकिन विद्वान लोग चमत्कार को नहीं स्वीकार करते।। नरसिंह मेहता खुद लिखते हैं कि मेरा जन्म यहां तलाजा में हुआ है।।
अनेक जन्मों के बाद भगवत प्राप्ति होती है नरसिंह को इस भूमि में सात दिन में हरि और हर की प्राप्ति हुई।।
बहुत साल पहले नरसिंह मेहता की व्याख्यान माला चलती थी।।बीच में बंद हुई फिर रुपायतन संस्था के हेमंत नाणावटी ने फिर शुरू की और नरसिंह मेहता की व्याख्यान माला में सबसे पहले व्याख्यान मेरे भाग्य में मेरे हिस्से में आया था।।
यह कथा का नामकरण के बारे में बापू ने कहा कि विश्वनाथ शब्द मिलता है।। नाथ के बगैर हम अनाथ है।। और दोनों पंक्ति बालकांड में से ली हुई है।। महात्मा करपात्री जी ने रामचरितमानस के बारे में जो कहा।।वाल्मीकि आदि कवि लेकिन अनादि कवि भगवान शंकर ने मानस की रचना करके हृदय में रखी।।वाल्मीकि जी ने कांड शब्द कहा है। हर एक प्रकरण कांड कहा।।कांड शब्द से हम बहुत परिचित हो गए हैं।।
करपात्री जी कहते हैं कि बालकांड संकल्प का कांड अयोध्या कांड संस्मरण का,अरण्य कांड संतृप्ति का कांड,किष्किंधा कांड संरक्षण का,सुंदरकांड संतप्त कांड,लंका कांड संघर्ष का कांड और उत्तरकॉंड संस्पर्श का कांड है।। इस जगत में संघर्ष की नहीं किसी के संस्पर्श की जरूरत है।।
बुद्धि की आंखों से नहीं दिखता बुद्ध की आंख से देखना चाहिए।। पंचदेवों का भी ध्यान रखना और कथा के महत्व में सात कांडों की यह सीडी- निसरणी बताई और एक-एक कांड में एक-एक मिला के सात श्लोक की वंदना की गई।। अलग-अलग वंदनाओं के बाद गुरु वंदना और हनुमत वंदना तक कथा का गान करते हुए आज की कथा को विराम दिया गया।।
*दिल दरिया,बाग-बाग हो जाता है-ऐसी भूमि गोपनाथ का क्या है महत्व?*
केवल ऐतिहासिक ही नहि बल्की धर्म-अध्यात्म और नीजी दिल के भावों से भरी,जूडी़ दंतकथाओ की भूमि गुजरात के भावनगर के तलाजा के पास गोपनाथ महादेव की भूमि है।।
गुजराती कवि मनोज खंडेरिया लिखते है:
*पकडो कलम ने कोइ पळे एम पण बने।*
*आ हाथ आखेआखो बळे एम पण बने!*
गुजराति आद्य कवि नरसिंह महेता के इस पुराकल्पन पर आधारित यह शेर है।।नरसिंह महेता जन्म भावनगर(गुजरात) के पास तलाजा में हुआ।।ये तलाजा से गोपनाथ की भूमि बिलकूल नजदीक।
तलाजा एभल वाळा की भूमि।भाभी ने कटु वचन कहा तो नरसिंह को चोट लगी,दौडकर महादेव गोपनाथ की शरण में आ गये।।कहते है शिव प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा।।नरसैया ने कहा की आप को जो अधिक प्रिय है वो मुजे दो!
शिव ने कहा मुजे कृष्ण की रासलीला बहूत प्रिय है।।फिर शिव नरसिंह महेता को रासलीला देखने ले गये।।हाथ में जलती मशाल पकडकर रासलीला देखने में मग्न नरसिंह का हाथ मशाल के साथ साथ जल गया इतने तल्लीन हो गये।।
यही भूमि है गोपनाथ,गोपनाथ का शिव मंदिर और गोपनाथ का दरिया।।
कहते है गोपनाथ में अज्ञातवास के दरमियान पांडवो के द्वारा ये मंदिर निर्मित हुआ था।। शिव का पूजन अर्चा पांडवो ने की थी,कोइ रास्ता न मिलने पर महादेव का दर्शन करने से उलझन दूर हूइ।।
ऐसी कथा भी है की स्वयं समुद्र हररोज महादेव को बिनती करता था की आप नित्य दर्शन देने आप यहां बिराजो।।
एक दिन शिव प्रसन्न हो कर समंदर की बिनती को स्विकारते हुए बिराजे और विधिवत स्थापना इ.स.१८७९ में हूइ।१९८१ के ऑगस्ट में इस मंदिर का भव्य प्रवेशद्वार भी निर्मित किया गया।।
यहां ऐसा कहा जाता है कि मध्य रात्रि को मंदिर के दरवाजे के पास दरिया से नाद ध्वनि हमें अलौकिक अनुभूति की भूमि पर ले जाता है।।
गोपनाथ में भावनगर राज्य के द्वारा ऐतिहासिक लाइट हाउस का निर्माण भी हुआ है।।नजदीक में भावनगर राज परिवार द्वारा निर्मित गोपनाथ का बंगलो भी है।।
दरिया के किनारे गोपनाथ महादेव के दर्शन से दरिया दिली आती है,जैसे दिल दरिया,मन समंदर आत्मा बाग-बाग हो जाती है।।

