Homeगुजरात2030 तक 125 बिलियन अमेरिकी डॉलर की होगी फ़ूड सर्विसेज़ मार्केट, असंगठित...

2030 तक 125 बिलियन अमेरिकी डॉलर की होगी फ़ूड सर्विसेज़ मार्केट, असंगठित क्षेत्र के मुकाबले संगठित क्षेत्र 2 गुणा तेज़ी से करेगा विकास: कियर्नी के साथ साझेदारी में स्विगी ने अपनी सालाना रिपोर्ट हाउ इंडिया ईट्स का साल 2025 संस्करण जारी किया

राष्ट्रीय | 27 नवंबर 2025 — भारत के अग्रणी ऑन-डिमांड सुविधा प्लेटफ़ॉर्म स्विगी, (स्विगी लिमिटेड, NSE:
SWIGGY / BSE: 544285) ने अपनी सालाना रिपोर्ट हाउ इंडिया ईट्स” का 2025 संस्करण जारी किया। यह रिपोर्ट स्विगी और कियर्नी की साझेदारी में बनाई गई है। यह फ्लैगशिप रिपोर्ट का दूसरा संस्करण है और दिखाता है कि भारतीय ग्राहकों की खाने-पीने की आदतें किस तरह बदल रही हैं।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत का फ़ूड सर्विसेज़ मार्केट 2030 तक 125 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर जाएगा। इसमें असंगठित क्षेत्र के मुकाबले संगठित क्षेत्र 2 गुणा तेज़ी से बढ़ेगा।

  • संगठित क्षेत्र भोजन सेवाओं में कुल विकास का 60% से ज़्यादा हिस्सा हासिल करेगा और असंगठित क्षेत्र से आगे निकल जाएगा।
  • भोजन सेवाओं में विकास की बहुत अधिक संभावना है। भारत की जीडीपी में इसका योगदान9% है, जबकि चीन में यह 5% और ब्राज़ील में 6% है।

बढ़ती आमदन, डिजिटल मुद्रा को अपनाना और सुविधा की बढ़ती चाहत ही इसके विकास को पंख लगाएगी, लेकिन विकास का आकार सबसे दिलचस्प है:

  • भारतीय ग्राहक सबसे अधिक प्रयोग कर रहा है: हरेक ग्राहक द्वारा कुछ अलग भोजन के ऑर्डर में 20% की वृद्धि हुई है और हर ग्राहक के हिसाब से रेस्टोरेंट में ऑर्डर में 30% की।
  • विलासिता और स्वास्थ्य भले ही देखने में दो धुरे लगें, लेकिन एक साथ चलने वाले ट्रेंड हैं।
  • देर रात के खाने की मांग डिनर के आम समय के मुकाबले ~3 गुना बढ़ रही है। रात 11 बजे के बाद पिज़्ज़ा, केक और सॉफ्ट ड्रिंक्स की खपत में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी देखी जा रही है।
  • स्वास्थ्यवर्धक और आपके लिए बेहतर खाना श्रेणी में कुल ऑर्डर3 गुना तक बढ़ रहा है। इसमें भी प्रोटीनयुक्त खुराक बढ़ाने, कैलोरी पर ध्यान देने और अतिरिक्त चीनी कम करने पर फोकस किया जा रहा है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत फ़ूड सर्विसेज़ में विकास के दो रोमांचक मोर्चों पर कैसे नज़र रख रहा है – भारत की समृद्ध पाक कला की विरासत को फिर से खोजना।

  • भारत गोवा, बिहारी और पहाड़ी जैसे अपनी पुरातन पाक कलाओं को फिर से खोज रहा है। यही कारण है कि मेनस्ट्रीम कुज़ीन के मुकाबले यह 2-8 गुना तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
  • बटरमिल्क और शरबत जैसे स्थानीय भारतीय पेय भी बेहद पसंद किए जा रहे हैं और ये बाकी ड्रिंक्स के मुकाबले 4-6 गुना से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह ट्रेंड ग्लोबल क्विक सर्विस रेस्टोरेंट्स को भारत के लिए नवीनता लाने के लिए उत्साहित कर रहा है – स्टारबक्स में काला खट्टा कोल्ड ब्रू, या मैकडॉनल्ड्स में चिली गुआवा ड्रिंक खोजी जा रही है।
  • चाय कुल पेय पदार्थों के मुकाबले 3 गुना से ज़्यादा बढ़ रही है, इसलिए सड़क किनारे लगने वाली छोटी सी दुकान भी डिजिटल माध्यम से आसानी से चलाई जा रही है।

…और अब पहले से कहीं ज्यादा वैश्विक खानपान की विविधता को अपनाते हुए:

  • कोरियन, वियतनामी और मैक्सिकन व्यंजन अब तेजी से मुख्यधारा में आ रहे हैं, जिनकी ग्रोथ क्रमशः 17 गुना, 6 गुना और 3.7 गुना तक पहुंची है। यहां तक कि पेरूवियन और इथियोपियन फूड ने भी पहली बार जगह बनाई है।
  • बोबा टी और माचा टी की तलाश पिछले पांच सालों में क्रमशः 11 गुना और 4 गुना बढ़ी है।
  • अच्छी तरह घूमे–फिरे और सोशल मीडिया से प्रभावित शहरी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सुशी, टैको और कोरियन बीबीक्यू अब कोई खास या दुर्लभ चीज नहीं रही, बल्कि यह तेजी से रोज़मर्रा के डिनर का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहित कपूर, सीईओ, स्विगी फ़ूड मार्केटप्लेस ने कहा, “सिर्फ एक दशक में ही यह उद्योग असमान रूप से बदल गया है। स्पीड को लेकर लोगों की उम्मीदें क्विक कॉमर्स तय कर रहा है। उदाहरण के तौर पर, हमारी 10 मिनट फूड डिलीवरी सेवा ‘बोल्ट’ प्लेटफॉर्म पर 10% से अधिक ऑर्डर दे रही है। एक तरफ उपभोक्ता भारतीय और इटालियन जैसे अपने पसंदीदा व्यंजनों में किफ़ायत चाहते हैं, और दूसरी तरफ माचा और बोबा टी को पहले से कहीं ज्यादा अपना रहे हैं। हमारे रेस्तरां पार्टनर भी कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। क्यूएसआर और क्लाउड किचन 17% से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने की राह पर हैं, जो संगठित फूड सर्विस इंडस्ट्री की ग्रोथ से करीब 1.5 गुना है। मैं वास्तव में उत्सुक हूं कि आने वाला दशक इस तेजी से बदलते क्षेत्र में सभी हितधारकों के लिए क्या नई संभावनाएं लेकर आएगा।” 

रजत तुली, पार्टनर, एफ एंड बी लीड और क्यूएसआर एशिया लीड, किअर्नी ने कहा, “हम भारत की फूड इकॉनमी का दायरा मूल रूप से बदलते हुए देख रहे हैं। अब विकास कुछ चुनिंदा महानगरों तक सीमित नहीं है। टॉप 8 शहरों के बाहर डाइनिंग–आउट की ग्रोथ, टॉप 8 शहरों की तुलना में 2 गुना तेज है, जिसमें कॉरपोरेट, इंडस्ट्रियल, एजुकेशन और टूरिस्ट हब सबसे आगे हैं। जेन–जी में जबरदस्त संभावनाएं हैं। यह समूह डाइनिंग–आउट में बाकी सभी समूहों की तुलना में 3 गुना तेजी से बढ़ रहा है और कॉफ़ी रेव जैसी नई चीजों और इंस्टाग्राम–फ्रेंडली स्थानों व मेन्यू की मांग कर रहा है। फूड सर्विसेज में अगली लीडरशिप उसी के पास होगी जो इन नए बाज़ारों और उपभोक्ताओं को बेहतर समझता हो। इसके अलावा, फूड डिलीवरी में पैकेजिंग इनोवेशन डाइनिंग–आउट के फॉर्मेट की जगह लेगा।”

इन बदलते रुझानों का सामना करने के लिए फूड सर्विसेज सेक्टर को स्पीड, किफ़ायत और अनुभव पर खास ध्यान देते हुए कई प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाकर काम करना होगा।

  • रेस्तरां अब अपनी मार्केटिंग का 75% से ज़्यादा हिस्सा डिजिटल चैनलों पर खर्च कर रहे हैं, ताकि खासकर युवा ग्राहकों तक पहुंचा जा सके।
  • डाइनिंग–आउट में प्री–बुकिंग की रफ़्तार वॉक–इन ऑर्डर की तुलना में 7 गुना तेजी से बढ़ रही है।
  • नॉर्थ इंडियन और इटालियन जैसे परिचित व्यंजनों में, कम कीमत वाले सेगमेंट में भी, ग्रोथ इंडेक्स 10 से 40% तक ज्यादा दर्ज किया जा रहा है।
  • ई–कॉमर्स अनबॉक्सिंग का अनुभव अब फूड डिलीवरी में भी अपनाया जा रहा है, जैसे बटरफ्लाई बॉक्स वाला बर्गर जो खुलकर प्लेट बन जाता है, और धीमी आंच पर पकी दम बिरयानी जो सीधे आपके पास मिट्टी की हैंडी में पहुँचती है।

===============

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read