प्रभाव को लांघा जा सकता है,स्वभाव को ओवरटेक करना मुश्किल है।।
अपने घर का कोना,हृदय का कोना,आंख का कोना और मेरे लिए मेरे गांव के मंदिर का कोना सनातन है।।
मुनि का मौन सनातन है और ऋषि की वाणी सनातन है।।
भारत मंडपम्दिल्ही की संवाद भूमि पर चल रही रामकथा चौथे दिन में प्रवेश कर रही तब बापू ने बताया कि मेरी दृष्टि में सनातन सात वस्तुओं से जुड़ा हुआ है इसलिए सनातन सप्तक कहूंगा।
हमारे यहां पंचक अष्टक और सप्तक का महिमा है। एक- ब्रह्म सनातन है, दूसरा- पुरुष सनातन है। जैसे अर्जुन कहता है कृष्ण आप सनातन पुरुष है।।तीन- स्वभाव सनातन है।प्रभाव क्षण भंगुर है।।चौथा सनातन जीव है।।प्रभाव को लांघा जा सकता है स्वभाव को ओवरटेक करना मुश्किल है।।ब्रह्मांडों की सर्वोच्च वाणी कृष्ण कहता है की जीव सनातन है वैसे कूल भी सनातन है।। धर्म सनातन है और सत्य सनातन है।।
गिने-चुने लोग दिखते हैं और यह सातों लक्षण दिखे तो समझना सनातन पुरुष है।।
भागवतकर कहते हैं धीरे-धीरे सभी विषय विराम लेने लगे, लेकिन भवन में बैठकर वैराग्य नहीं आता भवन के कोने में आता है।।अपने घर का कोना,हृदय का कोना,आंख का कोना और मेरे लिए मेरे गांव के मंदिर का कोना सनातन है।। मुनि का मौन सनातन है और ऋषि की वाणी सनातन है।। विषय के साथ विकार और संस्कार जुड़े हुए हैं।।हमें प्रकृति के सभी तत्व बुलाते हैं अस्तित्व हमें दस्तक देता है लेकिन हम सुन नहीं पाते।।
बापू ने कहा कि मेरे गुरु जी ने ऐसा बीज बोया कि मुझे फल भी मिले और रस भी मिला! धर्म अर्थ आदि चारों फल मिले हैं और आप रस से सुन रहे हैं जो श्रेष्ठ को ना माने वह नास्तिक है।।तुम जानो नहीं तो कोई बात नहीं लेकिन मानो तो सही! ज्ञान कहता है जानो, भक्ति कहती है मानो।। भागवत कारने कहा असहाय के ऊपर करुणा और दया आ जाए ये सनातन धर्म का स्वभाव है और जिसका संग हमें बहुत अच्छा लगने लगे जो बुद्ध पुरुष सज्जन से मैत्री हो जाए वो सनातन का स्वभाव है और जो श्रेष्ठों को आदर दे यह सब चलते-फिरते सनातन धर्म है।।
बहुत छाले हैं उसके पैरों में।
कम बक्त उसूलों पर चला होगा!
मत पूछो मेरा कारोबार क्या है।
वफादारी की छोटी सी दुकान है धोखे के बाजार में
आंखें तो बहुत अच्छी मगर नजर अच्छी नहीं है।
गम बहुत हैखुलासा कौन करें।
मुस्कुरा देता हूं तमाशा कौन करें।।
मेरी मैयत पर आना तो वक्त पर आना।
दफनाने वाले मेरी तरह इंतजार नहीं करते।।
यह तुझे वहम है कि आगाझ-ए-गुफ्तगू हम करेंगे।
हम नाराज हो जाते तो सादिया खामोश रहती है। शिकायत की पाई पाई जोड़कर रखी थी।
उसने गले लगा कर पूरा हिसाब इधर-उधर कर दिया
मुझे भेजा था दुनिया देखने को।
मैं एक चेहरे का गुलाम बन गया।।
कितना मटका होगा वह इंसान।
जमाने को सही रास्ता बताने के लिए।।
मनु महाराज ने सनातन धर्म के 10 स्वभाव कहे हैं मनु का मतलब मां और बुद्धि शत्रु हुआ है दोनों के दांपत्य से मानवत व प्रकट होता है
धृति: क्षमा दम: अस्तेयशौचंइन्द्रीयनिग्रहं
धी विद्या सत्यंअक्रोधोदशकं धर्म लक्षणम्
धृति- धारण करना या धीरज रखना।।क्षमा देना, देह पर दमन नहीं करना लेकिन दम से काबू में रखना। अस्तेय- चोरी नहीं करना,आंतरबाह्य स्वच्छता रखना,इंद्रियों पर निग्रह करना,बुद्धि,विद्या,सत्य और किसी पर क्रोध न करना यह 10 स्वभाव सनातन के हैं ऐसा मनु ने कहा है।।
आखिर में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया एवं चेयरपर्सन किरण चोपड़ा जी,रशिया और पनामा के राजदूतों ने भी अपने-अपने विचार संक्षिप्त में प्रस्तुत किया और सबकोममेंटो भी अर्पण किया गया।।
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