
जीन में कुटुंब प्रीति ना होती उनमें राष्ट्रीय प्रीति का प्रवेश नहीं हो सकता।।
पत्रकार कैसा होना चाहिए?
खुमारी,नम्रता दोनों पत्रकार में होना चाहिये।।
मेघानी अंधश्रद्धा नहीं,चमत्कार नहि लेकिन अध्यात्म जगत का सत्य खोजा है।।
मेघाणी जी के रत्नों में चमत्कार नहि,साक्षातकार है।।
बगसरा के आंगन में चलती राम टकथा के तीसरे दिन के आरंभ में बापू ने भारतीय क्रिकेट टीम को बहुत बधाइयां देते हुए कहा कि वैसे तो कल महिला दिन था लेकिन मेन्स दिन! हमारे युवाओं ने बहुत अच्छा काम किया। कोच कप्तान और साथी और क्रिकेट जगत को बधाई।।यहां कौन हारा कौन जीता यह नहीं लेकिन क्रिकेट जीता है।। क्योंकि जिंदगी एक सफर है सुहाना.. भारतीय होने के नाते बहुत आनंद और प्रसन्नता हो रही है।।और मैं उन लोगों के दिल में मेरी प्रसन्नता दे रहा हूं।।
मेघानी जी की आज पुण्यतिथि। कल पूर्व संध्या पर हुए कार्यक्रम में पुण्य श्लोक और लोकश्लोकमेघानी के बारे में कहा गया उन पर बापू ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।।
बापू ने बताया कि मेघानी को कहां रुचि और प्रीति थी? बहुत सी बातें कहते हुए बापू ने कहा कि मेरी दृष्टि में 14 जगह पर मेघानी की प्रीति दिखती है।। सबसे पहले कुटुंब प्रीति।। जीन में कुटुंब प्रीति ना होती उनमें राष्ट्रीय प्रीति का प्रवेश नहीं हो सकता गुजरात के काग बापू कहते हैं कि मेघानी मेरे भाई जैसे,कभी मित्र जैसे,कभी विपत्ति के साथी तो कभी मुझे गुरु जैसे लगते हैं।।मेघानी के अंदर राष्ट्र प्रेम भरपूर भरा है।। तीसरा स्वातंत्र प्रेम भी है।।मेघानी हर एक के पास पहुंचने चाहिए।।
उस समय लिंबड़ी के राजकवि शंकर दान देथा ने खड़े होकर कहा कि अब कलयुग आ गया है! यहां 2000 से ज्यादा चारणों बैठे हैं और एक बनिया इतना अच्छा बोल सके! यह टीका नहीं लेकिन मेघानी की सराहना थी।।उनकीचारणी विद्या की तरफ की प्रति।अंग्रेजी साहित्य के तरफ प्रीति। बंगाली और हिंदी प्रेम।भाषा के प्रति प्रीति भी दिखती है।।
मेघानी की गीतों के प्रति,वार्ता और नाटक के प्रति भी प्रीति दिखती है।।लोक संगीत में भी मेघानी जी की प्रीति दिखती है।।
बापू ने कहा कि राणपुर से जब गुजरात के अखबार ‘फूलछाब’ में आए और यह ‘फूलछाब’ को धन्यवाद देते हुए बताया कि मेघानी कथा पर विशिष्ट रूप से हर रोज किसी न किसी विद्वान की कलम से ‘फूल छाब’ मेघानी जी को ज्यादा महत्व दे रहा है। मैं धन्यवाद दे रहा हूं क्योंकि इसी कुर्सी पर कभी मेघाणी जी भी बैठे थे।।’फूलछाब’ अपना कर्तव्य निभा रहा है इसलिए तंत्री ज्वलंत भाई और मैनेजर झीबा भाई को धन्यवाद देते हुए बापू ने कहा कि पत्रकार कैसा होना चाहिए? यह चौथी जागीर के चार स्तंभ मेघाणीनी ने दिखाएं।। पत्रकार में नम्रता होनी चाहिए।।पत्रकार में खुमारी भी होनी चाहिए लेकिन खुमारी कभी हिंसक बनती है।।नम्रता साधुता का अवतरण करती है।। सत्ता और संपत्ति की शेह में नहीं आना चाहिए और किसी का झूठ प्रशंसा या बिना कारण विवाद भी पत्रकार को खड़ा नहीं करने चाहिए।। यह मेघानी की पत्रकारिता की संपादन की प्रीति दिखती ह।।
आज मेघानी का दूसरा एक रत्न खोलते हुए बापू ने कहा कि जूनागढ़ के पास शेरगढ़ नाम का एक छोटा गांव।। वहां जसवंत सेंजलिया नामक पटेल रहते थे।औरनात जाट आज प्रासंगिक नहीं लेकिन उस वक्त एक बहुत से अनाथ और बिल्कुल मां-बाप रहित एक छोटा बच्चा जिनका नाम वेला था वह जसमत के पास आकर कहते हैं मुझे आपके वहां रखो। यह कोली का पुत्र था।। लेकिन जिसका अंतर बहुत शुद्ध होता है वह जात-पात नहीं देखते। पटेल की पत्नी ने कहा कि हम रख लेते हैं और अपने वहां रखा।। सब कुछ काम करता है।सिर्फ एक रोटी खाता है और मानो उसी के कारण रिद्धि सिद्धि आती है और पटेल के घर में खेत में बहुत सा पाक होने लगता है।। यह वेला कोई योग भ्रष्ठ आत्मा होगा।। पटेल के वहां आया है और एक दिन जिन्हें अपनी मां समझता है उनको सांप डसता है शायद वह मर ही गई है। लेकिन वेला के स्पर्श से फिर खड़ी हो जाती है और उसी वक्त ईर्ष्यालु लोग यह देख नहीं सकते हैं।। किसी न किसी बहाना लेकर पटेल को फरियाद करते हैं कि वेला कुछ काम नहीं करता सोते रहता है।। और पटेल के मन में शंका होती है। एक दिन जाकर देखा है वेला सो रहा है और पद का प्रहार करके बेल को उठाते हैं और कहते हैं कुछ काम नहीं किया!? तब वेला ने कहा कि आपकी जमीन को मैं गद्दी जैसी बना दी है।।उस वक्त मेघानी जी कहते हैं कि मानो अपने आप खेत में सब कुछ हो रहा है! वैसे मेघानी अंध श्रद्धा नहीं लेकिन अध्यात्म जगत का यह सत्य है।। और वेला को लगता है कि मेरी साधुता सबको दिख गई है। वह वहां से निकल कर गिरनार की राह पकड़ता है साधना करता है और भविष्य में वेलवट जो आज है वह बेल के कारण पंनपा है।। जूनागढ़ के पास खडखड में निवास करता है।। इस वक्त एक और पात्र राम खांट जो बहुत बड़ा आदमी है, उनका बेटा मृत्यु के शरण जाता है।य और वह पशु पशुओं का बलिदान देता है।। वहां जाकर वेला ऐसा न करने का कहता है और अहिंसा का व्रत लेकर राम खांट भी निकल जाता है और हरि भजन की लगनी लगती है।। एक रात राम खांट को वेला याद करता है और निकल जाते हैं और कहते हैं कि तूने जो गोली नीलगाय को मारी थी वह सब मुझे लगी है और बेला वहां से निकल कर भैरव जप-गिरनार पर समाधि लेता है।।जीवन का समाधान ही समाधि है।। गुरु हमें पल-पल सावधान करें उसी को हम समाधि कहे यह आध्यात्म सत्य है।।
और एक दिन पत्थर हटा है और वहां फिर वेलो बाबा के नाम से प्रकट होता है।।
मेघाणी जी ने यह रत्न खोज कर हमें दिया है।।
उस रत्न को रुखड़ कहते हैं और मेघानी जी उन पर एक पूरा पद बनाते हैं:
रुखडबावातुंहळवोनहळवोहाल्य जो…..
यह पद का गान बापू ने किया।। बापू ने यह भी कहा कि मैं कहानी पर अगले दिनों में विद्वानों भी अपने-अपने भाव रखेंगे।।
फिर कथा प्रवाह में रामकथा के चार घाट में तुलसी जी का शरणागति का घाट है। वह केवल निष्क्रियता नहीं लेकिन अपना कर्तव्य कर्म करना चाहिए।। एक बार के कुंभ में परम विवेक की याज्ञवल्क्य भारद्वाज की विदाई मांगते हैं। तब भरद्वाज ने चरण पकड़कर अपना संशय राम के बारे में पेश किया और याज्ञवल्क्य को रामकथा पूछी और मुनि ने शिव कथा से आरंभ किया।।

