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कथा पंडाल में कल-शनिवार शाम बापु श्रोता बनकर बैठेंगे और…

बापू युग्मूर्ति कथाकार हैं।।
बापु के वांचिकम् से 900 से ज्यादा कथा के ग्रंथ बन सकते हैं:डॉ.संजय दवे।।
“बापू की कथा शैली शतरूपा है,निजी है।।”
मेघाणी जी की मेघवाणी में शब्द,स्पर्श,रुप,रस और गंध दिखतें है।।
मेघाणी जी की फोरम फॉरेन में भी महक रही रही हे।

गुजरात के बगसरा,जहां गुजरात के समर्थ साहित्यकार और राष्ट्रीय कवि झवेरचंद मेघाणी की पैतृक भूमि पर चल रहा रामकथा का यग्य आज सातवें दिन में प्रवेश कर रहा है तब कथा के आरंभ में एक विशेष प्रकल्प ने व्यास पीठ पर आकार लिया।।

विध विध सर्जकों ने अपनी रचना,जो ग्रंथस्थ की वह बापू के शुभ हस्तों द्वारा लोकार्पित और ब्रह्मार्पित करवाई।।
मेघवाणी के भीगे वातावरण में सातवें दिन गुजराती लेखक बहादुर सिंह वाळा- जिनके बाल काव्य का संग्रह ‘कलबल कलबलियां’ जिनका डिजिटल रूप भी उपलब्ध है,वो पुस्तक बापू के हस्तो लोकार्पित हुआ।।

मेघाणी जैसी शैली और मेघाणी की लघु आवृत्ति जैसे दिखते और सदैव मेघाणी जी में रहते हुए रणछोड़ भाई मारू ने-‘मेघानीना पगले काठियावाड़ नां कोतरोमां’-दो भागों में प्रकाशित पुस्तक बापू के हस्तो लोकार्पित करवाया।।

एक समय के समर्थ लोक वार्ताकार दरबार पूंजा वाळा के पुत्र डॉ.विक्रम वाळा- जो अच्छे रेडियो कलाकार भी है और लोकवार्ता के आकाशवाणी के मान्य कलाकार है- उन्होंने एक पुस्तक लिखा ‘अलख आराधना’-जो बापू के कर कमल से लोकार्पित हुआ।।

डॉ संजय दवे ने दो पुस्तक लिखे: ‘मेघानी-लोक संवेदनानां सर्जक’ और ‘नाट्य संदर्भ’। तीसरा पुस्तक भी लिख रहे हैं और उनका विषय है:’युग्मूर्ति कथाकार:मोरारी बापू’- उन्होंने बापू की कथा शैली पर अपना भाव व्यक्त करते हुए कहा कि बापू युग्मूर्ति कथाकार हैं।। जिनके वांचिकम् 900 से ज्यादा कथा के ग्रंथ बन सकते हैं।।शौनक और शुत मुनि,वाल्मीकि और व्यास से लेकर देखते हैं तो १०० जितनी कथा शैली अधिकृत रुप से मिलती है बापू की कथा शैली शतरूपा है,निजी है।।

मानस 700 से शुरू हुई रामकथा कि प्रकाशन श्रेणी जहां गुजराती,हिंदी और अंग्रेजी में हर कथा के पुस्तक निशुल्क रूप से उपलब्ध कराए जाते हैं और उनका संकलन नितिन वडगामा करते हैं।ऐसी ही अमरिका के डेट्रायट में गाई गई ‘मानस आनंद’ राम कथा का पुस्तक बापू के हस्तो लोकार्पित किया गया।।

यह सभी कार्यक्रमों का संचालन-संकलन कवि गायक हरिश्चंद्र जोशी ने किया।।

कल शनिवार एक विशेष दिन है।जब बापू श्रोता बनाकर बैठेंगे! मेघाणी के स्मरांजलि के लिए विशेष सत्र कथा पंडाल में कल शाम 5:30 बजे लोक साहित्य और अलग-अलग विषय पर वक्ता अपने भाव रखेंगे।।

गुजरात राजकोट के सांसद पुरुषोत्तम रुपाला, कवि गायक विनोद जोशी,वी.एस.गढ़वी और गुजराती अखबार फूलछाब के तत्री,लेखक-साहित्यकार-सर्जक ज्वलंत भाई छाया और ललित खंभायता अपने-अपने सर्जन और मेघाणी के बारे में जो लिखा है वह कल शाम 5:30 बजे कथा पंडाल में विशेष रूप से प्रस्तुत करेंगे।।

बापू ने शुरू में हुई सभी प्रविधि के बारे में अपना भाव बताया और कहा कि पाट,यह पाटला,पोथी और पाटी सब एक साथ जुड़ते हैं तो मेरा प्रवचन शुरू होता है, जो मेरे लिए महत्व का है।। फिर परम पुरुष,पवन पुत्र और परमात्मा प्रभु मेरे पास बुलवाते हैं।।मेरी तो क्या शैली! सैली तो मेघाणी की देखो! मेघाणी जी के पास पांच वस्तु दिखती है: मेघाणी के पास शब्द है और वह शब्द स्पर्श भी करता है।। मेघाणी जी के शब्द गांधी जी के केमिकल भी बदल डालते हैं।। ‘छेल्लो कटोरो’ गांधी ने स्टीमर में पढा और गांधी जी के रसायन बदल गए।।

मेघाणी के शब्द के स्पर्श रसिक है।। यह आदमी ने साहित्य का एक भी रस छोड़ा नहीं है।। वीर रस, करुण रस,हास्य रस,श्रृंगार रस और शांत रस-सभी लिए है मेघानी के ग्रंथ में सुगंध भी है।।उनकी फोरम फॉरेन में भी घूम रही है।।
तुलसी जी ने नवमेध का वर्णन किया है। रामचरितमानस में नौ बार मेघ शब्द दिखता है।। मेघाणी में सभी प्रकार की वाणी है।।पुण्य मेघ भी है और सर्जक का पूण्य मेघ एक सुख का अनुभव देता है।। बादल बनाकर छत्र मेघ भी मेघाणी दिखाते हैं।। शिव चरित्र में शिव की समाधि तोड़ने के लिए काम प्रभाव का वर्णन और बाद में काम को भस्म करने के बाद रति को फिर काम कैसे मिलेंगे वह कहकर भगवान शिव ने वरदान दिया।।शिव के गणों ने शिव को सज धज कर दूल्हा बनाया।। और हिमाचल प्रदेश में शिव की बारात निकलती है।। सभी देवी देवताओं के साथ भूत प्रेत भी है।। उनका सुंदर रसिक वर्णन करते हुए बापू ने कहा की बारात हिमाचल पहुंचती है और शिव का रूप देखकर सब अचंभित रह जाते हैं और बाद में शिव और पार्वती का विवाह होता है।।और पार्वती की विदाई का वर्णन करने के बाद रामकथा को विराम दिया गया।।

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