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हरि इच्छा भावि को पलट सकती है लेकिन भावि हरि इच्छा को नहीं बदल सकता।।

जीवन में जो भी घटना घटे उनके पीछे हरि इच्छा देखना और थोड़ी धीरज रखना,सब अच्छा होगा,रोने मत बैठना।।
जैसे संकल्प को हम बदल नहीं सकते वैसे वचन भी निभाना पड़ता है।।
प्रतिज्ञा भी बौधिक हो तब नुकसान करती है।। कृष्ण ने शस्त्र नहीं लिया,शस्त्र सुंदर नहीं होता लेकिन सुदर्शन चक्र सुंदर है।।
सभी शस्त्र हिंसा के प्रतीक है।।
एक दूसरे की काटते हैं वह धर्म ही नहीं होता।।
शंकराचार्य जयंति की बधाइयां दी गइ।।

मंगलवार के दिन पावन पालिताणा की भूमि पर सगापरा धार स्थित स्वयंभू जडेश्वर महादेव मंदिर की संनिधि में रामकथा का चौथे दिन में प्रवेश हुआ।

आरंभ में यहां की अढीद्वीप तिर्थक्षेत्र के वर्तमान महाराज साहब हार्दिक रत्नसूरि जी महाराज एवं अन्य महाराज श्रीओं के द्वारा जैन रामायण जो प्राकृत भाषा में पउमचरियम् नाम से लिखा गया है और उनकी रचना विक्रम संवत ६० यानी कि आज से २०२२ साल पहले आचार्य विमल सूरी जी महाराज ने की थी।।पूर्व काल में भगवान महावीर जी ने स्वमुख से कहीं जहां १०५५० श्लोक है यह रामायण की अर्पण विधि और व्यास वंदना हुई।।

बापू ने बताया तपस्वी त्यागी आचार्य भगवंत पधारे हैं दो ग्रथ आपने अर्पण किया,प्रसन्नता व्यक्त की।। बहुत सी प्रश्न और जिग्यासायें भी है।।

शिव संकल्प शब्द लेकर तात्विक,सात्विक संवादी चर्चा हम कर रहे हैं तब कंइ शब्द स्मरण में लेने चाहिए जैसे:वचन- इसे निभाना होता है।प्रण-पालना होता है।व्रत वह भी पालना होता है। वरदान पालन करना होता है।।आशीर्वाद पालन करना होता है। कोई श्राप देते हैं वह भी घटित होता है और आखिरी है संकल्प।।

रामचरितमानस ने सभी शब्दों को अनुभव पूर्वक निर्देश किए हैं।।जैसे संकल्प बदल नहीं सकते वैसे किसी को दिया गया वचन भी निभाना पड़ता है।। रामचरितमानस की प्रसिद्धि चौपाई:

रघुकुल रीति सदा चलि आई।
प्रान जाहु बरु बचनु न जाइ।।

थोड़ा वाल्मीकि रामायण का स्पर्श करें तो वचन की गरिमा समझ में आएगी।।भरत जी चित्रकूट गए वह प्रसंग वाल्मीकि के दर्शन से कहा कि भरत जी का चित्रकूट प्रसंग। भरत जी रात को अकेले बैठे हैं और सोच रहे हैं कि जो घटना घटी उनके केंद्र में वचन मुख्य है।।भरत जी बुद्धिमान है जब बोलना शुरू करते हैं तब ब्रह्मलोक और विधि लोक छोड़कर सरस्वती उनकी जीभ पर बैठती है।।पूरी रात वचन पर सोच करके सुबह सभा में कहा कि जिनके लिए ये हुआ है वह मेरी माता कैकयी भी यहां हाजिर है मैं भी हाजिर हूं और पूरी अयोध्या और रघुकुल का श्रेष्ठ मंत्रिमंडल भी हाजिर है।।और रघुकुल की परंपरा है कि जयेष्ठ पुत्र को गादी मिले वह आप निभाना।। तब राम कहते हैं कि कैकयी देश के महाराज अश्वपति ने पूर्व में एक वचन दिया था कि कैकई से जो पुत्र जन्मेगा उनको राजगादी मिलेगी तो वह भी आपको निभाना चाहिए! कैकयी से जो पुत्र होगा उनको राजगढ़ी मिले तो वह वचन भी निभाना पड़ेगा।।राम ने कहा कि बाप हाजिर नहीं जिसे वचन दिया था लेकिन भरत जी कहते हैं कि शास्त्र का नियम है गुरु अपने वचन पूरा न कर पाए तो उनके शिष्य को वचन पूरा करना चाहिए और छोटा भाई बड़े का संकल्प पूरा करता है। इसलिए मैं आपके बदले वन में जाऊं और आप अयोध्या में रहे राम ने कहा कि धर्म ही वर्तमान है।।

हरि इच्छा भावि को पलट सकती है लेकिन भावि हरि इच्छा को नहीं बदल सकता।। जीवन में जो भी घटना घटे उनके पीछे हरि इच्छा देखना और थोड़ी धीरज रखना सब अच्छा होगा,रोने मत बैठना।। जैसे संकल्प को हम बदल नहीं सकते वैसे वचन भी निभाना पड़ता है।।दूसरा शब्द व्रत है जगत कल्याण के लिए उसे छोड़ सकते हैं।।और प्रण है उसका पालन करना पड़ता है।।

प्रतिज्ञा शब्द महाभारत और रामायण के अनुसार कृष्ण ने दो प्रतिज्ञा की एक संभवामी युगे युगे और दूसरा हाथ में हथियार धारण नहीं करूंगा।। लेकिन भीष्म ने भी दो प्रतिज्ञा ली:कृष्ण के हाथ से हथियार उठाऊंगा और आजीवन ब्रह्मचारी रहूंगा।। भीष्म की प्रतिज्ञा को रखने के लिए कृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा हटा दी और प्रतिज्ञा भी बौधिक हो तब नुकसान करती है।। कृष्ण ने शस्त्र नहीं लिया। शस्त्र सुंदर नहीं होता लेकिन सुदर्शन चक्र सुंदर है।।सभी शस्त्र हिंसा के प्रतीक है।।जैन परंपरा में सर्वश्रेष्ठ सूत्र अहिंसा है

परम धरम श्रति बिदित अहिंसा।
पर निंदा सम अघ न गरिसा।।

इतने धर्म,इतनी परंपराये, इतने मार्ग है फिर भी हम एक क्यों नहीं होते?क्योंकि एक दूसरे की काटते हैं वह धर्म ही नहीं होता।।

द्रौपदी रात को भिष्म को मिलने जाती है,भिष्म आशीर्वाद देते है कि अखंड सौभाग्यवती भव।।अपना आशीर्वाद निभाने के लिये भिष्म ने प्रतिग्या छोड दी।।

कथा प्रवाह में भरद्वाज और याग्यवल्क्य का संवाद हुआ।।राम जो दशरथ का बेटा घट घट में लेटा वह एक है की दूसरा?यह संशय जता कर राम के बारे पूछा गया और शिव कथा से शुरु होगा जवाब।।

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