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जीई एयरोस्पेस भारत में सप्लायर्स पर अपना खर्च लगभग दोगुना करेगा, देश के एविएशन उद्योग की बढ़ती जरूरतें पूरी करने में मिलेगी मदद

इस घोषणा से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

  • यह घोषणा उस पहली रिपोर्ट के साथ आई है, जो भारत के एविएशन क्षेत्र की भावी ग्रोथ में जीई एयरोस्पेस के ऐतिहासिक योगदान को आंकती है।
  • उन्नत इंजन तकनीक और भरोसेमंद संचालन भारत के बढ़ते एविएशन इकोसिस्टम में कनेक्टिविटी मजबूत करने में मदद कर रहे हैं।

नई दिल्ली, भारत | 12 अक्टूबर 2026 | जीई एयरोस्पेस (NYSE:GE) ने आज घोषणा की कि वह भारत में उड़ान की बढ़ती मांग को पूरा करने और विमानन क्षेत्र में देश के नेतृत्व में मदद करने के लिए 2025 से 2030 तक घरेलू सप्लायर्स पर अपना खर्च लगभग दोगुना करने की योजना बना रहा है। यह घोषणा अर्न्स्ट एंड यंग (ईवाई) की तैयार की गई नई रिपोर्ट ‘पावरिंग प्रोग्रेस: जीई एयरोस्पेस इकोनॉमिक इंपैक्ट इन इंडिया’ के जारी होने के मौके पर की गई। यह रिपोर्ट कमर्शियल एविएशन, रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग में जीई एयरोस्पेस के भारत में चार दशकों के प्रभाव का पहला व्यापक मूल्यांकन है। इस रिपोर्ट को जीई एयरोस्पेस द्वारा आयोजित उद्योग जगत के दिग्गजों के सम्मेलन ‘इंडिया टेकिंग फ्लाइट: एविएशन, इनोवेशन एंड द रोड टू विकसित भारत 2047’ में जारी किया गया।

भारत की घरेलू कमर्शियल एयरलाइंस ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 1,900 करोड़ डॉलर का राजस्व कमाया, जो देश के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र की मजबूती दिखाता है। उन्नत इंजन तकनीक, ऊंची विश्वसनीयता और बेहतर परिचालन प्रदर्शन के जरिए जीई एयरोस्पेस उस कनेक्टिविटी और कुशलता में योगदान देता है, जिस पर करीब 3.7 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों वाला एविएशन इकोसिस्टम टिका है।

रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 तक भारत में कमर्शियल एयरलाइंस की ज्यादातर उड़ानें जीई एयरोस्पेस और उसके भागीदारों* के बनाए 1,400 से अधिक इंजनों से चल रही थीं। इन इंजनों ने भारतीय एयरलाइंस को 88.2% के साथ दुनिया का सबसे ऊंचा पैसेंजर लोड फैक्टर और रोजाना 12 से 14 घंटे का एयरक्राफ्ट यूटिलाइजेशन हासिल करने में मदद की है, जो वैश्विक आंकड़ों से काफी ज्यादा है।

जीई एयरोस्पेस, दक्षिण एशिया के सीईओ विक्रम राय ने कहा, “भारत में कमर्शियल एविएशन दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ रहा है, और आज की रिपोर्ट दिखाती है कि यहां हमारी प्रतिबद्धता इंजन बेचने से कहीं आगे तक जाती है। यह पुणे में तैयार होने वाले पुर्जों, बेंगलुरु के इनोवेशन और हमारे भरोसेमंद ग्राहकों में दिखती है, जो भारत के एयरोस्पेस उद्योग की अगली पीढ़ी खड़ी कर रहे हैं। जैसे-जैसे भारत अपने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है, सप्लाई चेन इकोसिस्टम के विस्तार के लिए अपना खर्च दोगुना करने से बढ़ती मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।”

विमानन क्षेत्र में एक दशक की मजबूत वृद्धि की तैयारी

भारत सरकार के अनुमानों के अनुसार, सालाना घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या वित्त वर्ष 2025-26 के 34 करोड़ से बढ़कर 2040 तक 110 करोड़ तक पहुंच जाएगी, और इसी दौरान 2047 तक हवाई अड्डों की संख्या 163 से बढ़कर 350 से अधिक हो जाएगी।

इस मांग को पूरा करने के लिए, भारत और दक्षिण एशिया को 2044 तक 3,300 अतिरिक्त विमानों, यानी 6,600 अतिरिक्त इंजनों की आवश्यकता होगी। जुलाई 2026 में इंडिगो ने 510 एयरबस A320neo फैमिली विमानों के लिए 1,000 से अधिक लीप-1A इंजनों के ऑर्डर के लिए सीएफएम इंटरनेशनल के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह लीप इंजनों के लिए अब तक का सबसे बड़ा सिंगल ऑर्डर है और सीएफएम इंटरनेशनल के लिए एक नया रिकॉर्ड है, जिसमें इंडिगो की आगामी इंजन एमआरओ सुविधा स्थापित करने में सहायता भी शामिल थी। उम्मीद है कि भारतीय एयरलाइंस के पहले से दिए गए लगभग 1,500 नए विमानों के ऑर्डर में से ज्यादातर में जीई एयरोस्पेस और उसके भागीदारों के इंजन लगेंगे। रिपोर्ट के अनुसार यह भारत के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (एमआरओ) उद्योग के लिए 550 करोड़ डॉलर से अधिक का अवसर है।

लगातार निवेश से खड़ा हुआ मैन्युफैक्चरिंग बेस

पुणे में जीई एयरोस्पेस का प्रमुख प्लांट 20 करोड़ डॉलर के शुरुआती निवेश से स्थापित किया गया था। 2024 से कंपनी ने ऑटोमेशन बढ़ाने, प्रिसिजन-मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और वर्कफोर्स तैयार करने के लिए लगभग 5.5 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। इन निवेशों से भारत में जीई एयरोस्पेस की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत हुई है। इसे एक बड़े सप्लायर नेटवर्क का सहारा है, जिसमें छोटे और मझोले उद्यमों (एसएमई) समेत 17 प्रमुख घरेलू भागीदार और पुणे प्लांट शामिल हैं। जीई एयरोस्पेस ने 2025 में इस घरेलू सप्लाई चेन पर लगभग 20 करोड़ डॉलर खर्च किए, जिसे वह बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 2030 तक दोगुना करने की योजना बना रहा है।

2015 से अब तक लगभग 5,000 प्रोडक्शन एसोसिएट्स पुणे प्लांट के अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम से ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं। इस प्रोग्राम में हर साल 400 से 500 नए अप्रेंटिस जुड़ते हैं। बेंगलुरु में इंजीनियरिंग प्रतिभा तैयार करने वाले प्रोग्राम और शिक्षण संस्थानों के साथ रिसर्च साझेदारियां भारत के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग बेस को लगातार मजबूत कर रही हैं। इनमें आईआईटी मद्रास के साथ एक प्रमुख जॉइंट इनोवेशन प्रोग्राम भी शामिल है, जिसके तहत देश में ही डिजाइन और तैयार की गई ‘माइक्रो टर्बोमशीन’ बनाई गई।

आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों के केंद्र में एक रक्षा साझेदारी

जीई एयरोस्पेस के इंजन भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। 1986 से कंपनी LM2500 नौसैनिक इंजनों और भारत के तेजस Mk1 लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट में लगने वाले F404-IN20 इंजनों पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ साझेदारी कर रही है। F404 इंजन प्लेटफॉर्म के 4,000 से अधिक इंजन 16 देशों में इस्तेमाल हो रहे हैं।

2023 के एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) में तेजस Mk2 प्रोग्राम के लिए F414 इंजनों के संभावित घरेलू निर्माण की बात शामिल है, जो अंतिम समझौतों और मंजूरियों पर निर्भर है। जीई एयरोस्पेस ने भारतीय वायु सेना के साथ अपाचे हेलीकॉप्टर इंजनों के लिए पांच साल का ‘परफॉर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक्स’ अनुबंध और F404-IN20 इंजनों के लिए देश में ही एक डिपो सुविधा स्थापित करने का एक अलग समझौता भी किया है।

बेंगलुरु में केंद्रित इंजीनियरिंग और इनोवेशन

2000 में 20 करोड़ डॉलर के निवेश के साथ स्थापित जीई एयरोस्पेस का बेंगलुरु टेक्नोलॉजी सेंटर, संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर अपनी तरह के पहले अनुसंधान और इंजीनियरिंग केंद्रों में से एक था। तब से इसने 1,000 से अधिक विमानन पेटेंट हासिल किए हैं और दुनिया के सबसे शक्तिशाली जेट इंजन GE9X के डिजाइन, विकास और सर्टिफिकेशन में योगदान दिया है। इसके इंजीनियरों के पास GE90, GP7200, GEnx और GE9X इंजनों की मुख्य डिजाइन जिम्मेदारियां हैं, साथ ही वे सीएफएम राइज** प्रोग्राम में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिसका मकसद ड्यूरेबिलिटी को लेकर ग्राहकों की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए ईंधन की खपत में 20% तक की कुशलता लाना है। सेंटर की डिजिटल टेक्नोलॉजी टीम एआई के जरिए जीई एयरोस्पेस की वैश्विक सप्लाई चेन, एमआरओ और बिक्री के कामकाज में मदद करती है।

कुल मिलाकर, ये निवेश भारत की एयरोस्पेस क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए जीई एयरोस्पेस की चार दशकों की प्रतिबद्धता को दिखाते हैं, जो देश की अपनी विमानन महत्वाकांक्षाओं के साथ कदम मिलाकर चल रही है।

संपूर्ण रिपोर्ट डाउनलोड करें | https://www.geaerospace.com/india-taking-flight-2026

* सीएफएम इंटरनेशनल, जीई एयरोस्पेस और साफरान एयरक्राफ्ट इंजन्‍स के बीच 50-50% की संयुक्त भागीदारी वाली एक कंपनी है।

** रिवोल्यूशनरी इनोवेशन फॉर सस्टेनेबल इंजनों (राइज़), सीएफएम इंटरनेशनल, जीई एयरोस्पेस और साफरान एयरक्राफ्ट इंजन्‍स के बीच 50-50% की संयुक्त भागीदारी वाली एक कंपनी, का एक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेशन प्रोग्राम है। यह व्यावसायिक बिक्री के लिए उपलब्ध उत्पाद नहीं है।

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