Homeगुजरातमोरारी बापू ने कन्याकुमारी से केदारनाथ तक पवित्र भारत स्वस्तिक यात्रा का...

मोरारी बापू ने कन्याकुमारी से केदारनाथ तक पवित्र भारत स्वस्तिक यात्रा का किया शुभारंभ

कन्याकुमारी | 10 अक्टूबर 2026 | भारत की मुख्य भूमि के दक्षिणतम छोर कन्याकुमारी में आज एक आध्यात्मिक यात्रा का शुभारंभ हुआ। पूज्य मोरारी बापू ने कन्याकुमारी से भारत स्वस्तिक यात्रा प्रारंभ की और केदारनाथ की ओर अपनी तीर्थयात्रा के पहले रेल चरण पर प्रस्थान किया।

भारत स्वस्तिक यात्रा के रेल चरण का विधिवत शुभारंभ सुबह 11 बजे कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन पर पूज्य मोरारी बापू और कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर शृंगेरी शारदा पीठम के शंकराचार्य के प्रतिनिधि आनंद जी, विवेकानंद रॉक मेमोरियल एवं विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी की जीवनव्रती कार्यकर्ता एवं सचिव (प्रशासन) कुमारी बी. राधा देवी, सतुआ बाबा, मदन पालीवाल तथा भारतीय रेलवे के अच्युत अनुराग उपस्थित रहे। आध्यात्मिक संतों, गणमान्य व्यक्तियों, श्रद्धालुओं और स्थानीय समुदाय के सदस्यों की उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक यात्रा के शुभारंभ को विशेष बना दिया। यह आयोजन भारत की आध्यात्मिक परंपराओं और राष्ट्रीय एकता की भावना को एक सूत्र में पिरोने का प्रतीक बना।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पूज्य मोरारी बापू ने कहा, “स्वस्तिक मंगल, कल्याण और सद्भाव का प्रतीक है, जिसकी चारों दिशाओं में विस्तार की भावना निहित है। भारत स्वस्तिक यात्रा इसी भावना और समस्त संसार के कल्याण की प्रार्थना को लेकर आगे बढ़ रही है। इस यात्रा की नींव चार प्रमुख मूल्यों पर आधारित है—त्याग, तप, तितिक्षा और तर्पण।

त्याग उन लोगों के समर्पण और बलिदान को दर्शाता है, जिन्होंने इस प्रयास के लिए स्वयं को और अपने परिवारों को समर्पित किया है। तप उन सभी लोगों की निष्ठा, साधना और अथक परिश्रम का प्रतीक है, जिन्होंने इस यात्रा के आयोजन में योगदान दिया है, विशेष रूप से मदन जी के परिवार और रूपेश का। तितिक्षा उन लोगों की भावना को समर्पित है, जो इस यात्रा में सम्मिलित नहीं हो सके, लेकिन इसके सहभागी बनने की गहरी और सच्ची इच्छा रखते हैं। वहीं, आज अमावस्या के दिन तर्पण का विशेष महत्व है। यह पितरों को अर्पण करने की अवधि का अंतिम दिन है और कल से नवरात्रि का शुभारंभ होने जा रहा है।

यह यात्रा अत्यंत-अत्यंत-अत्यंत दुर्गम है, लेकिन भगवान श्रीराम की अनुकंपा से यह सुगम हो जाएगी।

ये चारों मूल्य मिलकर भारत स्वस्तिक यात्रा को गहरा अर्थ प्रदान करते हैं। यह त्याग, समर्पण, धैर्य और कृतज्ञता की यात्रा है, जो संपूर्ण विश्व के कल्याण की प्रार्थना के साथ आगे बढ़ रही है।”

यात्रा के शुभारंभ के पश्चात कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद केंद्र में इस यात्रा की पहली राम कथा आयोजित हुई। कथा का आरंभ शृंगेरी शारदा पीठम के प्रतिनिधियों द्वारा किए गए स्वस्ति वाचन से हुआ, जिसमें यात्रा के मंगलमय होने और आगामी मार्ग के लिए आशीर्वाद की कामना की गई। इसके बाद शृंगेरी शारदा पीठम के परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य श्री भारती तीर्थ महासन्निधानम् का विशेष वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। उन्होंने भारत स्वस्तिक यात्रा और आध्यात्मिक एवं राष्ट्रीय एकात्मता के इसके व्यापक उद्देश्य के लिए अपना आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

शृंगेरी शारदा पीठम के शंकराचार्य के प्रतिनिधि आनंद जी ने कहा, “यदि हम राम कथा को एक मेघ के रूप में देखें, तो उसका दिव्य अमृत रामामृत है, जिसे पूज्य मोरारी बापू अपने वचनों के माध्यम से हम पर बरसाना चाहते हैं। इस आध्यात्मिक यात्रा का उद्देश्य हमें अरिषड्वर्ग—अर्थात् काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर जैसे छह आंतरिक शत्रुओं—से ऊपर उठने तथा स्वस्ति, यानी कल्याण और सद्भाव की अवस्था को अपनाने में सहायता करना है।

भारत स्वस्तिक यात्रा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण मानवता और पूरे विश्व के कल्याण की भावना से जुड़ा है। मेरा मानना है कि यही इस पवित्र पहल की वास्तविक भावना है। हमें अपने गुरुदेव, परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य श्री भारती तीर्थ महासन्निधानम्, शृंगेरी शारदा पीठम के मार्गदर्शन और प्रेरणा का आशीर्वाद प्राप्त है। उनका आशीर्वाद इस प्रयास को विशेष महत्व प्रदान करता है।”

कन्याकुमारी से प्रारंभ होकर हिमालय की ओर बढ़ने वाली यह यात्रा भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से देश की लंबाई और विस्तार को प्रतीकात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास है। यात्रा का पहला चरण 10 से 23 अक्टूबर तक कन्याकुमारी से केदारनाथ तक चलेगा। इस दौरान कालडी, शृंगेरी, हम्पी, तुलजापुर, ओंकारेश्वर, झांसी, मथुरा, कुरुक्षेत्र, अटारी-वाघा और जम्मू सहित कई महत्वपूर्ण स्थलों से होकर यात्रा केदारनाथ पहुँचेगी।

इस यात्रा की परिकल्पना स्वस्तिक के गहरे अर्थ और सनातन धर्म में उसके महत्व को समझने से जुड़ी है। स्वस्तिक मंगल, सद्भाव, संतुलन और कल्याण का प्रतीक है। इसकी चार भुजाओं को परंपरागत रूप से चार दिशाओं, चार वेदों, चार पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—तथा जीवन के चार आश्रमों जैसी अवधारणाओं से जोड़ा जाता है।

यह यात्रा स्वस्तिक के शाश्वत संदेश स्वस्ति अर्थात् कल्याण, मंगल और शुभता से प्रेरणा लेती है। स्वस्तिक की चार भुजाएँ चारों दिशाओं के एक साथ आने का प्रतीक हैं। यह यात्रा के मूल विचार को प्रतिबिंबित करती हैं कि भारत के विविध क्षेत्र एक व्यापक सभ्यतागत और आध्यात्मिक परंपरा के अभिन्न अंग हैं।

कन्याकुमारी से केदारनाथ तक की यह यात्रा आदि शंकराचार्य की भारत यात्राओं का भी स्मरण कराती है। आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म के माध्यम से भारत के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने का प्रयास किया था। इस यात्रा के जरिए पूज्य मोरारी बापू उसी व्यापक एकात्मता की भावना को आगे बढ़ाना चाहते हैं, ताकि विभिन्न क्षेत्रों और जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग एक साथ आ सकें।

भारत स्वस्तिक यात्रा के पहले चरण में लगभग 900 श्रद्धालु पूज्य मोरारी बापू के साथ दो विशेष ट्रेनों—कैलाश भारत गौरव और चित्रकूट भारत गौरव—में यात्रा कर रहे हैं। इन ट्रेनों में क्रमशः 22 और 16 कोच हैं।

पूज्य मोरारी बापू ने इस तीर्थयात्रा के दोनों चरणों—कन्याकुमारी से केदारनाथ और द्वारका से पुरी—में साथ चलने वाले श्रद्धालुओं के लिए राम कथा का नाम ‘मानस भारत स्वस्तिक यात्रा’ रखा है। ये क्रमशः उनकी 985वीं और 986वीं राम कथाएँ होंगी, जो रामचरितमानस के साथ उनकी दीर्घ आध्यात्मिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ेंगी।

इस यात्रा में आध्यात्मिक संतों, आचार्यों, विद्वानों, उद्योगपतियों, समाजपतियों, सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों की सहभागिता हो रही है। इस प्रकार यह यात्रा भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विविधता की सामूहिक अभिव्यक्ति बन रही है।

भारत स्वस्तिक यात्रा का आयोजन संतकृपा सनातन संस्थान द्वारा किया जा रहा है।

मिराज ग्रुप के चेयरमैन एवं संतकृपा सनातन संस्थान के प्रबंध न्यासी मदन पालीवाल ने कहा, “भारत स्वस्तिक यात्रा का शुभारंभ सामूहिक आस्था और सहभागिता का क्षण है। इस यात्रा की विशेषता यह है कि यह किसी एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, बल्कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों का साझा अनुभव है। कथा, सेवा और यात्रा के दौरान साथ बिताए गए समय के माध्यम से हम ऐसा अवसर निर्मित करना चाहते हैं, जहाँ लोग अपने मूल्यों, एक-दूसरे और अपनी सभ्यतागत विरासत की गहरी भावना से पुनः जुड़ सकें। हमारे लिए इस यात्रा की वास्तविक सफलता इस बात में होगी कि यह अपने प्रत्येक पड़ाव पर आपसी एकता, सद्भाव और सद्भावना की भावना छोड़कर जाए।”

यात्रा का पहला चरण 23 अक्टूबर को केदारनाथ में संपन्न होगा। इसका दूसरा चरण 14 नवंबर को द्वारका से प्रारंभ होकर 22 नवंबर को जगन्नाथ पुरी में संपन्न होगा। इस प्रकार देशभर में स्वस्तिक की व्यापक परिकल्पना को पूर्णता की ओर ले जाया जाएगा।

पूज्य मोरारी बापू की राम कथाएँ सदैव सत्य, प्रेम और करुणा का संदेश देती रही हैं। भारत स्वस्तिक यात्रा इन्हीं मूल्यों को भारत की धरती पर एक व्यापक आध्यात्मिक यात्रा के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास है। यात्रा के दौरान आयोजित राम कथा और संबंधित कार्यक्रम सभी के लिए खुले हैं। प्रत्येक पड़ाव पर प्रसाद स्वरूप शाकाहारी सामुदायिक भोजन (भंडारे) की व्यवस्था भी की जा रही है।

== समाप्त ==

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read