
दूसरा शुभ चरण लाभ पंचमी से शुरु होगा।।
स्वस्तिक सात्रा-१ का सफर,सुफलदायी संपन्न हुआ।।
चार धाम शंकराचार्य जी का स्वास्तिक है।।
यह तीर्थ स्वस्तिक है।।
कोई व्यास पीठ कहीं दुर्गम स्थान में जाती तो व्यवस्था कोई चेतना करती है यह मेरा अनुभव है, इसी बल पर में चल रहा हूं:बापु।।
ये यात्रा चार वस्तु देती है:भिक्षा,भजन,समाधि और सामवेद।।
दक्षिण के केरळ-कालडी से शुरु हुवी सनातन भारत के दिलों को जोड़ती आध्यात्मिक यात्रा-१ अविरत १४ दिनों का ‘सफर’ कर के २३ तारीख शुक्रवार के दिन पंच केदारों में पौराणिक केदारनाथ धाम में पहुंचा तब माइनस ४ डीग्री के ठंड ने वोर्म्थ वेलकम किया।।
स्वस्तिक यात्रा-१ की विराम दिन की उपसंहारक बातें करते हुए बापु ने बीज पंक्तियों का गान करते हुए:
मंगल भवन अमंगल हारी।
उमा सहित जेहि जपत पुरारी॥
मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवहु सो दसरथ अजिर बिहारी।
भनिति भदेस बस्तु भलि बरनी।
राम कथा जग मंगल करनी॥
सो बनु सैलु सुभायँ सुहावन।
मंगलमय अति पावन पावन॥
बताया की:भगवान केदारेश्वर की असीम कृपा से हम सब यहां है।।आज विराम का दिन है। केदारेश्वर को प्रणाम।दिव्य स्वर्ग धारा में मानसिक अवगाहन आचमन करके पूरा हिमालय पर्वत वेद पुराण रुपी खडे है।।सबको प्रणाम करके जहां जाकर जगतगुरु शंकराचार्य ने समाधि का निर्णय लिया।।निर्वाण को प्राप्त हुए।।यहां भगवान के मंदिर तीर्थ स्थान।। देवता ग्राम देवता तीर्थ देवताओं को प्रणाम करके प्रशासन और सरकार ने स्वस्तिक यात्रा का स्वागत किया पूरे प्रदेश को साधुवाद दिया।।
बापू ने कहा दुनिया का पहला मुशायरा स्वास्तिक मुशायरा अभी यहां पर होने जा रहा है! स्वस्तिक ओम का पर्याय है ओम निराकार और स्वस्तिक साकार है।।
भगवान शंकराचार्य कालडी से निकले केदार आए चार स्थानों को चुना:यमुनोत्री,गंगोत्री(गोमुख) बद्रीनाथ,केदार नाथ।।यह चार धाम शंकराचार्य जी का स्वास्तिक है।।यह चार धाम यात्रा विशेष प्रसिद्ध हो गई।।चारों की अपनी महिमा है चारों धाम का अपनी महिमा है।। यह तीर्थ स्वस्तिक है।।
इस बात का आपकी और मुझे इस यात्रा से क्या मिला ?हर एक यात्रा कठिन होती है।। दूसरी यात्रा सरल होगी।।बार बार साक्षात्कार में पूछा जा रहा है देश और दुनिया को जोड़ने का कुछ उपाय होते हैं दिव्य,सेव्य भारत को जोड़ने का प्रथम प्यास शंकराचार्य जी ने किया वह अलौकिक था।।कोई उपाय मार्ग है जो राष्ट्र को जोड़ा जाता है।। कहीं महानदी में जहाज से नौका से,हवाई मार्ग से जोड़ा भी जा सकता है।।
हमारी यह स्वाभाविक आध्यात्मिक दृष्टि से राष्ट्र को भारत के द्वारा विश्व को जोड़ने का गुरु कृपा से विनम्र प्रयास है।।
पहली बार में यहां आया तो पैदल आया था।।इस यात्रा से आपको मुझे सबको क्या मिला?एक बहुत पुरानी साखी है वह जवाब देने में मदद कर रही है। ऐसी यात्रा में चेतनायें मदद कर सकती है?भौतिक रीत से कोई बड़ी व्यक्ति जाए तो व्यवस्था हो जाती है तो कोई व्यास पीठ कहीं दुर्गम स्थान में जाती तो व्यवस्था कोई चेतना करती है यह मेरा अनुभव है।। इसी बल पर में चल रहा हूं।।शायद यह साखी इस यात्रा के लिए लिखी गई है।।किसी महापुरुष का दृश्य होगा, मैं ऐसा फील करता हूं।आप स्वीकार करें ना करें मैं मान गया केदार की साक्षी है:
स्वस्तिक सुभग सकल दिशी।
दक्षिण उत्तर धाम।
पश्चिम पूरण पूर्णता।
भक्षा अरु भजन,समाधि अरु साम।।
ये यात्रा चार वस्तु देती है:भिक्षा,भजन,समाधि और सामवेद
ये पूरी तरह हमारी निम्बार्की प्रवाही परंपरा को लागु पडता है।।
जगदगुरु में भीक्षा और भजन है।सामवेद प्राप्त कर लिया और समाधि भी प्राप्त की।।शंकराचार्य के सब स्तोत्र गेय है।सामवेद भी गायन का वेद है।।
बिलकूल उसी क्रम में यात्रा जाती है।।
जैसे कन्याकुमारी केदार को मिलने आई हो ऐसा लगता है।।
फिर बापू ने कहा कथा प्रवाह में सेतु बंध पर भीड़ हुई।। कुछ लोग पैदल जो कर्म मार्ग में-कुछ लोग ने उड़ान की-जो ज्ञान मार्ग से गये।।परमात्मा खड़े रहे दर्शन करने के लिए विशालकाय जलचर बाहर निकले।उनकी पीठ पर चलने को कहा। सब ने कहा जल चंचल है,जलचर चंचल है,बंदर भी चंचल है।। लेकिन सब राम को देखने में मगन हो गए तो यह परमात्मा का कृपा और करुणा का सेतु बना।।फिर अंगद के द्वारा संधि का प्रयास विफल हुआ।। भयानक युद्ध हुआ।।रावण को निर्वाण देकर इस रामकथा के फलश्रुति सत्य,प्रेम और करुणा का गान करके सफल और सुफल रीत से पूरी यात्रा समाप्त हुई।।
कथा का सुफल आदि शंकराचार्य जी को समर्पित करते हुए
कथा-विशेष:
मानस भारत स्वस्तिक यात्रा का दूसरा चरण गुजरात ही नहि पुरी हिन्दु सनातन परंपरा की सर्वोच्च शिखर समी जगदगुरु आदि शंकराचार्य की पुरातन पीठ एवं सप्तपुरीओं में से एक पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण की द्वारिका पुरी से १४ नवम्बर शनिवार लाभ पंचमी की शुभ संध्या से शुरु हो कर २२ नवम्बर जगन्नाथ पुरी में विश्राम लेगा।।
इन कथा का जीवंत प्रसारण प्रथम दिवस सांय ४ बजे से और शेष दिनो में यात्रा की अनुकूल समय अवधि पर आस्था टीवी चैनल और चित्रकूटधाम तलगाजरडा यु-ट्युब चैनल के माध्यम से प्रसारित होगा।।
== समाप्त ==

