
FAIA के रूप में पूर्व सम्मान के बाद, RIBA और अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्ट्स (AIA) दोनों के फेलो (Fellow) के रूप में मान्यता पाने वाले भारत के केवल तीसरे आर्किटेक्ट बने जयेश हरियाणी
अहमदाबाद, गुजरात | 12 अगस्त 2026 | भारत की वैश्विक डिजाइन और वास्तुकला की विरासत में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। अहमदाबाद स्थित INI Design Studio के संस्थापक एवं सीनियर प्रिंसिपल जयेश हरियाणी को रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स (Royal Institute of British Architects – RIBA) द्वारा इंटरनेशनल फेलो (FRIBA) के रूप में सम्मानित किया गया है। वास्तुकला के क्षेत्र में FRIBA को विश्व के सर्वोच्च व्यावसायिक सम्मानों में से एक माना जाता है।
यह प्रतिष्ठित सम्मान उन आर्किटेक्ट्स को प्रदान किया जाता है, जिनके कार्य ने अपने देश की सीमाओं से परे वास्तुकला और समाज के विकास में उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय योगदान दिया हो। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित पीयर-रिव्यू प्रक्रिया के माध्यम से प्रदान की जाने वाली FRIBA फेलोशिप वास्तुकला पेशे के सबसे प्रतिष्ठित आजीवन सम्मानों में से एक मानी जाती है।
इस सम्मान के साथ जयेश हरियाणी भारतीय मूल के उन चुनिंदा आर्किटेक्ट्स के समूह में शामिल हो गए हैं, जिन्हें यह प्रतिष्ठित फेलोशिप प्राप्त हुई है। इससे पहले, 2021 में, उन्हें American Institute of Architects (AIA) के College of Fellows में शामिल किया गया था और FAIA के रूप में सम्मानित किया गया था।
FRIBA और FAIA दोनों को विश्व में वास्तुकला के क्षेत्र के दो सर्वोच्च व्यावसायिक सम्मानों में माना जाता है। भारतीय मूल के किसी आर्किटेक्ट द्वारा दोनों सम्मान प्राप्त करना अत्यंत दुर्लभ उपलब्धि है। RIBA द्वारा दिये गये सम्मान के बाद स्वर्गीय बी. वी. दोशी, स्वर्गीय चार्ल्स कोरिया और जयेश हरियाणी भारत के केवल तीन ऐसे आर्किटेक्ट हैं, जिन्हें RIBA और AIA दोनों के फेलो के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है।
तीन दशकों से अधिक का व्यावसायिक सफर
तीन दशकों से अधिक लंबे अपने करियर के दौरान जयेश हरियाणी ने वास्तुकला के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया है, जिसमें प्लानिंग, इंजीनियरिंग, लैंडस्केप आर्किटेक्चर, सस्टेनेबिलिटी और रिसर्च का समन्वय शामिल है।
उनके नेतृत्व में अहमदाबाद मुख्यालय वाला INI Design Studio भारत की अग्रणी, बहुविषयक और पुरस्कार-विजेता डिजाइन संस्थाओं में विकसित हुआ है। संस्थान में लगभग 500 प्रोफेशनल्स कार्यरत हैं और भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाएं संचालित की गई हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, विज्ञान, शहरी विकास, पर्यटन, एयरपोर्ट्स, सिविक एवं म्यूजियम प्रोजेक्ट्स, हॉस्पिटैलिटी, खेल, सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और सांस्कृतिक विरासत जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
भारत के बदलते और विकासशील निर्मित पर्यावरण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली INI Design Studio की कुछ प्रमुख परियोजनाएं हैं:
- पवित्र नगरों के मास्टरप्लान: केदारनाथ, बद्रीनाथ, अंबाजी और बेट द्वारका
- प्रमुख वॉटरफ्रंट मास्टरप्लान: डुमस सी फेस, धरोई डैम क्षेत्र, विशाखापट्टनम बीचफ्रंट-बे सिटी, अटल सरोवर, शिवराजपुर बीचफ्रंट और चेन्नई शोरलाइन रिवाइटलाइजेशन
- राजकोट स्मार्ट सिटी मास्टरप्लान
- राजकोट और भुज में साइंस सेंटर
- गुजरात साइंस सिटी मास्टरप्लान, जिसमें एक्वेटिक गैलरी तथा एस्ट्रोनॉमी एवं स्पेस साइंस गैलरी शामिल हैं
- प्रमुख शैक्षणिक कैंपस: शिव नादर यूनिवर्सिटी, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (GTU)
- प्रमुख सिविक एवं प्रशासनिक कैंपस: मेघालय सचिवालय एवं डायरेक्टोरेट कॉम्प्लेक्स तथा सूरत म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (SMC) भवन
- प्रमुख पर्यटन स्थल विकास परियोजनाएं: मावखानु-न्यू शिलॉन्ग मास्टरप्लान, अहमदाबाद आइकॉनिक सिटी स्क्वायर तथा महाबलीपुरम, कुमारकोम और धोलावीरा में परियोजनाएं
- हेल्थकेयर कैंपस: बारामती मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, गुजरात कैंसर सोसायटी रिसर्च इंस्टीट्यूट, मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल तथा अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन, पुणे
- स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर: ईडन गार्डन्स क्रिकेट स्टेडियम रिडेवलपमेंट, निरमा यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव का विजन प्लान
जयेश हरियाणी के अंतरराष्ट्रीय पेशेवर कार्यों में कई प्रतिष्ठित परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें:
- कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी – डोहर्टी हॉल, पेन्सिलवेनिया
- कॉर्नेल यूनिवर्सिटी – इंटरडिसिप्लिनरी साइंस फैसिलिटी, न्यूयॉर्क
- रेनसेलर पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट – सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी एंड इंटरडिसिप्लिनरी स्टडीज, न्यूयॉर्क
- द फैयेज एस. सरोफिम रिसर्च बिल्डिंग, इंस्टीट्यूट ऑफ मॉलिक्यूलर मेडिसिन (IMM), ह्यूस्टन
- अल मफराक हॉस्पिटल, अबू धाबी
- मोटरसिटी, दुबई
ये सभी परियोजनाएं ऐसी वास्तुकला-दृष्टि को दर्शाती हैं, जिसमें वास्तुकला को लोगों, स्थान और पर्यावरण की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही, वास्तुकला समुदायों को सशक्त बनाने और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
जयेश हरियाणी को मिला यह सम्मान भारतीय वास्तुशिल्पीय प्रैक्टिस की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को भी दर्शाता है। आज भारत के आर्किटेक्ट्स सतत विकास, लचीले एवं सक्षम शहरों, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़े वैश्विक विमर्श में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
जयेश हरियाणी का RIBA फेलो के रूप में चयन भारतीय वास्तुकला के उभरते वैश्विक नेतृत्व को और मजबूत करता है। यह दर्शाता है कि भारतीय डिजाइन को केवल व्यक्तिगत परियोजनाओं की उत्कृष्टता के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और वास्तुकला पेशे में उसके दीर्घकालिक योगदान के लिए भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल रही है।
भारतीय वास्तुकला जगत, शैक्षणिक संस्थानों और युवा पेशेवरों के लिए भी यह सम्मान एक प्रेरणादायक उपलब्धि है। यह इस विचार को और मजबूत करता है कि भारत के आर्किटेक्ट्स स्थानीय संस्कृति, संदर्भ और समुदाय से गहराई से जुड़े रहते हुए वैश्विक वास्तुकला जगत को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन, बुनियादी ढांचे और शहरी विकास के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों और योजनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में जयेश हरियाणी को मिला FRIBA सम्मान इस बात की याद दिलाता है कि विश्वस्तरीय वास्तुकला का मूल्यांकन केवल प्रतिष्ठित और आकर्षक इमारतों के निर्माण से नहीं, बल्कि लोगों, स्थानों और समाज के भविष्य के लिए उसके दीर्घकालिक योगदान से होता है।
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