
भारत के सबसे भरोसेमंद फुटवेयर ब्रांड बाटा इंडिया ने अपने 93वें एजीएम में उत्पादों की गुणवत्ता, बेहतर स्टोर अनुभव और टिकाऊ व लाभदायक विकास की रणनीति बनाई
नई दिल्ली, भारत | 18 अगस्त 2026 | भारत के भरोसेमंद फुटवियर ब्रांड बाटा इंडिया ने अपनी 93वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में विकास के अगले चरण की रूपरेखा पेश की। कंपनी ने एक मजबूत, चुस्त और ग्राहकों पर केंद्रित कारोबार तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उत्पादों में नए प्रयोग, कामकाज में बेहतर प्रदर्शन, डिजिटल बदलाव में तेजी और उत्पाद श्रेणी में बदलाव पर आधारित कंपनी की रणनीति का उद्देश्य टिकाऊ और लाभदायक विकास के लिए कारोबार की बुनियाद मजबूत करना और देश के बदलते फुटवियर बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत करना है।
लगभग एक सदी से बाटा भारत की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा है और उसने कई पीढ़ियों का भरोसा हासिल किया है। कंपनी अब इसी भरोसे को आज के बदलते दौर की जरूरतों के साथ जोड़ने पर ध्यान दे रही है। आज ग्राहक फुटवियर में आराम, स्टाइल, अच्छी कीमत और सुविधा, इन सभी को एक साथ चाहते हैं। इसी सोच के आधार पर बाटा अपने उत्पादों की श्रेणी, स्टोर में खरीदारी के अनुभव, डिजिटल सुविधाओं और काम करने के तरीके में बदलाव कर रही है।
इस सफर में खुदरा कारोबार की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। बाटा इंडिया के पास देश का सबसे बड़ा फुटवियर रिटेल नेटवर्क है, जिसमें 2,000 से ज्यादा ब्रांड स्टोर और 775 से अधिक फ्रेंचाइजी स्टोर शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी अलग-अलग ब्रांडों के जरिए बिक्री, अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन बाजार और कई माध्यमों से ऑर्डर पूरा करने की सुविधा के जरिए भी ग्राहकों तक पहुंच रही है। 1,000 से ज्यादा स्टोर कई माध्यमों से खरीदारी की सुविधा से जुड़े हैं और 70% स्टोर स्थानीय स्तर पर तेज डिलीवरी के लिए सक्षम हैं। कंपनी का फोकस सिर्फ पहुंच बढ़ाने पर नहीं, बल्कि हर जगह ग्राहक के अनुभव को आसान, बेहतर और सुविधाजनक बनाने पर है।
‘जीरो बेस मर्चेंडाइजिंग’ बाटा इंडिया के खुदरा कारोबार में बदलाव की एक अहम पहल बनकर सामने आई है। यह पहल अब 800 से ज्यादा स्टोर में लागू है और कंपनी का लक्ष्य 2026 के अंत तक इसे 900 से ज्यादा स्टोर तक पहुंचाना है। इसके जरिए स्थानीय मांग के आधार पर दुकानों में उत्पादों का चयन किया जा रहा है, अनावश्यक सामान कम किया जा रहा है, उत्पादों की उपलब्धता बेहतर की जा रही है और ग्राहकों के लिए नए व ज्यादा उपयोगी विकल्प सामने रखे जा रहे हैं। यह पहल बाटा के एक जैसे स्टोर मॉडल से हटकर ग्राहकों की स्थानीय जरूरत के अनुसार काम करने की दिशा में बदलाव को दिखाती है।
साल के दौरान कामकाज को बेहतर बनाना भी कंपनी के प्रमुख लक्ष्यों में रहा। बाटा इंडिया ने प्रक्रियाओं को सरल बनाने, योजना बनाने की क्षमता बढ़ाने और उत्पादन, खरीद तथा आपूर्ति व्यवस्था में कामकाज को मजबूत करने पर ध्यान दिया। कंपनी के अनुसार, भारत में दुकानों पर उत्पादों की उपलब्धता में 8% सुधार हुआ है, जबकि नए उत्पादों की उपलब्धता 70% के मध्य स्तर से बढ़कर करीब 90% हो गई है। अलग-अलग मौसम के अनुसार नए उत्पादों को दुकानों में पहुंचाने से भी इसमें मदद मिली है।
बाटा इंडिया ने अपने उत्पादों की श्रेणी को भी आधुनिक बनाने का काम जारी रखा है। कंपनी अब आधुनिक डिजाइन, बेहतर आराम और बेहतर कीमत पर ज्यादा ध्यान दे रही है। हश पपीज, पावर, फ्लोट्ज, कॉम्फिट और बाटा के प्रमुख उत्पादों जैसी श्रेणियों के जरिए कंपनी ऐसे ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करना चाहती है, जो स्टाइल और आराम को लेकर ज्यादा सजग हैं और डिजिटल माध्यमों से भी प्रभावित होते हैं। लक्षित प्रचार अभियानों और बेहतर ब्रांड प्रस्तुति के जरिए कंपनी खासकर युवा ग्राहकों के बीच अपने उत्पादों को ज्यादा आकर्षक बनाने की कोशिश कर रही है।
एजीएम में बाटा इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन अश्वनी विंडलास ने कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 बाटा इंडिया के लिए सोच-समझकर किए गए बदलावों का साल रहा। हम अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत कर रहे हैं, कामकाज में तेजी और लचीलापन ला रहे हैं और कारोबार को टिकाऊ विकास के लिए तैयार कर रहे हैं। इस बदलाव के केंद्र में बेहतर उत्पाद, आधुनिक डिजाइन, ज्यादा आराम और बेहतर मूल्य देने की हमारी नई प्रतिबद्धता है। इन प्रयासों से बाटा ब्रांड और उसकी पेशकश पर पीढ़ियों से कायम भरोसे को नई मजबूती मिलेगी।”
उन्होंने आगे कहा, “बाहरी परिस्थितियां जटिल बनी हुई हैं, जिसके लिए लगातार योजना बनाने और तेजी से कदम उठाने की जरूरत है। हमारी टीमों ने अलग-अलग स्रोतों से खरीद, अनुशासित माल प्रबंधन और तेजी से काम करने के जरिए मजबूती दिखाई है। आगे देखते हुए हम सावधानी के साथ आशावादी हैं। अभी काफी काम किया जाना बाकी है, लेकिन दिशा स्पष्ट है और काम को लागू करने की गति बढ़ रही है।”
कंपनी की दीर्घकालिक मजबूती और अच्छी वित्तीय स्थिति में भरोसा जताते हुए बाटा इंडिया ने अपनी लाभांश नीति (डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन पॉलिसी) के तहत 180% अंतिम लाभांश को मंजूरी दी है। कारोबारी प्रदर्शन के साथ-साथ बाटा इंडिया ने जिम्मेदार विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जारी रखी। साल के दौरान कंपनी की सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी पहलों से 9,200 से ज्यादा छात्रों को लाभ मिला। इसके अलावा कर्मचारियों ने 7,000 से अधिक घंटे सामाजिक कार्यों में स्वेच्छा से योगदान दिया। कंपनी का मानना है कि लंबे समय तक सफल कारोबार के साथ समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालना भी जरूरी है।
बाटा इंडिया अब अपने बदलाव के अगले चरण में प्रवेश कर रही है। कंपनी बिक्री बढ़ाने, प्रीमियम उत्पादों पर जोर, ग्राहकों के साथ मजबूत जुड़ाव, बेहतर कामकाज और पूंजी के अनुशासित इस्तेमाल की संतुलित रणनीति के जरिए विकास को तेज करने पर ध्यान दे रही है।
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