
ब्रांड ने सादगीभरे ओरिजिनल साउंडट्रैक और एक सधे हुए आइडिया के ज़रिए भारत के भीड़भरेफुटवेयर सेक्टर में कम्फर्ट को नए तरीके से पेश करने की कोशिश की
मुंबई | 30 अप्रैल 2026 | असल में कंफर्ट या आराम दिखता कैसा है? क्या वह सिर्फ दावों और तकनीक में होता है, या फिर किसी आम दिन के बीच शरीर पर उसके असर में दिखाई देता है? देश का अपना ओपन-टोफुटवेयर ब्रांड चप्सफुटवेयर ने इसी सवाल को आधार बनाकर अपना नया कम्फर्टकैंपेन लॉन्च किया है। यह कैंपेन एक सरल लेकिन अप्रत्याशित सोच के इर्द-गिर्द बनाया गया है कि जब पैर सच में आराम महसूस करते हैं, तो शरीर का बाकी हिस्सा भी अपने आप बंद हो जाता है।
इंट्रो क्रिएटिव द्वारा परिकल्पित और निर्मित यह कैंपेन30 सेकंड की एक मुख्य फिल्म और उससे जुड़े स्टैटिक विज्ञापनों का हिस्सा है, जिसे यूट्यूब, मेटा और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर दिखाया जा रहा है। यह ब्रांड के 2025 के बायोडिग्रेडेबलहोर्डिंगकैंपेन के बाद का अगला कदम है। यह कहानी कहने के तरीके में एक सोचा-समझा बदलाव है, जहां प्रोडक्ट के दावों की जगह भावनाओं को जगाने वाली कहानियों को तरजीह दी गई है। यह फिल्म चप्स के साथ कंफर्ट के असली मायने को एक नए और सरल तरीके से समझाने की कोशिश करती है।
फिल्म का लिंक : https://www.youtube.com/watch?v=FUJBq9Ry-os
फिल्म में चप्सफुटवेयर पहने हुए पैरों का एक मोंटाज दिखाया गया है, जहां हर जोड़ी एक-एक करके धीरे-धीरे एक तरफ झुकते हुए गिरती है, जैसे नींद में डूब रही हो। फिल्म में न कोई वॉइसओवर है, न कोई स्पोक्सपर्सन और न ही कोई लाइफस्टाइल बैकड्रॉप, केवल एक ही विजुअल मेटाफर को बार-बार बेहद सटीक तरीके से दिखाया गया है। फिल्म के अंत में चप्सफुटवेयर का लोगो आता है और एक लाइन दिखाई देती है: “कम्फर्टेबलफुटवेयर।”
इस विजुअल के साथ एक ओरिजिनल साउंडट्रैक भी तैयार किया गया है, जिसे खास तौर पर इस कैंपेन के लिए कंपोज़ किया गया है। इसमें बार-बार दोहराई जाने वाली लाइन है: “सो गया रे, सो गया, ये भी देखो सो गया, ये भी ये भी ये भी ये भी ये भी देखो सो गया, चप्स।” इस गाने का हल्का-फुल्का और खेल जैसा अंदाज़, स्क्रीन पर दिख रही शांत इमेजरी के साथ एक दिलचस्प कंट्रास्ट बनाता है। हर “सोते हुए” पैर का मूवमेंट बीट पर आता है, जिससे एक हल्का सा टेंशन पैदा होता है जो आपको दोबारा देखने पर मजबूर करता है और इसे यादगार बना देता है।
चप्सफुटवेयर के फाउंडरयशेश मुखी ने कहा, “अलग-अलग सेगमेंट की फुटवेयर कंपनियां लंबे समय से ‘कम्फर्ट’ को अपने मुख्य वादे के रूप में इस्तेमाल करती रही हैं, लेकिन अक्सर इसे फीचर्स या सामान्य दावों के जरिए समझाया जाता है। इस कैंपेन में तरीका बदल दिया गया है, यहां कारण बताने की बजाय नतीजा दिखाया गया है। यानी कम्फर्ट को एक फीचर की तरह नहीं, बल्कि शरीर पर महसूस होने वाली प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया गया है। यह फिल्म और इससे जुड़ा कैंपेनचप्स की सोच को साफ तौर पर सामने लाता है, ऐसा फुटवेयर देना जो लंबे समय तक आराम महसूस कराए।”
चप्सफुटवेयर के हेड ऑफ ब्रांड एवं मार्केटिंग रवि अधकारी ने कहा, “यह कैटेगरी काफी भीड़भाड़ वाली है, जहां ज्यादातर ब्रांड एक जैसे संदेश देते हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसी कहानी बनाना है जो अलग भी हो और ब्रांड की पहचान से जुड़ी भी रहे। असली क्रिएटिव सवाल यह था कि बिना क्लिच के कंफर्ट को विजुअली कैसे दिखाया जाए। इसी सोच से ‘स्लीपिंगफीट’ का आइडिया सामने आया, जो सरल, अप्रत्याशित और बिल्कुल स्पष्ट है। हम इंट्रो क्रिएटिव टीम के भी आभारी हैं, जिन्होंने इस विचार को परिकल्पित करके बहुत अच्छे तरीके से स्क्रीन पर उतारा।”
इंट्रो क्रिएटिव के फाउंडर और चीफ क्रिएटिव ऑफिसर संतोष पाधी (पैडी) ने कहा, “इस कैंपेन में सबसे बड़ी चुनौती दो बातों को एक साथ दिलचस्प तरीके से पेश करना था, पहला, ब्रांड की विस्तृत प्रोडक्ट रेंज को दिखाना, जो अक्सर मुश्किल हो जाता है, और दूसरा, कम्फर्ट जैसे मुख्य संदेश के लिए एक अलग और नया नजरिया ढूंढना। इसी दौरान एक खूबसूरत और अहम ऑब्ज़र्वेशन सामने आया कि जब हम बहुत थके होते हैं और हमें सही आराम मिल जाता है, तो हम तुरंत सो जाते हैं। यही सोच चप्सफुटवेयर पर लागू की गई, जहां थके हुए पैर, जब सच में आराम महसूस करते हैं, तो मानो अपने आप शांत होकर नींद में चले जाते हैं।”

